Jabalpur News: जिन हाथों में हथकड़ियां होती थीं, उनमें नजर आई बदलाव की कलम

जिन हाथों में हथकड़ियां होती थीं, उनमें नजर आई बदलाव की कलम
उल्लास साक्षरता कार्यक्रम की परीक्षा में सेंट्रल जेल के 200 बंदियों ने दी परीक्षा

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। पहले ही शिक्षा का उजाला हमारे जीवन में आ गया होता तो शायद हमें कभी हथकड़ियां नहीं पहननी पड़ती। खैर देर से ही सही अब हमें साक्षर बनाने की जिम्मेदारी जिस प्रकार उठाई गई है, उसी प्रकार हमें पूरी तरह शिक्षित किया जाए ताकि जेल के बाद का जीवन हम पूरी ईमानदारी और अपने दम पर जिए। यह कहना था सेंट्रल जेल में के बंदियों का। केंद्र शासन के शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान प्रदान करने का कार्य किया जा रहा है।

नवसाक्षरों की परीक्षा का आयोजन शनिवार को सुबह 10 बजे से सायं 5 बजे तक किया गया। जिले में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 43 हजार से अधिक परीक्षार्थी शामिल हुए। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर नवसाक्षर परीक्षार्थियों का तिलक लगाकर, माला पहनाकर एवं पुष्पवर्षा कर हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया गया। विद्यार्थियों द्वारा स्वागत गीत एवं वंदन प्रस्तुत किए गए। जेल की चाहरदीवारी के भीतर भी शिक्षा की अलख जगाई जा रही है।

जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर के मार्गदर्शन में जेल में उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। परीक्षा के आयोजन में जेल प्रशासन, जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी श्रीमती अंजनी सेलट एवं विकासखंड सह-समन्वयक जगत पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

परीक्षा में 180 पुरुष एवं 20 महिला बंदियों सहित कुल 200 बंदी परीक्षार्थी शामिल हुए। यह पहल शिक्षा के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जुड़ने तथा जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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