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कोरोना काल में चरमराई अर्थव्यवस्था, कैसे उबरा जाए?

June 06th, 2020 21:01 IST
 कोरोना काल में चरमराई अर्थव्यवस्था, कैसे उबरा जाए?

हाईलाइट

  • कोरोना काल में चरमराई अर्थव्यवस्था, कैसे उबरा जाए?

बीजिंग, 6 जून (आईएएनएस)। जब से कोरोना महामारी फैली है, तब से अनेक देशों की इकॉनोमी यानी अर्थव्यवस्था बिगड़ गई है। कोरोना वायरस के कारण पूरे विश्व को आर्थिक कीमत भी चुकानी पड़ी है। इसके कारण उद्योग-धंधों पर भी काफी हद तक ब्रेक लग गया है। इसको देखते हुए वैश्विक जीडीपी में भी कमी की संभावना जताई गई है। कोरोना महमारी पर लगाम लगाने के लिए कई देशों में लॉकडाउन लगाया गया। दुनिया का शायद ही कोई ऐसा देश हो, जिसने लॉकडाउन का दौर ना देखा हो।

भारत में 25 मार्च से राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन का ऐलान हुआ था और उसी के असर की वजह से देश की आखिरी तिमाही में आर्थिक विकास दर कुछ कम हुई है। लेकिन अप्रैल और मई में भारत में सभी उद्योग-धंधे और कामकाज पूरी तरह से बंद रहे, इसलिए आने वाली तिमाही में विकास दर और कम रहने का अनुमान है। माना जा रहा है कि इस साल भारत की जीडीपी में 4 से 5 फीसदी की गिरावट आएगी।

अगर चीन की जीडीपी की बात करें जो भारत की जीडीपी से 5 गुना ज्यादा है, इस साल के शुरूआती तीन महीनों में चीन की जीडीपी भी 6.8 प्रतिशत तक घट गई, जो अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है, जब से चीन ने 1992 से जीडीपी के आंकड़े जारी करना शुरू किया था।

इस साल की पहली तिमाही में जर्मनी की अर्थव्यवस्था भी 2.2 प्रतिशत तक सिकुड़ गई है, फ्रांस की जीडीपी विकास दर भी 5.8 प्रतिशत तक कम हो गई, स्पेन की जीडीपी की विकास दर में 5.2 प्रतिशत की कमी आयी है, यानी की कोरोना काल में दुनिया के ज्यादातर देशों की आर्थिक विकास दर में भारी कमी आयी है।

यह तो साफ है कि इस साल भारत की जीडीपी में गिरावट रहेगी और यह गिरावट 4 से 5 फीसदी तक हो सकती है। इस गिरावट का विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग असर हो सकता है। इस कोरोना संकट से भारत के तमाम अनौपचारिक क्षेत्र और लघु व मझौले उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। लोगों की आमदनी पर भी बुरा असर पड़ रहा है। कई लोगों की नौकरी भी चली गई है। बेरोजगारी दर में वृद्धि बनी हुई है। जहां जनवरी में बेरोजगारी दर करीब 7 फीसदी तक थी, वहां मई में यह दर 27 फीसदी तक पहुंच गई है।

इस कोरोना काल में भारत के अनेक उद्योग विशेषकर सत्कार उद्योग जैसे पर्यटन, विमानन, होटल आदि पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। लेकिन कृषि क्षेत्र पर उतना खास फर्क देखने को नहीं मिल रहा, परंतु भारत का विनिर्माण क्षेत्र बुरी तरह से चरमरा गया है।

अगर देखा जाए तो इस समय भारत की जीडीपी का करीब आधा हिस्सा रेड जोन से आता है और लॉकडाउन की वजह से कामकाज पूरी तरह से ठप है। लॉकडाउन खत्म किये बिना वहां सामान्य स्थिति बहाल नहीं की जा सकती। यदि लॉकडाउन खत्म कर भी दें तो भी विमानन, रेस्तरां, होटल, और अनौपचारिक क्षेत्र के मजदूरों पर निर्भर उद्योगों में गतिविधि सामान्य से कम ही रहेगी, और जो प्रवासी मजदूर अपने गांव चले गये थे, उन्हें लौटने में वक्त भी लगेगा।

खैर, इस साल नेगेटिव ग्रोथ के बाद अगले साल 2021-22 में जीडीपी बढ़ेगी। लेकिन 5 से 6 फीसदी बढ़ भी गई तो यह सिर्फ वापसी भर ही कहा जाएगा, क्योंकि इस साल 4 से 5 फीसदी की गिरावट होगी, और यह वृद्धि हमें फिर वहीं पहुंचायेगी जहां साल 2019-20 में थे। यदि भारत साल 2022-23 में 6 से 7 फीसदी की वृद्धि कर पाता है, तब हम कह सकेंगे कि भारत मौजूदा संकट से उबर चुका है।

उसके लिए भारत को आश्वस्त करने वाली वित्तीय स्थिति निर्मित करने, सुचारू ढंग से काम करने वाला बुनियादी ढांचा बनाने, जल्दी ही बैंक की सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) दशार्ने वाले गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) सहित बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करने और निवेशकों व खासतौर पर विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए खास प्रयास करने होंगे। तब जाकर इस कोरोना संकट में चरमराई भारतीय अर्थव्यवस्था उभर सकेगी।

(लेखक : , चाइना मीडिया ग्रुप में पत्रकार हैं। साभार-चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।