Latur News: 15 अगस्त को जिस वीर ने स्कूल में फहराया था तिरंगा, उसी तिरंगे में लिपटकर लौटा वीर पुत्र

  • ‘समाधान मधाले अमर रहें’ के नारों से गूंजा गांव
  • 5 साल की बेटी के सिर से उठा पिता का साया, पति के पार्थिव से लिपटकर रोई पत्नी
  • मां की चीखें सुन हर आंख हुई नम, शासकीय सम्मान के साथ वीर जवान को अंतिम विदाई

Latur News संजय बुच्चे . एक तरफ तिरंगे में लिपटा वीरपुत्र का पार्थिव, दूसरी तरफ बिलखती मां, पति को खोने के गम में बेसुध होती पत्नी और पिता को पुकारती पांच साल की मासूम बेटी यह दृश्य बुधवार को कासार बालकुंदा गांव में हर किसी का कलेजा चीर गया। जिस जवान ने देश की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया, उसी की अंतिम विदाई पर पूरा गांव आंसुओं में डूब गया। ‘समाधान मधाले अमर रहें’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से आसमान गूंज उठा। तिरंगे में लिपटे अपने वीरपुत्र को अंतिम विदाई देते समय ग्रामीणों की आंखें नम थीं। शहीद जवान समाधान महिपती मधाले का शासकीय इतमाम के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

निलंगा तहसील के कासार बालकुंदा निवासी समाधान मधाले जम्मू में भारतीय सेना की 7 महार रेजिमेंट में तैनात थे। 19 अक्टूबर की रात करीब 8 बजे कर्तव्य निभाते हुए उनका निधन हो गया। 17 दिसंबर 2014 को सेना में भर्ती हुए समाधान ने करीब 12 साल देशसेवा में बिताए। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

पार्थिव पहुंचते ही घर में मचा कोहराम

जम्मू-कश्मीर से विमान के जरिए पार्थिव हैदराबाद लाया गया। इसके बाद बसवकल्याण, ममदापुर, देवीहाल्ली और मिरगाली होते हुए अंतिम यात्रा कासार बालकुंदा पहुंची। सुबह करीब 9:30 बजे ग्राम पंचायत कार्यालय के सामने पार्थिव के पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह करीब 10 बजे जब पार्थिव घर पहुंचा, तो परिवार का दर्द आंसुओं के सैलाब में बदल गया। मां की चीखें और पत्नी का विलाप सुनकर मौजूद लोग खुद को संभाल नहीं पाए। पत्नी तिरंगे में लिपटे पति के पार्थिव से लिपटकर रोने लगी। मां की आंखों के सामने जवान बेटे का बेजान शरीर था, तो पांच साल की मासूम बेटी के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका था। जिस उम्र में बच्चे पिता की गोद में सुरक्षित भविष्य के सपने देखते है, उस उम्र में इस बच्ची को पिता के बिना जिंदगी बितानी होगी।

15 अगस्त को फहराया था तिरंगा, अब उसी में लिपटकर आए

समाधान मधाले की गांव से जुड़ी आखिरी याद अब लोगों को हमेशा भावुक करती रहेगी। 15 अगस्त को वे अपने गांव आए थे और स्कूल में उनके हाथों से ध्वजारोहण किया गया था। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से संवाद भी किया था। तब किसी ने नहीं सोचा था कि देश का तिरंगा फहराने वाला यह जवान कुछ ही समय बाद उसी तिरंगे में लिपटकर गांव लौटेगा। बुधवार सुबह करीब 11 बजे गांव की श्मशानभूमि में शासकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पार्थिव पर लिपटा तिरंगा पत्नी और मां को सौंपा गया। तिरंगा हाथों में लेते ही दोनों का विलाप फिर से फूट पड़ा। विधायक अभिमन्यु पवार, सैनिक कल्याण विभाग के अधिकारी, क्षेत्र के सैनिक, उपजिलाधिकारी शरद झाडके, अपर तहसीलदार शिवाजी कदम और पुलिस उपाधीक्षक विशाल घुमे सहित अनेक लोगों ने वीर जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की।समाधान मधाले चले गए, लेकिन गांव की मिट्टी, स्कूल में फहराया गया तिरंगा और पांच साल की बेटी की यादों में उनका नाम हमेशा जिंदा रहेगा। देश की रक्षा में समर्पित उनके जीवन को गांव ने नम आंखों से सलाम किया।


Created On :   21 Oct 2026 4:49 PM IST

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