Amravati News: 15 लाख हेक्टेयर जंगल घटा, सिकुड़ते अधिवास से गांवों तक पहुंच रहे बाघ-तेंदुए

15 लाख हेक्टेयर जंगल घटा, सिकुड़ते अधिवास से गांवों तक पहुंच रहे बाघ-तेंदुए
  • बाघिन की मौत के बाद वन संरक्षण और विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
  • विदर्भ में निधि आवंटन में कथित असमानता की मुख्यमंत्री से शिकायत
  • ‘10 प्रतिशत कमीशन’ के आरोप की एसीबी से जांच कराने की मांग

Amravati News चार लोगों की जान लेने वाली बाघिन की घटना ने घटते वन क्षेत्र, सिकुड़ते वन्यजीव अधिवास और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वाइल्ड लाइफ अवेयरनेस रिसर्च एंड रेस्क्यू वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष नीलेश कंचनपूरे ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर विदर्भ में निधि आवंटन की कथित असमानता और वन संरक्षण की अनदेखी की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

15 लाख हेक्टेयर जंगल घटने का दावा : कंचनपूरे का दावा है कि महाराष्ट्र के करीब 65 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र में से लगभग 15 लाख हेक्टेयर जंगल अतिक्रमण और अन्य कारणों से घट चुका है। अधिवास सिकुड़ने से तृणभक्षी खेतों और गांवों में पहुंच रहे हैं और उनके पीछे बाघ-तेंदुए भी आबादी तक आने लगे हैं।

विदर्भ की निधि पर सवाल : शिकायत में आरोप है कि बड़े वन क्षेत्र और व्याघ्र परियोजनाओं के बावजूद विदर्भ को निधि आवंटन में अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल रही। वन विभाग के 26 दिसंबर 2025 के आदेश में 2 और 4 प्रतिशत निधि के ब्याज से 1,656.34 लाख रुपये विभिन्न वन्यजीव कार्यों के लिए आवंटित किए जाने का उल्लेख है। ऐसे में निधि के क्षेत्रवार आवंटन और उपयोग पर पारदर्शिता की मांग उठी है।

कमीशन के आरोप की जांच की मांग : संस्था ने निधि वितरण में कथित ‘10 प्रतिशत कमीशन’ की चर्चा की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अथवा उच्चस्तरीय समिति से कराने की मांग की है। यह आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता संस्था के हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

समय पर निधि नहीं मिलने का आरोप : शिकायत के अनुसार, विदर्भ के कई वन कार्यालयों को समय पर निधि नहीं मिलने से दावानल नियंत्रण, वन्यजीव सुरक्षा, संरक्षण कार्य और मजदूरों के भुगतान प्रभावित होते हैं।

Created On :   9 Sept 2026 12:46 PM IST

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