फडणवीस सरकार का दावा: सरकारी खर्च में 20 फीसदी की कटौती के बावजूद लाडली बहनों की किस्तें नहीं रुकेंगी, राऊत बोले - मंत्रियों की जेब खंगाली तो मिल जाएंगे एक लाख करोड़

सरकारी खर्च में 20 फीसदी की कटौती के बावजूद लाडली बहनों की किस्तें नहीं रुकेंगी, राऊत बोले - मंत्रियों की जेब खंगाली तो मिल जाएंगे एक लाख करोड़
  • सरकार का दावा है कि तय समय पर मिलती रहेगी राशि
  • सभी विभागों को खर्च नियंत्रित करने के निर्देश
  • विपक्ष ने सरकार पर जमकर निशाना साधा है

डिजिटल डेस्क, मुंबई. महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से सभी विभागों के खर्च में 20 प्रतिशत तक कटौती करने के निर्देश दिए जाने के बाद लाडली बहन योजना को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। हालांकि राज्य सरकार ने साफ किया है कि इस खर्च कटौती का असर लाडली बहन योजना पर नहीं पड़ेगा और पात्र महिलाओं को निर्धारित समय के अनुसार किस्तें मिलती रहेंगी। कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने आश्वासन दिया है कि लाड़ली बहनों के लिए फंड की कोई कमी नहीं होगी। दूसरी ओर शिवसेना (उद्धव) सांसद संजय राऊत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि मंत्रियों की जेब खंगाली जाए तो एक लाख करोड़ रुपए ऐसे ही मिल जाएंगे।

सभी विभागों को खर्च नियंत्रित करने के निर्देश

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकारी विभागों को खर्च पर नियंत्रण रखने और गैर-जरूरी व्यय में कटौती करने के निर्देश दिए हैं। इस कदम का उद्देश्य सरकारी खर्च को अधिक अनुशासित बनाना और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का उपयोग प्राथमिकता वाले कामों के लिए करना है। विभागों के खर्च में 20 प्रतिशत कटौती का निर्देश सामने आने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इसका असर सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं पर भी पड़ेगा। खासकर लाडली बहन योजना को लेकर चर्चा जारी है। इसी बीच सरकार की ओर से साफ हो गया है कि खर्च नियंत्रण के फैसले के बावजूद लाडली बहन योजना की राशि निर्धारित समय के अनुसार लाभार्थियों तक पहुंचती रहेगी।

मंत्रियों की जेब खंगाली तो मिल जाएंगे एक लाख करोड़- राऊत

इस मुद्दे पर संजय राऊत ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अगर सरकार के मंत्रियों की जेब खंगाली जाए तो एक लाख करोड़ रुपए ऐसे ही मिल सकते हैं। उनका यह बयान सरकारी खर्च और सत्ता में बैठे लोगों की जवाबदेही पर विपक्ष के हमले के रूप में देखा जा रहा है। राऊत की टिप्पणी का राजनीतिक संदेश यह है कि सरकार को खर्च में कटौती का बोझ केवल विभागीय कामकाज या आम लोगों के हितों पर डालने के बजाय अपने मंत्रियों और प्रशासनिक व्यवस्था के खर्चों पर भी ध्यान देना चाहिए। हालांकि एक लाख करोड़ रुपए से संबंधित उनकी टिप्पणी को राजनीतिक आरोप या व्यंग्य के रूप में ही देखा जा रहा है।

Created On :   18 Oct 2026 9:42 PM IST

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