MP News: शहपुरा आरओबी की निगरानी में फेल आरोपी कंपनी को पांच महीने बाद मिले काम

शहपुरा आरओबी की निगरानी में फेल आरोपी कंपनी को पांच महीने बाद मिले काम

भास्कर ब्यूरो, भोपाल। जबलपुर के शहपुरा रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) की देखरेख में फेल रही नई दिल्ली की कंसल्टेंट कंपनी मेसर्स इंटरकांटीनेंटल कंसल्टेंट्स एं टेक्नोक्रेट्स प्रालि (आईसीटी प्रालि) पर मप्र सड़क विकास निगम (एमपी-आरडीसी) मेहरबान है। शहपुर आरओबी का एक हिस्सा गिरने के आरोप में आईसीटी प्रालि के टीम लीडर हुकुम सिंह परमार और निर्माण कंपनी वागड़ा इंफ्रा एंड सोरठिया वेल्जी रत्ना (जेवी) के खिलाफ आरडीसी ने शहपुरा थाने में एफआईआर दर्ज करवा रखी है।

आरडीसी ने इसे ब्लेकलिस्ट और डिबार करने की भी तैयारी की थी। डिबारमेंट के लिए केंद्रीय मंत्रालय को भी लिख रखा है। कारण बताओ नोटिस भी दिया जा चुका। अब आरडीसी ने ब्लेकलिस्ट करने के उलट दो अलग-अलग टेंडरों में 10 कंपनियों को रिजेक्ट कर 17 करोड़ के नए काम दे दिए। इसमें मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड की निगरानी का काम भी शामिल है।

आईसीटी प्रालि को दिए गए काम पर इसलिए सवाल उठ रहे कि जिस पर आरडीसी के अफसरों ने ही भ्रष्टाचार के आरोप में फंसी कंसल्टेंसी कंपनी को शहपुरा आरओबी गिरने के 5 महीने बाद ही मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड की निगरानी का काम दे दिया। शहपुरा आरओबी गिरने पर इसकी गुणवत्ता की जांच सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट ने की थी। इसकी रिपोर्ट में भ्रष्टाचार-घटिया मटेरियल का उपयोग होना पाया गया। इसकी निगरानी का काम आईटीसी प्रालि कंपनी के पास था, लेकिन इसने आरडीसी को जानकारी नहीं दी। इसके चलते आईटीसी के टीम लीडर हुकुम सिंह परमार पर एफआईआर दर्ज कर कंपनी को बचा लिया था अाैर अब आईटीसी को नए काम दिए जाने लगे।

ऑपरेशन एण्ड मैंटेनेंस के टेंडर में 4 कंपनीयों ने भाग लिया था, लेकिन 2 को डिस्क्वालिफाई कर दिया। आईसीटी प्रालि और एसए इन्फ्रास्ट्रक्चर कंसलटेंट प्रालि को रेस में रखा। सूत्रों के अनुसार दोनों कंपनियां दो दोस्त प्रशांत कपिला-सौरभ शेखर की है। दोनों ने सिंडकेट बनाया है। आरडीसी ने पैकेज-1 का काम आईसीटी और पैकेज-2 का काम एसए इन्फ्रास्ट्रक्चर को दिया। उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड का काम आईसीटी प्रालि को दिया। इसके टेंडर में 8 कंपनियों ने माग लिया था। 4 को डिस्क्वालिफाय कर दिया और आईसीटी प्रालि को काम दे दिया।

दो काम और कई आरोप

उज्जैन-जावरा के सुपरविजन के लिए एमएसवी इंटरनेशनल कंसलटेंसी ने 5 करोड़ 74 लाख 1,950 रुपए का कम रेट दिया, जिसे दरकिनार कर आईसीटी प्रालि को 8 करोड़ 33 लाख 79753 में दे दिया। इससे आरडीसी-शासन को लगभग 2 करोड़ 59 लाख 77,803 अिधक देना होगा।

मेसर्स आईसीटी प्रालि के लिए टेंडर डॉक्टयूमेेंट्स में कंपनी के अनुभव के आधार पर बदलाव किए गए, ताकि आईसीटी को काम दिया जा सके।

वार्षिक टर्नओवर अमुमन अनुमानित लागत का 2 प्रतिशत मांगा जाता है, लेकिन अधिकारियों ने टर्नओवर अनुमानित लागत का 10 प्रतिशत या 200 करोड़ मांगा, जो कि मेसर्स आईसीटी प्रालि के पक्ष में रहा। काम भी मिला।

टेंडर मूल्यांकन में भी बदलाव किये गए। अनुपातिक आधार पर टेंडर के तकनीकी प्रस्तावों पर नम्बर दिये गये (जिसके पास 200 करोड़ से अधिक जितना भी टर्नओवर है उसे उतने ही अधिक नम्बर दिए जाएंगे)। यह आईसीटी प्रालि को फेवर करने के लिए करने का आरोप है।

जितने अिधक सालों का अनुभव होगा उसी अनुपात में संबंधित कंपनी को मूल्यांकन के नम्बर दिए गए, जबकि अारडीसी के ही अन्य टेंडरों में ऐसी अनुपातिक शर्ते नहीं होती है।

एक शर्त शुद्धि-पत्र के जरिए बदली गई, जिसमें अनुनय के मूल्यांकन में वही कार्य स्वीकार किये गये जिसकी फीस 5 करोड़ से अधिक थी और जिन कंपनियों के पास उन कार्यों के अनुभव 5 करोड से कम थे उन्हें बाहर कर दिया। ऐसा आईसीटी प्रालि के लिए किया गया। कंपनी ने टेंडर वेल्यू 10 करोड़ से कम डाली ताकि मुख्य सचिव का अनुमोदन न लेना पड़े।

इनका कहना

कंसल्टेंट कंपनी के खिलाफ एक्शन लिया गया था। टीम लीडर पर केस दर्ज है। कंपनी पर भी एक्शन लिया था। निर्माण संबंधी पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है। हमने आईसीटी प्रालि को डिबारमेंट करने के लिए केंद्रीय मंत्रालय को लिखा है। अभी डिबार नही हुआ, कई कंपनियां ऐसी है, जिनकी जांचे चल रही, लेकिन काम बंद नहीं किया जा सकता।


Created On :   31 Aug 2026 11:34 PM IST

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