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यस बैंक का मामला: ED के छापे, कॉक्स एंड किंग्स कंपनी ने लिया 2260 करोड़ रुपए का कर्ज 

यस बैंक का मामला: ED के छापे, कॉक्स एंड किंग्स कंपनी ने लिया 2260 करोड़ रुपए का कर्ज 

हाईलाइट

  • यस बैंक का मामला : ईडी ने मुंबई में 5 स्थानों पर छापे मारे

डिजिटल डेस्क, मुंबई। यस बैंक घोटाला मामले की छानबीन कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को वैश्विक पर्यटन और यात्रा कंपनी कॉक्स एंड किंग्स के मुंबई स्थित पांच ठिकानों पर छापे मारे। कॉक्स एंड किंग्स कंपनी यस बैंक से सबसे ज्यादा कर्ज लेने वालों में शामिल थी। कंपनी को यस बैंक से 2260 करोड़ रुपए का कर्ज मिला था। ईडी के एक अधिकारी ने छापेमारी की पुष्टि की है। जांच एजेंसी ने अजय अजित पीटर, पेसी पटेल, अभिषेक गोयनका, अनिल खंडेलवाल और नरेश जैन के ठिकानों पर छापेमारी की है। ये सभी लोग कॉक्स एंड किंग्स कंपनी में प्रोमोटर, ऑडिटर, डायरेक्टर, सीएफओ जैसे अहम पदों पर हैं। यस बैंक से जुड़े 3642 करोड़ रुपए के घोटाले के मामले में पीएमएलए कानून के तहत यह छापेमारी की गई है। जांच एजेंसी द्वारा की जा रही तलाशी का मकसद मामले में अधिक सबूत जुटाना है। ईडी धोखाधड़ी के मामले में यस बैंक और उससे कर्ज लेकर पैसे ना लौटने वाले कई अन्य बड़े कॉरपोरेट समूहों की जांच कर रहा है। यस बैंक के सह-संस्थापक राणा कपूर को मार्च में गिरफ्तार किया गया था और हाल ही में मुंबई की एक विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष कपूर के अलावा उसकी पत्नी और तीन बेटियों के खिलाफ भी आरोप-पत्र दाखिल किया गया है।

ED ने मुंबई में पांच स्थानों पर मारे छापे

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को यस बैंक से जुड़े धन शोधन के मामले में मुंबई के पांच स्थानों पर तलाशी ली। ईडी की अलग-अलग टीमों ने उन स्थानों पर छापे मारे, जो वैश्विक पर्यटन एवं ट्रैवल कंपनी कॉक्स एंड किंग्स और मामले से जुड़े कुछ अन्य संदिग्ध व्यक्तियों से संबंधित हैं।

एजेंसी के एक सूत्र ने बताया कि यस बैंक के सह-संस्थापक राणा कपूर और कॉक्स एंड किंग्स फर्म के बीच सौदे की जानकारी और सबूत जुटाने के उद्देश्य से ये छापे मारे गए हैं। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामले में चल रही जांच के तहत कार्रवाई की। यह पता चला है कि कॉक्स एंड किंग्स फर्म पर यस बैंक का दो हजार करोड़ से अधिक का ऋण बकाया है। यह कंपनी बैंक के शीर्ष उधारकर्ताओं में से एक है।

ईडी एक कथित धोखाधड़ी के मामले में यस बैंक और कई अन्य बड़े कॉर्पोरेट समूहों की जांच कर रही है जहां बैंक द्वारा जारी किए गए भारी ऋण गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) बन गए हैं। एजेंसी ने यस बैंक के पूर्व एमडी और सीईओ, राणा कपूर को इस साल आठ मार्च को गिरफ्तार किया था और इस मामले में मई के पहले सप्ताह में मुंबई की एक विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष अपना पहला आरोप पत्र (चार्जशीट) भी दायर किया। कपूर पर आरोप है कि उन्होंने रिश्वत लेकर कुछ फर्मों को ऋण स्वीकृत किया था।

इसके अलावा केंद्रीय जांच एजेंसी दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) पर भी छापेमारी कर चुकी है। यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर के साथ चल रहे मामले की सीबीआई जांच में पता चला है कि उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को डीएचएफएल के प्रमोटर कपिल वधावन द्वारा बिल्डर लोन की आड़ में 600 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।

सीबीआई की एफआईआर में राणा कपूर, उनकी पत्नी बिंदू राणा कपूर (आरएबी एंटरप्राइजेज के तत्कालीन निदेशक) और उनकी बेटियों रोशनी कपूर (मॉर्गन क्रेडिट्स प्राइवेट लिमिटेड और डॉयट अर्बन स्ट्राइक की निदेशक), राखी कपूर टंडन (मॉर्गन क्रेडिट्स प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक) और राधा कपूर खन्ना (मॉर्गन क्रेडिट्स प्राइवेट लिमिटेड और डूइट अर्बन वेंचर्स की निदेशक) के नाम शामिल हैं।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।