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Jabalpur News: पांच निजी अस्पतालों समेत 121 निजी क्लीनिकाें का पंजीयन किया निरस्त

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। जिला स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 निजी अस्पतालों और 121 निजी क्लीनिकों का पंजीयन निरस्त कर दिया है। दरअसल संचालन के लिए आवश्यक पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए 1 जनवरी से 28 फरवरी तक का समय दिया गया था, लेकिन इस अवधि में उपरोक्त अस्पतालों एवं क्लीनिकों द्वारा आवेदन नहीं किया गया, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। आदेश के अनुसार कुछ संस्थानों ने स्वयं अस्पताल बंद करने का आवेदन दिया था, जबकि कुछ के पास पर्याप्त स्टाफ नहीं मिला या उनके दस्तावेज नगर निगम से सत्यापित नहीं पाए गए। जिन स्वास्थ्य संस्थाओं पर कार्रवाई की गई है, 1 अप्रैल के बाद से उनका संचालन अवैध माना जाएगा।
नवीनीकरण में विफल रहे संस्थान
विभागीय जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए जिले में 55 अस्पतालों और 240 क्लीनिकों का पंजीयन नवीनीकरण प्रस्तावित था। मध्य प्रदेश उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं अधिनियम के तहत संस्थानों को हर 3 साल में नवीनीकरण कराना अनिवार्य है। निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन न करने और मापदंडों को पूरा न करने के कारण इन संस्थानों पर यह गाज गिरी है।
इन अस्पतालों का पंजीयन निरस्त
जिन 5 अस्पतालों का पंजीयन निरस्त हुआ है, उनमें एससी गुप्ता मेमोरियल हॉस्पिटल की जांच में पर्याप्त स्टाफ न होने और संकल्प हॉस्पिटल में नगर निगम से सत्यापित दस्तावेज न होने के चलते कार्रवाई की गई। वहीं नामदेव नर्सिंग होम्स द्वारा नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया गया। जबकि बटालिया आई हॉस्पिटल और सरकार हॉस्पिटल द्वारा स्वयं अस्पताल बंद करने का आवेदन किया गया।
क्लीनिकों की लंबी सूची
क्लीनिकों की स्थिति और भी गंभीर है। कुल 240 में से 89 क्लीनिकों ने नवीनीकरण के लिए आवेदन ही नहीं किया, जबकि 32 संस्थानों के दस्तावेज अपूर्ण पाए गए। निरस्त किए गए क्लीनिकों की सूची में एलोपैथी से लेकर आयुर्वेदिक, होम्योपैथी विधा के क्लीनिकों समेत कई पैथोलॉजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटर शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी निर्देश
{ तत्काल प्रभाव से किसी भी नए मरीज को भर्ती न किया जाए।
{ वर्तमान में भर्ती मरीजों का उपचार पूर्ण कर उन्हें जल्द डिस्चार्ज करें।
{ संस्थान के बाहर लगे नाम-पट्ट (बोर्ड) को तत्काल हटाया जाए।
बिना पंजीयन संचालन पर होगी कार्रवाई
नोडल अधिकारी डॉ. आदर्श विश्नोई ने बताया कि यदि कोई भी संस्थान बिना वैध पंजीयन के संचालित होता पाया गया, तो उसके विरुद्ध मध्य प्रदेश नर्सिंग होम एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी, जो अस्पताल और क्लीनिक संचालक समय सीमा चूक गए हैं, वे एमपी ऑनलाइन के माध्यम से पुनः नए आवेदन कर सकते हैं। केवल निरीक्षण में सभी मापदंड सही पाए जाने पर ही उन्हें दोबारा संचालन की अनुमति मिलेगी। पंजीयन को हर तीन वर्ष में नवीनीकरण कराना अनिवार्य है।
Created On :   11 April 2026 4:22 PM IST












