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Latur News: बूंद-बूंद पानी की सताने लगी चिंता , लातूर जिला जल संकट क्षेत्र घोषित

Latur News कम बारिश के कारण लातूर जिले में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। भूजल स्तर में करीब 4.58 मीटर की गिरावट दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में सार्वजनिक पेयजल की किल्लत बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने पूरे जिले को ‘जल संकट क्षेत्र’ घोषित कर दिया है। जिले के सभी 10 तहसीलों में अगले एक साल तक या अगले आदेश तक महाराष्ट्र भूजल विकास एवं प्रबंधन अधिनियम, 2009 के तहत प्रतिबंधात्मक नियम लागू रहेंगे। जिलाधिकारी डॉ. भारत बास्टेवाड ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।
प्रशासन ने भूजल के अनियंत्रित दोहन पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। अब जिले में खेती या औद्योगिक उपयोग के लिए 60 मीटर से अधिक गहरा कुआं या बोरवेल खोदने की अनुमति नहीं होगी। सार्वजनिक पेयजल स्रोतों के 500 मीटर के दायरे में किसी भी उद्देश्य से नया बोरवेल खोदने पर भी प्रतिबंध रहेगा। नियमों का उल्लंघन कर खोदे गए बोरवेल को तत्काल जब्त या बंद किया जा सकेगा।
सार्वजनिक जलस्रोतों के आसपास पानी निकालने पर भी रोक : सार्वजनिक पेयजल के लिए इस्तेमाल होने वाले कुएं या बोरवेल से एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले निजी कुओं और बोरवेल से व्यावसायिक उपयोग या सिंचाई के लिए अनियंत्रित पानी निकालने पर अस्थायी रोक लगाई गई है। जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इन निजी जलस्रोतों का अधिग्रहण भी किया जा सकेगा। इसके अधिकार उपविभागीय अधिकारियों और तहसीलदारों को दिए गए हैं।
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बिना अनुमति पानी बेचा तो कार्रवाई : जिले में अब बिना पूर्व अनुमति भूजल की व्यावसायिक बिक्री या टैंकरों के जरिए पानी की ढुलाई नहीं की जा सकेगी। सभी बोरवेल रिग मशीन मालिकों को 30 दिनों के भीतर संबंधित उपविभागीय दंडाधिकारी या तहसीलदार के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य है। अनधिकृत बोरवेल खुदाई मिलने पर मशीनरी जब्त की जाएगी।
नियम तोड़ने पर केस, जुर्माना और जेल : आदेश का पालन कराने के लिए उपविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, गट विकास अधिकारी और पुलिस प्रशासन को निरीक्षण करने, अवैध उपकरण जब्त करने तथा बिजली आपूर्ति काटने के अधिकार दिए गए हैं। भूजल कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अधिनियम की धारा 52 के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर जुर्माना और कारावास की कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन का उद्देश्य उपलब्ध भूजल का नियंत्रित उपयोग सुनिश्चित करना और आगामी गर्मी के मौसम में नागरिकों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल जरूरतों को प्राथमिकता देना है।
Created On :   17 Oct 2026 5:47 PM IST














