नागपुर स्नातक सीट: बसपा नहीं लड़ेगी चुनाव, निर्दलीय उतरने की तैयारी में संजय थूल - अचानक रद्द हुई नामांकन रैली

बसपा नहीं लड़ेगी चुनाव, निर्दलीय उतरने की तैयारी में संजय थूल - अचानक रद्द हुई नामांकन रैली
  • संविधान चौक पर जुटे कार्यकर्ता, अचानक रद्द हुई नामांकन रैली
  • बसपा उम्मीदवार के रूप में कर रहे थे प्रचार, मंगलवार को नामांकन भरने की तैयारी
  • 2014 में बसपा को मिले थे 18,526 वोट, 2020 में भी उम्मीदवारी पर हुआ था विवाद

डिजिटल डेस्क, नागपुर। विधान परिषद की नागपुर स्नातक सीट के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने उम्मीदवार नहीं उतारने का निर्णय लिया है। पार्टी के इस फैसले से राजनीतिक घटनाक्रम अचानक बदल गया है। बसपा के संभावित उम्मीदवार के रूप में प्रचार कर रहे भारतीय राजस्व सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी संजय थूल की सोमवार को प्रस्तावित नामांकन रैली ऐन वक्त पर रद्द कर दी गई। अब थूल मंगलवार को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं।

संजय थूल को काफी समय से बसपा के उम्मीदवार के रूप में प्रचारित किया जा रहा था। उन्होंने चुनाव प्रचार शुरू करने के साथ ही मतदाता पंजीयन फॉर्म भरवाने के लिए अभियान भी चलाया था। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील डोंगरे सहित अन्य पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं की बैठक में थूल को पार्टी का उम्मीदवार बनाए जाने की जानकारी दी थी। रविवार को भी बसपा कार्यकर्ताओं की ओर से सूचना जारी कर सोमवार को थूल के नामांकन दाखिल करने की बात कही गई थी।

सोमवार को नामांकन रैली के लिए संविधान चौक पर कार्यकर्ता एकत्र हुए थे। हालांकि, दोपहर में अचानक संदेश जारी कर तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए नामांकन कार्यक्रम रद्द करने की जानकारी दी गई। इसके बाद चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई। दूसरी ओर, संजय थूल ने मंगलवार को नामांकन दाखिल करने की बात कही है। ऐसे में अब उनके निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरने की संभावना है।

2014 में बसपा ने दिखाया था दम

नागपुर स्नातक सीट के चुनाव में बसपा पहले भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है। वर्ष 2014 के चुनाव में पार्टी ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी किशोर गजभिये को उम्मीदवार बनाया था। उन्हें 18,526 वोट मिले थे। इस चुनाव में भाजपा के अनिल सोले ने कांग्रेस के बबनराव तायवाडे को 20 हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया था। उस चुनाव में बसपा के प्रदर्शन ने पार्टी की राजनीतिक उपस्थिति को रेखांकित किया था।

2020 में भी उम्मीदवारी को लेकर हुआ था विवाद

वर्ष 2020 के विधान परिषद चुनाव में भी बसपा की उम्मीदवारी को लेकर नाटकीय घटनाक्रम सामने आया था। प्रशांत डेकाटे ने पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव की तैयारी की थी, लेकिन नामांकन के समय डेकाटे के बजाय तीन लोगों को एबी फॉर्म दिए जाने की बात सामने आई। इसे लेकर बसपा के तत्कालीन प्रदेश प्रभारी वीरसिंह और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष संदीप ताजने के बीच विवाद हुआ था। अंततः उस चुनाव में बसपा मतदान से पहले ही मैदान से बाहर हो गई थी।

चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय

प्रदेश अध्यक्ष बसपा महाराष्ट्र सुनील डोंगरे ने कहा कि बसपा के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील डोंगरे ने कहा कि पार्टी ने विधान परिषद का चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया है। पार्टी के फैसले का सभी को पालन करना होगा। कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक कार्यों पर अधिक ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में सभी पदाधिकारियों को भी सूचित कर दिया गया है।


Created On :   5 Oct 2026 7:48 PM IST

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