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MP News: सिंहस्थ को लेकर पुलिस को डॉक्टर बताएंगे मेडिकल इमरजेंसी में क्या करें, 20 चरणों में होगी अलग-अलग ट्रैनिंग

डिजिटल डेस्क, भोपाल। सिंहस्थ-2028 के लिए मप्र पुलिस को 20 चरणों में ट्रैनिंग दी जाएगी कि कैसे ड्यूटी की जाए और श्रृद्धालुओं को कैसे संभाला जाए। ट्रैनिंग में आयोजन की सफलता, सुरक्षा, व्यवस्था आिद के बारे में बताया जाएगा। पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के सभी जिलों और इकाइयों में पदस्थ पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ट्रैंड करने के लिए 6 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उप पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था तरूण नायक ने बताया कि सिंहस्थ-2028 के दौरान कानून-व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात, भीड़ प्रबंधन, आपदा प्रबंधन व आपातकालीन परिस्थितियों से से निपटने के उद्देश्य से पुलिस लाइन उज्जैन में दिनांक 22 अप्रैल से 15 मई तक ट्रैनिंग ऑफ ट्रैनर्स (टीओटी) किया गया था। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों एवं इकाइयों से चयनित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है। अब यही प्रशिक्षित मास्टर ट्रैनर्स अपने-अपने जिलों में पुलिस बल को प्रशिक्षण मॉड्यूल के अनुसार प्रशिक्षण देंगे।
प्रशिक्षण कैलेंडर के अनुसार 1 जून से दिसंबर तक 20 बैचों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक बैच में जिला पुलिस बल, विशेष सशस्त्र बल, रेडियो शाखा, विशेष शाखा, पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों व नगर सेना के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहेंगे। सिंहस्थ में ड्यूटी के लिए संभावित शत-प्रतिशत पुलिस बल को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है, जिससे मेला ड्यूटी की चुनौतियों और जिम्मेदारियों को अच्छे से निभा सके। प्रशिक्षण में कानून-व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ आधुनिक चुनौतियों और आपातकालीन परिस्थितियों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। बम निरोधक दस्ता (बीडीडीएस), क्विक रिस्पांस फोर्स (क्यूआरएफ), स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और होमगार्ड के विशेषज्ञ अधिकारियों को प्रशिक्षण में शामिल किया गया है। मेडिकल इमरजेंसी के लिए सीएमएचओ के सहयोग से सीपीआर और प्राथमिक चिकित्सा संबंधी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
सिंहस्थ-2016 का होगा पुनरावलोकन
ट्रैनिंग मॉड्यूल में शारीरिक प्रशिक्षण, योग एवं मेडिटेशन से लेकर सिंहस्थ का ऐतिहासिक, धार्मिक एवं भौगोलिक परिचय, सिंहस्थ-2016 का पुनरावलोकन, पुलिस दायित्व, मेला क्षेत्र का जोन विभाजन, घाटों का संचालन, अस्थायी थानों की भूमिका, बल वितरण, यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, श्रद्धालुओं की आवाजाही, अभिसूचना संकलन, आतंकवाद एवं नक्सलवाद से संबंधित चुनौतियां, मेला क्षेत्र में निगरानी एवं चेकिंग, शाही स्नान व्यवस्था, वीआईपी सुरक्षा, अखाड़ा व्यवस्था एवं पेशवाई जुलूस प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं।
प्रशिक्षण में यातायात योजना, ग्रीन कॉरिडोर, आपदा प्रबंधन, पुलिस बल की आवास व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी प्रणाली, रेडियो संचार व्यवस्था, समग्र सुरक्षा योजना, विस्फोटक एवं आईईडी की पहचान एवं निराकरण, सोशल मीडिया एवं मीडिया प्रबंधन, सॉफ्ट स्किल्स, चिकित्सकीय व्यवस्था, क्विक रिस्पांस अरेंजमेंट तथा प्रशिक्षण प्राप्त एवं इच्छुक कर्मचारियों के पोर्टल आधारित पंजीयन जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है।
Created On :   2 Jun 2026 10:38 PM IST











