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Mutual Fund: इक्विटी म्युचुअल फंड में जोखिम कम

Mutual Fund: इक्विटी म्युचुअल फंड में जोखिम कम

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। रिस्क यानी जोखिम हर क्षेत्र में होता है, लेकिन यह स्थिति और दूसरे कारणों पर भी निर्भर करता है। वित्तीय क्षेत्र में निवेश से जुड़े कई इस्ट्रूमेंट्स है जिनमें अलग अलग तरह के जोखिम होते हैं। मैने एक बात सीखी है कि निवेश और जोखिम एक ही सिक्के के दो पहलू है और हमेशा साथ-साथ चलते हैं। लेकिन इसके लिए हमें चीजों को मैनेज करना आना चाहिए।

जब निवेश की बात आती है तो पहले हमें अपनी सुरक्षा खासकर जीवन और स्वास्थय को प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं आपात स्थिति के लिए इमरजेंसी फंड का भी इंतजाम होना चाहिए। जब ये दोनों चीजे पूरी हो जाए तब निवेश के बारे में सोचना चाहिए। अपने निवेश यात्रा को शुरु करने से पहले हमें तीन बातों का अतंर बारीकी से समझना होगा कि सेविंग, निवेश और आकलन में क्या अंतर है।

बचत और निवेश को समझना आसान है। जबकि अटकलबाजी जोखिम भरा है, क्योंकि यह वित्तीय साधनों में पैसा लगाने के बारे में पैसा लगाते समय संबंधित जोखिम को समझने के बिना ही किया जाता है। जब आप इसके बारे में पढ़ते है तो आप इसे एक निवेशक की मानसिकता के साथ पढ़े न कि सट्टेबाजी की मानसिकता के साथ।

म्युचुअल फंड के निवेश में एक सबसे बड़ा फायदा यह है कि इशमें जोखिम उठाने की रणनीति पहले से तय होती है। जो पेशेवरों के द्वारा किया जाता है। इसलिए सीधे इक्विटी में निवेश और उसके जोखिम को समझने के लिए आपको पहले म्युचुअल फंड में निवेश करना चाहिए।

इक्विटी म्युचुअल फंड के लिए क्वालीफाई करने के लिए फंड स्कीम का इक्विटी एक्सपोजर कम से कम 65 फीसदी होना चाहिए जो अधिकतम 100 फीसदी तक हो सकता है। इसके अलावा एक इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) भी होती है जिसमें इक्विटी एक्सपोजर कम से कम 90 फीसदी होता है। इस स्कीम में निवेश तीन साल के लॉक इन पीरियड के लिए होता है। यह स्कीम इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स डिडक्शन के लिए भी क्वालीफाई करती है।

इक्विटी म्यूचुअल फंड का यूनिवर्स भारत के मार्केट कैपिटलाइजेशन और सेक्टर्स के साथ अंतरराष्ट्रीय स्टॉक्स में भी पर्याप्त डाइवर्सिफिकेशन प्रदान करता है। इसके लिए निवेश के विभिन्न तरीके अपनाए जाते हैं। कोई भी व्यक्ति निवेश जोखिम का प्रबंधन करने के लिए सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकता है।

एसआईपी के जरिए निवेश के कई लाभ हैं, लेकिन इसमें सबसे बड़ी समस्या रुपए की लागत है। जब आप एसआईपी के जरिए निवेश करते हैं तो म्यूचुअल फंड स्कीम में ज्यादा यूनिट खरीदने का प्रयास करते हैं। मार्केट के डाउन होने पर आप निवेश करते हैं और जब यूनिट्स की संख्या कम हो जाती है तो मार्केट अप हो जाता है। इस तरीके से एक अवधि के बाद फंड स्कीम में औसत यूनिट खरीदने का मौका मिलता है। सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात यह है कि एसआईपी आपके वित्तीय लक्ष्यों को पाने के लिए निवेश के अप और डाउन की स्थिति में इमोशंस को संभालता है।

इक्विटी म्यूचुअल फंड 7 से 10 साल या इससे ज्यादा लंबी अवधि के निवेश के लिए उपयुक्त है। इक्विटी म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में कंपाउंडिंग की पावर को महत्वपूर्ण इजाफा करते हैं। आप एक वित्तीय लक्ष्य तय करके निवेश शुरू कर सकते हैं। इस लक्ष्य को पाने के लिए राशि और निवेश की अवधि तय करनी होती है। आपके वित्तीय लक्ष्य के अनुसार, एसआईपी निवेश की गणना करने के लिए कई ऑनलाइन कैलकुलेटर मौजूद हैं। इसके जरिए आप अनुमानित रिटर्न की गणना कर सकते हैं। आप अपने वित्तीय लक्ष्य को तय वर्षों में पाने के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड का एक मिक्स पोर्टफोलियो बना सकते हैं।

आमतौर पर एक पोर्टफोलियो में 4 से 5 फंड स्कीम हो सकती है, जिसे आप एक निवेश सलाहकार के साथ बातचीत करने के बाद तय कर सकते हैं। एक इन्वेस्टमेंट एडवाइजर बातचीत के दौरान आपके अनुभव के आधार पर सबसे अच्छी सलाह दे सकता है। मैं भी आपको बातचीत करने के बाद ही अच्छी सलाह दे सकता हूं क्योंकि मेरे पास भी अपने वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करने के लिए एक सलाहकार है।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।