Nagpur News: एमएनएलयू का चौथा दीक्षांत समारोह, न्यायमूर्ति चांदूरकर ने कहा - कानून सिर्फ धाराओं का ज्ञान नहीं, समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाए

एमएनएलयू का चौथा दीक्षांत समारोह, न्यायमूर्ति चांदूरकर ने कहा - कानून सिर्फ धाराओं का ज्ञान नहीं, समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाए
  • यह समाज और लोगों के जीवन से जुड़ा हुआ दायित्व : न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन
  • समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाए : न्यायमूर्ति चांदूरकर

Nagpur News. कानून के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन ने कहा कि कानून केवल धाराओं का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह समाज और लोगों के जीवन से जुड़ा हुआ दायित्व है, जहां निर्णयों के वास्तविक और दीर्घकालिक परिणाम होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को -"स्वधर्म' की अवधारणा अपनाने की सलाह दी, अर्थात अपने स्वभाव और आंतरिक रुचि के अनुरूप क्षेत्र का चयन करें।

कार्यक्रम में ये थे उपस्थित

महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एमएनएलयू), नागपुर का चौथा दीक्षांत समारोह शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर, वारंगा (वर्धा रोड) में आयोजित किया गया था। इस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर रहे थे।

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति तथा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अतुल चांदूरकर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई, सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति विकास सिरपुरकर, बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति भारती डांगरे, नागपुर खंडपीठ के प्रशासकीय न्यायमूर्ति अनिल किलोर, न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फालके, राज्य के महाधिवक्ता मिलिंद साठे, कुलगुरु प्रो. डॉ. विजेंदर कुमार और कुलसचिव दीपक भागवत प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रो. डॉ. विजेंदर कुमार ने की। कार्यक्रम में उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति, जिला न्यायालय के न्यायाधीश, वरिष्ठ विधिज्ञ, वकील और अभिभावकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।

समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाए : न्यायमूर्ति चांदूरकर

न्यायमूर्ति अतुल चांदूरकर ने अपने मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कानून केवल करियर नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों समानता और बंधुत्व की रक्षा का माध्यम है। तकनीक और एआई का विवेकपूर्ण उपयोग करें, पर मूल कौशल-पठन, तर्क और ड्राफ्टिंग को कमजोर न होने दें।

हरेंद्र सिंह, मीनल माहेश्वरी को सर्वाधिक स्वर्ण पदक : दीक्षांत समारोह में कुल 213 विद्यार्थियों को मान्यवरों के हाथों डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 18 पीएचडी, 57 स्नातकोत्तर विधि (एलएल.एम.), 101 बी.ए.-एलएल.बी. (ऑनर्स) तथा 37 बी.ए.-एलएल.बी. (न्यायिक अध्ययन विशेष) के विद्यार्थी शामिल थे। शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए कुल 25 स्वर्ण पदक भी प्रदान किए गए। बी.ए.-एलएल.बी. (ऑनर्स) में हरेंद्र सिंह को सर्वाधिक 8 स्वर्ण पदक तथा मीनल माहेश्वरी को 6 स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। इसके अलावा अपरिमिता तिवारी को 3, स्वास्तिक सक्सेना को 2 तथा सृष्टि वर्मा और प्रांजल कुमार को एक-एक स्वर्ण पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं, बी.ए.-एलएल.बी. (न्यायिक अध्ययन विशेष) में खुशी रावत को 2 स्वर्ण पदक, जबकि आदित्य बाजपेयी और भाव्या पोखरियल को एक-एक स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

न्यायमूर्तियों को अपनी ही पुत्रियों को सम्मानित करने का अवसर मिला : देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई की पुत्री प्रो. करिश्मा गवई तथा बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पुत्री एड. आयुषी डांगरे को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। यह क्षण पिता-पुत्री और माता-पुत्री दोनों के लिए अत्यंत अविस्मरणीय रहा।

Created On :   1 March 2026 9:54 PM IST

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