दैनिक भास्कर हिंदी: RBI के सामने बड़ी मुश्किल, गिरते रुपए को संभालें या अर्थव्यवस्था पर ध्यान दें

August 3rd, 2018

हाईलाइट

  • आरबीआई इसे लेकर असमंजस का सामना कर रहा है।
  • उसके सामने समस्या है कि रुपए को संभालने या भारतीय अर्थव्यवस्था (ग्रोथ) पर ध्यान दे।
  • बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नगदी की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में लगातार बढ़ रही मंहगाई, पेट्रोल-डीजल के दाम और डॉलर के मुकाबले गिरते रुपए को संभालना कठिन सा दिख रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इसे लेकर असमंजस का सामना कर रहा है, क्योंकि उसके सामने इन्हें संभालने के साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था (ग्रोथ) पर भी ध्यान देना है। RBI के सामने मौद्रिक नीति पर आगे बढ़ने की भी एक बड़ी चुनौती है। RBI के सामने एक के जोखिम पर दूसरे को सहारा देने की नौबत आई है।

RBI के सामने असमंजस यह भी है कि वह गिरते रुपये को थामने पर ध्यान दे, या फिर बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नगदी की व्यवस्था को पक्का करे। आर्थिक गतिविधियों में कोई अड़ंगा नहीं आ सके, इसके लिए बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नगदी की व्यवस्था पक्का करना जरूरी भी है। बता दें कि बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नगदी की व्यवस्था की समस्या नोटबंदी के बाद से ही ज्यादा सामने आ रही है। इस व्यवस्था को सुनिश्चित करना RBI के ही जिम्मे है।

ग्रोथ के लिए सबसे अच्छा रास्ता RBI के सामने यह भी है कि पहले रुपये को डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 70 के पार जाने दिया जाए। इसके बाद जब अर्थव्यवस्था लक्ष्य के मुताबिक होगी, तब रुपए को थामने पर जोर दिया जाएगा। मगर इस फैसले का लोकसभा चुनाव 2019 पर बड़ा असर पड़ सकने की संभावना अधिक नजर आ रही है। इस फैसले के कारण अर्थव्यवस्था से निवेशकों का भरोसा उठ सकता है और निवेश में कमी आएगी।

अर्थशास्त्रियों को इसकी कम उम्मीद है कि RBI रुपये की स्थिरता को लेकर बहुत चिंता करेगा, भले ही उसने ताजा मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत ब्याज दरें बढ़ाकर महंगाई को नियंत्रण में रखने को प्राथमिकता दी हो।

ICICI सिक्यॉरिटीज प्राइमरी डीलरशिप के चीफ इकॉनमिस्ट ए प्रसन्ना कहते हैं, 'अर्थव्यवस्था में पर्याप्त नकदी बनाए रखते हुए रुपये की गिरावट थामने के बीच संतुलन साधना RBI के लिए बहुत टेढ़ी खीर है।' उन्होंने कहा, 'RBI ने फिर से नीतिगत ब्याज दरें बढ़ा दीं, इससे यह साबित होता है कि वे महंगाई को काबू में रखने को लेकर गंभीर हैं और आर्थिक वृद्धि को लेकर उन्हें बहुत चिंता नहीं है। इसलिए, वे अर्थव्यवस्था में नकदी संकट को बढ़ने दे सकते हैं ताकि उनकी महंगाई नियंत्रण नीति बरकरार रहे।