Bhopal: एफआरएआई ने अवैध व्यापार और प्रिडेटरी प्राइसिंग पर जताई चिंता, छोटे व्यापारियों की सुरक्षा के लिए सरकार से हस्तक्षेप की मांग

एफआरएआई ने अवैध व्यापार और प्रिडेटरी प्राइसिंग पर जताई चिंता, छोटे व्यापारियों की सुरक्षा के लिए सरकार से हस्तक्षेप की मांग
भोपाल में आयोजित सेमिनार में जालसाजी नेटवर्क और प्रिडेटरी मार्केट प्राइस से छोटे व्यापारियों की सुरक्षा के लिए नीतिगत स्तर पर तुरंत कदम उठाने की अपील की गई

भोपाल। फेडरेशन ऑफ रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FRAI) की मध्यप्रदेश शाखा ने बुधवार को भोपाल में “मॉडर्न मार्केट में अवैध व्यापार का सामना” विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया। सेमिनार में रिटेलर्स, व्यापारिक संगठनों और नीति-निर्माताओं ने भारतीय रिटेल इकोसिस्टम के सामने तेजी से बढ़ रहे दो बड़े खतरों—अवैध व्यापार और बाजार में बढ़ती अनुचित प्रतिस्पर्धा—पर गंभीर चिंता जताई।

कार्यक्रम में नकली उत्पादों, गैर-कानूनी डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों और नियमों का पालन नहीं करने वाले उत्पादों के बढ़ते प्रसार को लेकर चिंता व्यक्त की गई। साथ ही यह भी कहा गया कि कुछ क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की प्रिडेटरी प्राइसिंग, भारी डिस्काउंट और तेजी से विस्तार की रणनीतियों के कारण छोटे व्यापारियों और पारंपरिक कारोबारियों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो रहा है।

सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि अवैध व्यापार और बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी राजस्व, उपभोक्ताओं का भरोसा और लाखों छोटे व्यापारियों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।

कार्यक्रम में भाजपा भोपाल जिला अध्यक्ष रवींद्र यति, भोपाल मैनेजमेंट एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट राम गिरीश द्विवेदी, भोपाल नगर निगम के एमआईसी सदस्य आर.के. बघेल और अधिवक्ता एवं कानूनी सलाहकार उमेश द्विवेदी सहित प्रदेशभर के विभिन्न व्यापारिक संगठनों और रिटेल एसोसिएशनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स पर उठे सवाल

रिटेलर्स ने कहा कि क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जहां ग्राहकों को तेजी से सेवाएं दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ये प्लेटफॉर्म नकली और गैर-कानूनी उत्पादों के प्रसार का माध्यम भी बनते जा रहे हैं। वक्ताओं के अनुसार फ्लैश सेल, भारी छूट और अत्यधिक कम कीमतों की रणनीति के कारण ग्राहक कई बार असली और नकली उत्पादों में अंतर नहीं कर पाते।

सेमिनार में बताया गया कि आज किराना, फूड प्रोडक्ट्स, पर्सनल केयर, स्किनकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रीमियम मोबाइल फोन तक कुछ ही मिनटों में डिलीवर किए जा रहे हैं। लेकिन तेज डिलीवरी और कम कीमतों की प्रतिस्पर्धा ने नकली और असुरक्षित उत्पादों के बाजार में प्रवेश का खतरा भी बढ़ा दिया है।

“छोटे व्यापारियों के अस्तित्व पर संकट”

मध्यप्रदेश पथ विक्रेता एकता संघ के अध्यक्ष रत्नेश उपाध्याय ने कहा कि छोटे रिटेलर और किराना स्टोर भारत की स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि प्रिडेटरी प्राइसिंग, भारी डिस्काउंट, क्विक कॉमर्स के अनियंत्रित विस्तार और नकली सामान के बढ़ते कारोबार से पारंपरिक व्यापारियों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भारत की पारंपरिक उद्यमिता संस्कृति को गंभीर नुकसान हो सकता है, जिसने वर्षों से लाखों परिवारों को रोजगार और स्वरोजगार उपलब्ध कराया है।

मजबूत रेगुलेशन और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की मांग

सेमिनार में शामिल व्यापारिक संगठनों ने सरकार और नीति-निर्माताओं से ऑनलाइन रिटेल सेक्टर में मजबूत रेगुलेटरी निगरानी, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा नीति और छोटे व्यापारियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अवैध और नकली उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की अपील की गई।

एफआरएआई ने बताया कि यह संगठन प्रदेशभर के करीब दो लाख स्ट्रीट वेंडर्स, किराना स्टोर्स और पारंपरिक रिटेलर्स का प्रतिनिधित्व करता है और लंबे समय से छोटे व्यापारियों के हितों एवं निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था की मांग उठाता रहा है।

सेमिनार का समापन छोटे व्यापारियों के हितों की सुरक्षा और पारंपरिक व्यापारिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की सामूहिक अपील के साथ हुआ।

Created On :   24 Jun 2026 6:08 PM IST

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