Nagpur News: ताड़ोबा के जंगल में रोमांचक बचाव, जख्मी बाघ टी-126 को मिली नई जिंदगी

ताड़ोबा के जंगल में रोमांचक बचाव, जख्मी बाघ टी-126 को मिली नई जिंदगी
  • जख्मी बाघ टी-126 को मिली नई जिंदगी
  • दो बाघों टी-126 और टी-158 के बीच जबर्दस्त टक्कर

Nagpur News ताड़ोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के खडसंगी वन परिक्षेत्र में एक ऐसी घटना घटी, जो किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी। गंभीर रूप से घायल बाघ टी-126 को वन्यजीव रक्षकों ने जान जोखिम में डालकर न केवल जंगल से सुरक्षित निकाला, बल्कि उसे इलाज के लिए चंद्रपुर के ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (टीटीसी) में पहुंचाया।

यह है कहानी _ 12 मई को ताड़ोबा के बफर जोन में निमढेला नियतक्षेत्र के कक्ष क्र. 63 में उमरीखोरा परिक्षेत्र में दो बाघों टी-126 और टी-158 के बीच जबर्दस्त टक्कर हुई थी। इस जंग में टी-158 की मौत हो गई, जबकि टी-126 गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में हलचल मचा दी, क्योंकि एक जख्मी बाघ आसपास के मानव बस्तियों के लिए खतरा बन सकता था।

रोमांच से भरा बचाव अभियान : राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की मानक प्रक्रियाओं और तकनीकी समिति की सिफारिशों के आधार पर, महाराष्ट्र के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) ने 27 अगस्त को टी-126 को पकड़कर टीटीसी में इलाज के लिए भेजने का आदेश दिया। लेकिन यह काम आसान नहीं था। ताड़ोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के वन संरक्षक और क्षेत्र निदेशक प्रभु नाथ शुक्ला और उपनिदेशक (बफर) आनंद रेड्डी के मार्गदर्शन व सहायक वन संरक्षक अनिरुद्ध ढगे की देखरेख में रैपिड रिस्पॉन्स टीम (आरआरटी) ने इस मिशन को अंजाम दिया। घने जंगल, अनिश्चित परिस्थितियां और एक घायल बाघ की आक्रामकता के बीच, टीम ने यह सुनिश्चित किया कि बाघ को कम से कम नुकसान पहुंचे।

जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद : अब टी-126 चंद्रपुर के टीटीसी में है, जहां पशु चिकित्सकों और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम उसकी सेहत पर नजर रख रही है। गहन चिकित्सकीय जांच और इलाज के बाद, उम्मीद है कि यह शक्तिशाली बाघ जल्द ही जंगल में लौटेगा या उसे उचित संरक्षण मिलेगा।

Created On :   29 Aug 2025 1:47 PM IST

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