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Nagpur News: सर्वर ठप - बिना दवा के लौट रहे कैंसर के मरीज, 8 दिन से महात्मा फुले योजना की प्रक्रिया अधूरी

- अंतर्गत आम जनों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई
- 8 दिन से महात्मा फुले योजना की प्रक्रिया अधूरी
Nagpur News. सरकार ने स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत आम जनों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई है, लेकिन योजना का लाभ पाने ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। मेडिकल के कैंसर रोग विभाग में महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना का स्वतंत्र कक्ष स्थापित किया गया है। पिछले 8 दिनों से यहां का सर्वर ठप है। मरीजों के दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से कैंसर के उपचार के लिए जरूरी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। यहां नियमित उपचार के लिए दवा प्राप्त करने वाले हर रोज औसत 50 मरीज आते हैं। इनमें से 90 फीसदी मरीज नागपुर के बाहर के होते हैं। 8 दिन में 400 मरीजों को बिना दवा के लौटाया जा चुका है।
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केस 1 - 42 साल के राजेश को छाती का कैंसर है। वह पिछले कुछ महीने से उपचार करवा रहे हैं। कैपेसिटाबीन नामक दवा के बिना उनका उपचार नियमित नहीं हो सकता। पिछले आठ दिनों में दो बार दवा के लिए आ चुके हैं। दवा महंगी होने से वह बाहर से खरीदने की क्षमता नहीं है। दवा नहीं मिलने से बीमारी बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।
केस 2 - 58 साल की शांताबाई को ब्रेस्ट कैंसर है। उन्हें लेट्रोजोल और टैमोसीफेन की नियमित खुराक लेनी पड़ती है। सर्वर बंद होने के कारण उन्हें दवाएं नहीं मिलीं। वह काटोल से नागपुर आना-जाना करती हैं। गांव से आने-जाने में 200 रुपए लग जाते हैं। न दवा मिल रही है न जवाब मिल रहा है। बीमारी बढ़ने का डर पैदा हो चुका है।
हमेशा की बीमारी है सर्वर ठप होना
मेडिकल में स्वास्थ्य योजना का सर्वर ठप होना, हमेशा की बीमारी बन चुकी है। सूत्रों नेे बताया कि सर्वर डाउन की स्थिति में ईटीआई (इमर्जेंसी टेलीफोनिक इंटिमेशन) अंतर्गत मेल भेजने की सुविधा है। मेल भेजने पर याेजना के लाभार्थियों को मंजूरी मिल जाती है, लेकिन मेडिकल के कैंसर रोग विभाग में ईटीआई प्रक्रिया नहीं की जा रही है। बताया गया कि एमजेपीजेएवाई योजना के पोर्टल अपडेशन का काम शुरू है, इसलिए सर्वर डाउन की समस्या आ रही है।
दवाएं उपलब्ध हैं - विभाग के सूत्रों ने बताया कि कैंसर पीड़ितों को योजना अंतर्गत टैमोसीफेन, लेट्रोजोल, एनास्ट्रोज़ोल, इमेटिनिब, कैपेसिटाबीन, पैक्लिटैक्सेल व डोसेटैक्सेल, सिस्प्लाटिन, कार्बोप्लाटिन आदि दवाएं दी जाती हैं। यह सारी दवाओं का स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन जब तक प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, तब तक दवाएं नहीं दी जा सकतीं। मरीज सुबह से कतार में लगते हैं, लेकिन अंत में उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है।
निर्धारित शेड्यूल में बाधा - कई दवाओं की कीमत 2000 से 15000 रुपए है, जिन्हें सामान्य व गरीब मरीज बाहर से नहीं खरीद सकते। दवा नहीं मिलने से निर्धारित शेड्यूल में बाधा उत्पन्न हो रही है। कर्मचारियों का कहना है कि वे मरीजों को दवा देना चाहते हैं, लेकिन पोर्टल के बिना प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती। कैंसर विभाग के एक डॉक्टर के अनुसार दवाओं में लगातार गैप से बीमारी दोबारा तेजी से सक्रिय हो सकती है। ब्लड कैंसर और स्तन कैंसर वाले मरीजों में जोखिम कई गुना बढ़ जाती है।
Created On :   30 Nov 2025 6:35 PM IST













