एक्शन में महारेरा: 190 प्रोजेक्ट पर रोक - त्योहार में घर खरीदने से पहले सावधान, बैंक खाते फ्रीज करने से लेकर बिक्री और रजिस्ट्री पर भी पाबंदी

190 प्रोजेक्ट पर रोक - त्योहार में घर खरीदने से पहले सावधान, बैंक खाते फ्रीज करने से लेकर बिक्री और रजिस्ट्री पर भी पाबंदी
  • कई साल की देरी, अब तक कब्जे का इंतजार
  • प्रोजेक्ट में देरी के कई कारण

डिजिटल डेस्क, नागपुर. त्योहारों में नया घर या प्लॉट खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बुकिंग से पहले सावधान हो जाएं। महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (महारेरा) ने नागपुर जिले के 190 प्रोजेक्ट पर कार्रवाई की है। संबंधित परियोजनाओं की बिक्री पर रोक लगाने के साथ बैंक खाते फ्रीज करने और एग्रीमेंट व सेल डीड के पंजीकरण पर भी रोक लगाने जैसी कार्रवाई की गई है। ऐसे में बिल्डरों के आकर्षक ऑफर, भारी डिस्काउंट और जल्द कब्जा देने के वादों के बीच ग्राहकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

महारेरा कानून के तहत एक्शन

महारेरा ने रियल एस्टेट कानून, 2016 के तहत यह कार्रवाई की है। संबंधित बिल्डरों ने प्रोजेक्ट की जानकारी और निर्माण की प्रगति का ब्योरा समय पर अपडेट नहीं किया। साथ ही, निर्धारित शर्तों का पालन भी नहीं किया। इसके बाद प्राधिकरण ने कार्रवाई की। महारेरा की ‘समापन तिथि समाप्त’ श्रेणी में नागपुर जिले के 190 प्रोजेक्ट दर्ज हैं। इनमें आवासीय टाउनशिप, अपार्टमेंट, प्लॉटिंग स्कीम और व्यावसायिक परियोजनाएं शामिल हैं। वर्धा रोड, मिहान और बेसा-बेलतरोड़ी जैसे प्रमुख इलाकों के प्रोजेक्ट भी इस सूची में हैं।

कई साल की देरी, अब तक कब्जे का इंतजार

सूची में जिले के नामी और बड़े बिल्डरों के नाम भी शामिल हैं। प्रोजेक्ट पूरा करने में देरी का खामियाजा घर खरीदारों को भुगतना पड़ रहा है। कई ग्राहकों को तीन से चार साल से कब्जे का इंतजार है। सूची में 16 ऐसे प्रोजेक्ट शामिल हैं, जिन्हें वर्ष 2017 में पूरा हो जाना चाहिए था। वहीं, वर्ष 2018 में पूरे होने की निर्धारित समय-सीमा वाले कई प्रोजेक्ट भी अब तक अटके हैं। समय पर निर्माण पूरा नहीं होने से ग्राहकों का पैसा फंसने और घर मिलने में देरी जैसी समस्याएं हैं।

प्रोजेक्ट में देरी के कई कारण

क्रेडाई के पूर्व पदाधिकारी ने कहा-रियल एस्टेट सेक्टर में कुछ बिल्डरों की लापरवाही का खामियाजा सभी बिल्डरों को नहीं भुगतना चाहिए। प्रोजेक्ट में देरी के पीछे कई बार तकनीकी, आर्थिक और प्रशासनिक कारण भी होते हैं। महारेरा की कार्रवाई जरूरी है, लेकिन कार्रवाई से पहले हर प्रोजेक्ट की स्थिति और देरी के कारणों की जांच होनी चाहिए। साथ ही, ग्राहकों के हितों की रक्षा करते हुए बिल्डरों को भी अपनी बात रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए।

बिल्डरों पर एक्शन

आदेश लागू होने पर बिल्डर नए फ्लैट या प्लॉट नहीं बेच सकता।

प्रतिबंध होने पर बिक्री समझौते और सेल डीड का पंजीकरण नहीं करा सकता।

फ्रीज खाते से प्रतिबंधित लेन-देन नहीं कर सकता।

आदेश में पाबंदी होने पर विज्ञापन, बुकिंग और बिक्री के लिए ग्राहकों को आमंत्रित नहीं कर सकता।

बुकिंग से पहले ये 5 जांच जरूर करें

  • महारेरा की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर उसकी मौजूदा स्थिति जांचें।
  • प्रोजेक्ट कब पूरा होना था और बिल्डर ने समय बढ़ाने के लिए आवेदन किया है या नहीं, इसकी जानकारी लें।
  • जमीन के मालिकाना हक, स्वीकृत नक्शे और जरूरी सरकारी अनुमतियों की जांच करें।
  • प्रोजेक्ट पर बिक्री या रजिस्ट्री संबंधी कोई रोक है या नहीं, आदेश का दायरा क्या है और उसकी मौजूदा स्थिति क्या है, यह पता करें।
  • बिक्री समझौते की सभी शर्तें ध्यान से पढ़ें। हर भुगतान की रसीद लें और जरूरत पड़ने पर प्रॉपर्टी मामलों के वकील से सलाह लें।

Created On :   19 Oct 2026 7:00 PM IST

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