बॉम्बे हाई कोर्ट: विदेशी नौकरी का झांसा देकर धोखाधड़ी करने वाले मास्टरमाइंड जेरी फिलिप्स जैकब को जमानत देने से इनकार

विदेशी नौकरी का झांसा देकर धोखाधड़ी करने वाले मास्टरमाइंड जेरी फिलिप्स जैकब को जमानत देने से इनकार
  • राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) मामले की कर रही जांच
  • बॉम्बे हाई कोर्ट ने मास्टरमाइंड जेरी फिलिप्स जैकब को जमानत देने से किया इनकार
  • 30 से अधिक बेरोजगार युवक हुए थे शिकार

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने विदेश (थाईलैंड एवं लाओस) में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवकों से धोखाधड़ी के मामले में मास्टरमाइंड जेरी फिलिप्स जैकब को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह मानव तस्करी और संगठित अपराध का मामला है। प्रथम दृष्टिया आरोपी की भूमिका गंभीर दिखाई देती है। ऐसे में रिहा होने पर वह फरार हो सकता है या सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है। न्यायमूर्ति अजय एस. गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम सी. चांडक की पीठ ने जेरी फिलिप्स जैकब की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता बिना वैध लाइसेंस के भर्ती एजेंसी चला रहा था। उसने युवाओं को विदेश में कानूनी नौकरी का झूठा भरोसा दिया और वहां पहुंचने के बाद उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर किया गया। उनके मना करने पर उन्हें धमकी दी गई और उनके पासपोर्ट वापस देने के लिए पैसे मांगे गए। उसने अपने साथी आरोपियों के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची। उन्होंने भारत से बेरोजगार युवाओं को विदेशी कंपनियों में कानूनी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनकी ट्रैफिकिंग की। ट्रैफिकिंग के बाद युवकों को गैर-कानूनी कामों में लगाया जाता था।

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि पीड़ितों को पहले ही नौकरी की जानकारी दी गई थी। वे अपनी इच्छा से विदेश गए थे। आरोपी खुद भी नौकरी के कॉन्ट्रैक्ट पर था। जांच पूरी हो चुकी है, इसलिए जमानत मिलनी चाहिए। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने फर्जी नौकरी के बहाने युवाओं की तस्करी की। विदेश में उन्हें ऑनलाइन फ्रॉड करने के लिए मजबूर किया गया। पासपोर्ट छीनकर उन्हें बंधक जैसी स्थिति में रखा गया। यह मामला गंभीर अपराध और आपराधिक साजिश का है। पीठ ने कहा कि आईपीसी की धारा 371 के तहत कथित अपराध के लिए उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। अपराध गंभीर है। जमानत पर रिहा होने के बाद याचिकाकर्ता के फरार होने और सरकारी सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की संभावना है। ऐसे में हम जमानत नहीं दे सकते हैं।

क्या है पूरा मामला

पीड़ित की शिकायत पर याचिकाकर्ता जेरी फिलिप्स जैकब के खिलाफ मुंबई के विलेपार्ले पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एनआईए को सौंप दिया गया। 25 मार्च 2024 जैकब को गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर 30 से अधिक भारतीय युवाओं को विदेश में नौकरी का झांसा देकर भेजा। उन्हें थाईलैंड और लाओस में ले जाकर सोशल मीडिया के नकली अकाउंट बनवाए और लोगों को क्रिप्टोकरेंसी निवेश के नाम पर ठगने का काम कराया।

Created On :   12 March 2026 7:46 PM IST

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