प्रभावी कदम: 50 पशुपालकों को बांटे 3 हजार बारहमासी चारे के पौधे, अल नीनो के संभावित असर से चारे की कमी से निपटने की तैयारी

50 पशुपालकों को बांटे 3 हजार बारहमासी चारे के पौधे, अल नीनो के संभावित असर से चारे की कमी से निपटने की तैयारी
  • जलालखेड़ा के चारा उद्यान में तैयार किए गए पौधे किए वितरित
  • पशुपालकों से बारहमासी चारा खेती अपनाकर दूध उत्पादन बढ़ाने की अपील

Nagpur News. पशुओं को सालभर पर्याप्त हरा और सूखा चारा मिलने से उनकी सेहत बेहतर रहती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इससे गाय-भैंस स्वस्थ रहने के साथ समय पर परिपक्व होती हैं और दूध उत्पादन भी बढ़ता है। इसी उद्देश्य से पशुपालकों को बारहमासी चारा खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में जलालखेड़ा स्थित पशु चिकित्सालय में तैयार किए गए 3 हजार बारहमासी चारे के पौधे 50 पशुपालकों को वितरित किए गए।

अल नीनो के संभावित असर से चारे की कमी की आशंका को देखते हुए पशुसंवर्धन एवं दुग्ध व्यवसाय विभाग के उपायुक्त डॉ. नितिन फुके ने पर्याप्त जगह और बारहमासी पानी उपलब्ध वाले पशु चिकित्सालयों में चारा उद्यान विकसित करने के निर्देश दिए थे। इसके तहत जिले के विभिन्न पशु चिकित्सालयों में चारा उद्यान तैयार किए गए हैं।

इसी पहल के तहत नरखेड़ तहसील के जलालखेड़ा स्थित पशु चिकित्सालय में अनिल इंगोले ने गर्मियों में चारा उद्यान तैयार किया। यहां उत्पादित बारहमासी चारा किस्म बीएचएन-10, बीएचएन-6 और ऑस्ट्रेलियन रेड नेपियर के कुल 3 हजार पौधे 50 पशुपालकों को वितरित किए गए।

कार्यक्रम सहायक आयुक्त पशुपालन एवं डेयरी, नरखेड़ डॉ. मुकुंद जोगेकर की अध्यक्षता में तथा स्व. वसंतराव नाईक स्वावलंबन मिशन के अध्यक्ष एड. नीलेश हेलोंडे की उपस्थिति में आयोजित किया गया। पशु चिकित्सक डॉ. स्वप्निल रेवतकर, डॉ. राजेश भंदीरगे और डॉ. सुचिता उके ने पशुपालकों को उपलब्ध कराए गए कांटेदार कैक्टस के पशु आहार में महत्व की जानकारी दी।

एड. नीलेश हेलोंडे ने तहसील के पशुपालकों से बारहमासी चारा खेती अपनाने और दूध उत्पादन बढ़ाने की अपील की। उन्होंने पशुपालकों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिलाया। कार्यक्रम में जलालखेड़ा के सरपंच मयूर सोनवणे, कुलदीप हिवरकर, प्रवीण लोहे सहित बड़ी संख्या में पशुपालक उपस्थित थे। डॉ. सुचिता उके ने आभार माना।

Created On :   7 Sept 2026 7:44 PM IST

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