अनूठी पहल: सूखे से जूझते जिले में अब डूब क्षेत्र की जमीन पर उगेगा हरा चारा, जलस्तर घटने से बाहर आई उपजाऊ जमीन का होगा उपयोग

सूखे से जूझते जिले में अब डूब क्षेत्र की जमीन पर उगेगा हरा चारा, जलस्तर घटने से बाहर आई उपजाऊ जमीन का होगा उपयोग
  • जलाशयों का जलस्तर घटने से बाहर आई उपजाऊ जमीन का होगा उपयोग
  • चारा संकट दूर करने के लिए प्रशासन ने शुरू की पहल,
  • सर्वेक्षण के बाद होगा फसल चयन

डिजिटल डेस्क, बीड। जिले में सूखे की स्थिति के बीच पशुधन के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रशासन ने अनूठी पहल की है। जलाशयों, तालाबों और बांधों का जलस्तर घटने से बाहर आई उपजाऊ गादयुक्त जमीन पर हरे चारे की फसल उगाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इस पहल से जिले में चारे की कमी दूर करने और पशुपालकों को राहत देने की उम्मीद है। इस संबंध में बुधवार को जिलाधिकारी कार्यालय में विशेष समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

डूब क्षेत्र की जमीन का होगा सर्वेक्षण

जिलाधिकारी विवेक जॉन्सन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जलस्रोतों के डूब क्षेत्र से बाहर आई जमीन का उपयोग करने पर चर्चा की गई। सूखे के कारण पशुधन के लिए चारे की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया है।

बैठक में निर्णय लिया गया कि जिले के जलाशयों, तालाबों और अन्य जलस्रोतों के डूब क्षेत्र से बाहर आई गादयुक्त जमीन का सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके माध्यम से उपलब्ध जमीन का क्षेत्रफल और वहां खेती की संभावनाओं की जानकारी जुटाई जाएगी। इसके बाद जमीन की स्थिति और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर चारा उत्पादन की योजना तैयार की जाएगी।

उपयुक्त चारा फसलों का होगा चयन

प्रशासन की योजना के तहत सर्वेक्षण के बाद संबंधित जमीन पर उगाई जा सकने वाली चारा फसलों का चयन किया जाएगा। इसके लिए कृषि, पशुसंवर्धन और जलसंसाधन विभाग सहित संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। जमीन की उपयुक्तता और खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियों का आकलन करने के बाद योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

जलाशयों का जलस्तर घटने से सामने आने वाली जमीन का उपयोग चारा उत्पादन के लिए करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। इससे सूखे की स्थिति में उपलब्ध जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने का अवसर मिल सकता है।

पशुपालकों को राहत मिलने की उम्मीद

जिले में सूखे की स्थिति के मद्देनजर पशुधन के लिए हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे में डूब क्षेत्र की जमीन पर चारा उत्पादन की पहल कारगर साबित हो सकती है। यदि सर्वेक्षण और फसल चयन के बाद योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो चारा संकट कम करने में मदद मिल सकती है। इससे पशुपालकों को राहत मिलने के साथ पशुधन के संरक्षण में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।

बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितिन रहमान, अधीक्षक अभियंता पल्लवी जगताप, नखाते, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी सुभाष सालवे तथा जिला उपआयुक्त पशुसंवर्धन एवं दुग्ध व्यवसाय डॉ. कदम सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

Created On :   21 Oct 2026 7:28 PM IST

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