कार्रवाई: बीड में खेतों की झोपड़ी में बंधक जैसे हालात में रखे गए सावनेर के 10 मजदूरों को छुड़ाया

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  • सुबह 4 से रात 8 बजे तक गन्ना कटाई कराने का आरोप
  • रात में करंट छोड़ने की भी मिली जानकारी
  • 5 अन्य मजदूरों के भी फंसे होने की खबर
  • बोलने में असमर्थ बैतूल का मजदूर भी है शामिल

डिजिटल डेस्क, नागपुर/सावनेर। रोजगार की तलाश में दूसरे जिले में गए सावनेर के 10 गन्ना कटाई मजदूरों को बीड जिले के माजलगांव क्षेत्र से सुरक्षित छुड़ा लिया गया है। आरोप है कि मजदूरों को खेत में बनी झोपड़ी में रखकर सुबह 4 बजे से रात 8 बजे तक काम कराया जाता था। इतना ही नहीं, उन्हें भागने से रोकने के लिए रात के समय झोपड़ी के आसपास बिजली का करंट छोड़े जाने की चौंकाने वाली जानकारी भी सामने आई है। परिजनों की गुहार के बाद सामाजिक कार्यकर्ता हितेश बनसोड ने आधी रात से ही मजदूरों को छुड़ाने के प्रयास शुरू किए। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने के बाद वे खुद माजलगांव पहुंचे और मजदूरों को सुरक्षित सावनेर वापस लाने की पहल की। हालांकि, इस मामले में पांच अन्य मजदूरों के भी वहां फंसे होने की जानकारी सामने आई है। इनमें मध्य प्रदेश के बैतूल का एक ऐसा मजदूर भी शामिल बताया जा रहा है, जो बोल नहीं सकता। ऐसे में बाकी मजदूरों की सुरक्षित रिहाई को लेकर चिंता बनी हुई है।

11 दिन पहले टाटा एस वाहन से ले जाए गए थे मजदूर

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 11 अक्टूबर 2026 को मजदूरों को लेने के लिए टाटा एस वाहन सावनेर तहसील के आजनी गांव पहुंचा था। मनसर क्षेत्र के दो अन्य मजदूरों को भी साथ लिया गया। सभी को भोजन कराने के बाद उसी रात बीड के लिए रवाना किया गया। मजदूरों को बताया गया था कि उन्हें मनसर से करीब 50 किलोमीटर दूर काम के लिए ले जाया जाएगा, लेकिन उन्हें बीड जिले के माजलगांव क्षेत्र में तेलगांव खुर्द पुलिस थाने की सीमा में पहुंचा दिया गया।

  • सामाजिक कार्यकर्ता हितेश बनसोड ने आधी रात से शुरू किए प्रयास
  • खुद बीड पहुंचकर मजदूरों को सुरक्षित वापस लाने की पहल

आरोप है कि वहां मजदूरों को खेत में बनी एक झोपड़ी में रखा गया था और अलग-अलग आठ खेतों में उनसे गन्ना कटाई कराई जा रही थी। उन्हें सुबह 4 बजे काम पर लगा दिया जाता था और रात 8 बजे तक काम करना पड़ता था। मजदूर कहीं भाग न जाएं, इस पर नजर रखने के लिए कुछ लोगों को तैनात किए जाने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा रात में झोपड़ी के आसपास बिजली का करंट छोड़े जाने का भी आरोप है। हालांकि, इन गंभीर आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जांच होना बाकी है।

परिजनों ने आधी रात को मांगी मदद

मजदूरों ने अपने परिवारों से संपर्क कर वहां की परिस्थितियों की जानकारी दी, जिसके बाद परिजनों की चिंता बढ़ गई। परिवार के सदस्य मदद के लिए सावनेर पुलिस थाने पहुंचे। परिजनों के अनुसार, उन्हें माजलगांव जाने की सलाह दी गई। इसके बाद वे रात करीब 12 बजे गांव लौट आए।

कहीं से अपेक्षित मदद नहीं मिलने पर कुछ लोगों ने उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता हितेश बनसोड से संपर्क करने की सलाह दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए बनसोड ने रात करीब 2.30 बजे पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने सावनेर के उपविभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) आईपीएस सागर खर्डे को पूरे मामले की जानकारी दी और परिजनों की उनसे फोन पर बात भी कराई। विधायक डॉ. आशीष देशमुख को भी घटना से अवगत कराया गया।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद तेज हुई कार्रवाई

18 अक्टूबर को हितेश बनसोड ने नागपुर ग्रामीण के अपर पुलिस अधीक्षक अनिल म्हस्के से संपर्क कर मामले की जानकारी दी। इसके बाद सावनेर पुलिस थाने के पुलिस उपनिरीक्षक बालू राठोड़ ने कार्रवाई शुरू की। मजदूरों को ले जाने वाले व्यक्ति की तलाश कर उसे पूछताछ के लिए सावनेर पुलिस थाने बुलाए जाने की जानकारी सामने आई है।

पूछताछ के दौरान मनसर की एक महिला की भूमिका सामने आने की बात भी कही गई। संबंधित महिला से संपर्क कर माजलगांव क्षेत्र में मौजूद मजदूरों को पुलिस थाने लाने के लिए कहा गया।

18 अक्टूबर की रात करीब 9 बजे हितेश बनसोड को सूचना मिली कि सभी 10 मजदूर माजलगांव पुलिस थाने में सुरक्षित पहुंच गए हैं। हालांकि, केवल फोन पर मिली सूचना पर निर्भर रहने के बजाय बनसोड खुद माजलगांव पहुंचे। वहां उन्होंने मजदूरों से मुलाकात की और उन्हें अपने वाहन से सावनेर वापस लाने के लिए रवाना हुए।

छुड़ाए गए मजदूरों के नाम

सावनेर तहसील के आजनी गांव के गोलू चचाने, अनिल नराटे, अक्षय कातकड़े, प्रकाश इरपाची, अश्विन राऊत, निकेश नेहारे, निलेश इरपाची और अजय कातकड़े को सुरक्षित छुड़ाया गया है। वहीं, खर्डुका गांव के सुधीर राजूके और नितीन वाघाडे भी इनमें शामिल हैं।

पांच अन्य मजदूरों की रिहाई का इंतजार

दस मजदूरों की सुरक्षित वापसी के बाद अब पांच अन्य मजदूरों के वहां फंसे होने की जानकारी ने चिंता बढ़ा दी है। इनमें मध्य प्रदेश के बैतूल का एक बोलने में असमर्थ मजदूर भी शामिल बताया जा रहा है। ऐसे में उनकी पहचान, वर्तमान स्थिति और सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

सावनेर नगर परिषद के उपाध्यक्ष राजू घुगल ने संकट में फंसे मजदूरों की मदद के लिए किए गए प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया। हितेश बनसोड ने मजदूरों की सुरक्षित रिहाई के लिए अपर पुलिस अधीक्षक अनिल म्हस्के का विशेष आभार व्यक्त किया।

बनसोड ने मांग की कि दूसरे जिलों में गन्ना कटाई के लिए जाने वाले मजदूरों का संबंधित पुलिस थानों में पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, उनके सुरक्षित आवास, काम की उचित परिस्थितियों और परिवारों से संपर्क बनाए रखने की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने मजदूरों के साथ कथित अन्याय की गहन जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग की है।

Created On :   19 Oct 2026 7:50 PM IST

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