सावधान: जानलेवा है सर्वाइकल कैंसर, बेटियों का ह्यूमन पैपिलोमावायरस टीके लगवाने का आह्वान

जानलेवा है सर्वाइकल कैंसर, बेटियों का ह्यूमन पैपिलोमावायरस टीके लगवाने का आह्वान
  • नागपुर में सालाना 4600 से अधिक नये मरीज
  • 60-70% दूसरे, तीसरे, चौथे चरण में पहुंचते हैं

Nagpur News. सरकार ने सर्वाइकल कैंसर को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। शनिवार से देशव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान का शुभारंभ राजस्थान के अजमेर से हुआ है। महिलाओं में सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर को समाप्त करने की दिशा में यह निर्णायक कदम है। यह कैंसर भारतीय महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है।

मृत्यु दर 9 प्रतिशत से अधिक

देश में सर्वाइकल कैंसर के लगभग 82 प्रतिशत मामले ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) संक्रमण के कारण होते हैं। नागपुर के राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज कैंसर अस्पताल, मेडिकल के कैंसर रोग विभाग, शासकीय दंत चिकित्सालय व एम्स समेत अन्य निजी अस्पतालों में मिलाकर सालाना 20 हजार मरीज आते हैं। इनमें से अनुमानित 23 फीसदी मरीज यानी 4600 से अधिक मरीज सवार्इकल कैंसर से पीड़ित होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, लगभग 60-70 प्रतिशत मरीज दूसरे, तीसरे या चौथे चरण में उपचार के लिए पहुंचती हैं, जिससे करना जटिल और महंगा हो जाता है। इसमें मृत्यु दर 9 प्रतिशत से अधिक हैं।

  • लगातार बढ़ रही संख्या : शहर में उपचार के लिए 20 हजार मरीज साल भर में आते हैं
  • सावधान करते आंकड़े : इनमें अनुमानित 23 फीसदी सर्कवाइकल कैंसर पीड़ित होते हैं
  • मगर, यह विडंबना : 60-70% मरीज दूसरे, तीसरे या चौथे चरण में पहुंचती हैं

80 फीसदी मामले में टीकाकरण प्रभावी

80 प्रतिशत मामले में सर्वाइकल कैंसर एचपीवी के प्रकार 16 और 18 से संबंधित होते हैं, जिन्हें टीकाकरण से रोका जा सकता है। एचपीवी टीके सुरक्षित, प्रभावी और दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करने वाले साबित हो चुके हैं। विश्व के लगभग 160 देशों ने पहले ही एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम शुरू कर दिया है। यह टीका 9 से 14 वर्ष की आयु के बीच, वायरस के संपर्क में आने से पहले लगवाना प्रभावी माना जाता है। सूत्रों के अनुसार नागपुर के सभी प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीकाकरण किया जाएगा। बेटियों का टीकाकरण करवाकर उनका भविष्य सुरक्षित करने का आह्वान किया गया है।

धीरे-धीरे विकसित होता है

राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज कैंसर अस्पताल व अनुसंधान केंद्र के सलाहकार डॉ. बी. के. शर्मा ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर जांच में देरी के कारण यह जानलेवा साबित हो रहा है। इसे समय पर जांच और टीकाकरण से रोका जा सकता है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण कई महिलाएं देर से अस्पताल पहुंचती हैं। अधिकांश मामलों में इसका मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) संक्रमण होता है। लक्षणों में पीरियड्स के बीच रक्तस्राव, संबंध के बाद ब्लीडिंग, मेनोपॉज के बाद रक्तस्राव, दुर्गंधयुक्त सफेद पानी, पेल्विक या कमर में लगातार दर्द शामिल हैं। सर्वाइकल कैंसर कोई अचानक होने वाली बीमारी नहीं है। यह धीरे-धीरे विकसित होता है और वर्षों पहले संकेत देता है। शुरुआत में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते, इसलिए स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है।

Created On :   1 March 2026 10:06 PM IST

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