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Bhandara News: भंडारा के 213 करोड़ की अधूरी सीवरेज परियोजना बनी जी का जंजाल

Bhandara News शहर के सर्वांगीण विकास के लिए शुरू किया गया करीब 213 करोड़ रुपए का अंडरग्राउंड ड्रेनेज (सीवरेज) प्रोजेक्ट फिलहाल अव्यवस्था का उदाहरण बनता जा रहा है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना दो चरणों में लागू की जा रही है। पहले चरण की लागत लगभग 104 करोड़ रुपए और दूसरे चरण की लागत करीब 109 करोड़ रुपए है।
इस प्रोजेक्ट से शहर की पूरी सीवरेज व्यवस्था को आधुनिक बनाने का दावा किया गया था, किंतु वास्तविकता इससे बिल्कुल विपरीत अलग नजर आ रही है। शहर के कई हिस्सों में पाइप-लाइन का काम अधूरा पड़ा है। कई जगह पाइप डाले बिना ही गड्ढे छोड़ दिए गए हैं। कहीं नई सड़कें बनने के बाद फिर से खोद दी गई। जिससे पहले सड़क या पहले गटर लाइन? यह सवाल उपस्थित हो गया है। केंद्रीय लोक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण अभियांत्रिकी संगठन (सीपीइइओ) एवं नगर परिषद मानकों के अनुसार सीवरेज प्रोजेक्ट में चरणबद्ध और सुरक्षित तरीके से काम करना अनिवार्य होता है। इसमें सही ढलान के साथ पाइप डालना, मजबूत बैकफिलिंग, मैनहोल निर्माण और समय पर सड़क की मरम्मत जरूरी होती है, किंतु भंडारा में इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन होता दिख रहा है।
काम की रफ्तार धीमी : प्रोजेक्ट की गति बेहद धीमी बनी हुई है। तय समय में पूरा होना था, लेकिन कई क्षेत्रों में काम अधूरा है, जबकि कुछ जगहों पर काम शुरू भी नहीं हुआ है। मजदूरों और मशीनरी की कमी के कारण परियोजना की समयसीमा लगातार बढ़ रही है, जिससे लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
सड़कें बदहाल, हादसों का खतरा : गटर लाइन डालने के बाद सड़क की मरम्मत सबसे जरूरी थी, लेकिन यहां केवल मुरूम डालकर रास्ते छोड़ दिए गए हैं। कई जगह गड्ढे अब भी खुले पड़े हैं, जिससे रोजाना हादसों का खतरा बना हुआ है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति अधिक खतरनाक हो गई है।
बारिश में बिगड़ते हंै हालात : प्रोजेक्ट में प्रशासन की जिम्मेदारी अहम होते हुए भी यहां नियमित निरीक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और ठेकेदार पर कार्रवाई का अभाव दिखाई दे रहा है। खर्च की गई राशि और कार्य की गुणवत्ता की जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कागजों पर भव्य दिखने वाला यह प्रोजेक्ट फिलहाल भंडारा के नागरिकों के लिए मुसीबत बन गया है।
नहीं हो पाया संपर्क इस विषय में जानकारी लेने के लिए नगर परिषद मुख्याधिकारी जुम्मा प्यारेवाले और नगर परिषद निर्माण विभाग के अभियंता महेश लाडे से संपर्क किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
Created On :   22 April 2026 4:29 PM IST















