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Bhopal News: पीजीआई की रिपोर्ट से खुली सरकारी स्कूलों की पोल, 50 प्रतिशत अंक भी नहीं ला पाए 47 जिलों के स्कूल

डिजिटल डेस्क, भोपाल। परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फॉर डिस्ट्रिक्ट ऑफ इंडिया (पीजीआई-डी) 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार मप्र के सरकारी स्कूलों की स्थिति ठीक नहीं है। पीजीआई-डी की 6 कैटेगरी में मिले अंक प्रदेश के सरकारी स्कूलों की पोल खोल रहे। प्रदेश में टॉप में रहने वाले स्कूल सीधी का स्कोर भी 55 प्रतिशत के आसपास ही रहा। प्रदेश के 6 जिलों के सरकारी स्कूल ही 50 प्रतिशत का आंकड़ा छू पाए। इन्हें कुल 600 में से 300-333 अंक मिले। वहीं 41 जिलों के स्कूल 41-49 प्रतिशत के बीच रहे। साथ ही 6 जिलों के स्कूलों को 41 प्रतिशत से भी कम अंक मिला। पीजीआई-डी की रिपोर्ट का आकलन करें तो सरकारी दावे और असलियत में अंतर दिखाई दे रहा।
सीधी को कुल 333 अंक मिले। इसके बाद उज्जैन को 323 शाजापुर को 318 दमोह को 312, नरसिंहपुर को 307 और सागर को 301 अंक मिले। यानी छोटे शहरों के सरकारी स्कूलों ने बेहतर स्कोर अचीव किया तो वहीं भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के सरकारी स्कूल पिछड़े रहे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या वजह रही कि कम सुविधा वाले छोटे शहरों के सरकारी स्कूल अधिक स्कोर लाने में कामयाब रहे। 6 कैटेगरी के डिजिटल लर्निंग में इन स्कूलों को कम अंक मिले इसके बावजूद छोटे शहरों ने बड़े जिलों को पीछे छोड़ दिया। वहीं स्कूल सेफ्टी एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटी एंड स्टूडेंट एंटाइटलमेंट पर भी सवाल खड़े हो रहे।
बच्चों की सुरक्षा और सेफ्टी में भी पीछे
इंफ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटी एंड स्टूडेंट एंटाइटलमेंट (आईएफ एंड एसई) कैटेगरी में टीकमगढ़ सबसे पीछे रहा है। टीकमगढ़ को 51 मे से 18 और निवाड़ी को 19 अंक मिले हैं। डिंडौरी सबसे आगे रहा है। डिंडोरी को 26 अंक मिले। लेकिन हैरानी की बात यह है कि मप्र को कोई भी स्कूल सेफ्टी एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन में बहुत अच्छा नही पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र सहित अन्य प्रदेशों की तुलना में मप्र काफी पीछे रहा है। इसी तरह आउटकम की स्थिति भी मप्र के ठीक नहीं है। स्कूल सेफ्टी एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन कैटेगरी में नीमच को छोड़ दिया जाए तो किसी भी जिले ने 50 प्रतिशत का आंकड़ा नहीं छुआ। कुल 35 अंक में से मप्र के सरकारी स्कूलों को 9- 17 अंक ही मिले। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी स्कूलों में बच्चों की सेफ्टी और सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे। निवाड़ी, बड़वानी अलीराजपुर और झाबुआ की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। इफेक्टिव क्लासरूम ट्रांजैक्शन(ईसीटी) यानी प्रभावी कक्षा संचालन में भी प्रदेश के सरकारी स्कूलों का आंकड़ा करीब 60 प्रतिशत तक ही रहा। गवर्नेंस प्रोसेस(जीपी) या शासन की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
सुविधा का नतीजों से संबंध नहीं
रिपोर्ट में दिलचस्प नतीजे निकलकर सामने आए हैं। फैसिलिटी और डिजिटल होने के बाद भी बड़े शहरों के सरकारी स्कूलों के उतने अच्छे परिणाम सामने नहीं आए। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि केवल संसाधन से शिक्षा की गुणवत्ता में नहीं बढ़ती। रिपोर्ट में ज्यादा डिजिटल संसाधन वाले जिलों को छोटे और कम डिजिटल वाले जिलों ने बाजी मारी है। भोपाल(285 अंक), इंदौर(284 अंक), जबलपुर (267 अंक )और ग्वालियर (277 अंक )बड़े शहरों को छोटे शहरों ने पीछे छोड़ दिया। यानी संसाधनों के साथ शिक्षा गुणवत्ता, शिक्षक, पढ़ाने की व्यवस्था और बच्चों को एम्बियंस की भी जरूरत होती है।
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क्या है पीजीआई इंडेक्स
परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स से स्कूली शिक्षा में राज्यों के प्रदर्शन का आकलन किया जाता है। स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने अब तक 2017-18 से 2024-25 तक के वर्षों के लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों की पीजीआई रिपोर्ट जारी की है। इसको स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव लाने के लिए एक टूल के तौर पर तैयार किया गया है। जिसका मकसद सभी जिलों के प्रदर्शन का एक ही पैमाने पर आकलन करना है।290 अंक आउटकम, 90 अंक इफेक्टिव क्लासरूम ट्रांजेक्शन (ईसीटी), 51 अंक इंफ्रास्ट्रक्चर, फैसिलिटीज एंड स्टूडेंट एंटाइटलमेंट्स (आईएफ एंड एसई), 35 अंक स्कूल सेफ्टी एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन (एसएस एंड सीपी), 50 अंक डिजिटल लर्निंग (डीएल) और 84 अंक गवर्नेंस प्रोसेस (जीपी) के हैं।
इनका कहना है
हमने हर प्वाइंट के नंबर को लेकर रिपोर्ट मांगी हैं। किन बिंदुओं पर यह आकलन किया गया है। जिन बिंदुओं पर जिलों में बेहतर परिणाम आए हैं उन पर अमल किया जाएगा। रिपोर्ट आने पर किन क्षेत्रों में काम करने की ज्यादा जरूरत है इसका भी पता लगाया जा सकेगा। बच्चों की अच्छी शिक्षा को देखते हुए शिक्षकों की ट्रेनिंग दी जा रही। बच्चों के लिए बेहतर माहौल मिले इसके लिए कार्य किया जा रहा।
संजय गोयल, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग
Created On :   7 Sept 2026 11:48 PM IST













