इंद्रधनुष ओपन माइक: जीवन में संगीत हो तो हर पल मन-मस्तिष्क रहता है स्वस्थ, कलाकारों ने बिखेरे कई रंग

जीवन में संगीत हो तो हर पल मन-मस्तिष्क रहता है स्वस्थ, कलाकारों ने बिखेरे कई रंग
  • इंद्रधनुष ओपन माइक में कलाकारों ने बिखेरे विविध रंग
  • हर पल मन-मस्तिष्क रहता है स्वस्थ
  • गीतों की शानदार प्रस्तुतियों ने मोहा मन

Nagpur News. जीवन में संगीत हो तो हर पल मन-मस्तिष्क प्रसन्न व स्वस्थ रहता है। इसलिए व्यक्ति ने जीवन में संगीत का नाता जोड़कर रखना चाहिए। प्रकृति की हर हलचल में संगीत है। आती-जाती सांस, हवाओं की सरसराहट, मेघ का गरजना, पानी का बरसना, पायलों की छनछन औैर दिन निकलने से लेकर रात होने तक आनेवाली हर आवाज संगीत है। संगीत में तन-मन को स्वस्थ रखने की ताकत हैं। गायन, वादन व नृत्य ये तीनों विधाएं जिनके जीवन में होती है, उनका स्वभाव व व्यवहार मधुर होता है। उनका व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है। ऐसा ‘इंद्रधनुष’ ओपन माइक कार्यक्रम में उपस्थित कलाकारों ने कहा। रविवार को गांधीबाग उद्यान में अरुणोदय परिवार द्वारा आयोजित मासिक कार्यक्रम हुआ। शिवशंकर खोत द्वारा प्रस्तुत गणेशवंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में सी. वेंकट मधु ने फिल्मी कलाकारों की आवाज में विविध विषयों पर मिमिक्री की। जिसे सुनकर श्रोतागण लोटपोट हुए।

गीतों की शानदार प्रस्तुतियों ने मोहा मन

कार्यक्रम में अतिथि के रुप में आशीष नंदनवार, अशोक धापोडकर, रमेश वाघ, उद्धव दलाल, लक्ष्मी गोखले, संजय वानखेडे आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने फिल्मी गीतों की प्रस्तुति देकर मंत्रमुग्ध किया।

कार्यक्रम के दौरान - आज उनसे पहली मुलाकात होगी,

कहीं दूर जब दिन ढल जाए,

सजना है मुझे सजना के लिए,

माना हो तुम बेहद हसीं,

मुझको देखोंगे जहां तक,

मैं जट यमला, पगला दिवाना,

आज मौसम बड़ा बेइमान है,

जिंदगी का सफर, है ये कैसा सफर,

कोई हसीना जब रुठ जाती है,

छू लेने दो नाजुक होठों को,

तुम भी चलो, हम भी चले,

अखियन संग अखियां लागे आज,

पल-पल दिल के पास तुम…

आदि गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दी। कलाकारों में डॉ. पुष्पलता नंदनवार, जयश्री वंजारी, अर्चना मेश्राम, राजेश धकाते, बबन सोनकुसरे, राजू बोकडे, विजय शेणमारे, संजय चरडे, सारनाथ वंजारी, पियूष शिंदे, सत्यजीत नायक, वासुदेव मौंदेकर, सतीश कुंभारे, इंद्रपाल खापेकर, श्रीकांत मेश्राम, प्रभाकर कामठीकर, राजू बरसे आदि शामिल थे। कार्यक्रम के लिए तकनीकी सह्योग जगदीश वाठ ने और संचालन अरविंद कोसारकर ने किया। कार्यक्रम की सफलता के लिए संगीत सरिता व स्वर अलंकार परिवार के सभी सदस्यों ने सह्योग किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रोतागण उपस्थित थे।

Created On :   30 Nov 2025 9:03 PM IST

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