निलंबन के बाद भी वसूली के आरोप: नयागांव RTO चेकपोस्ट पर फिर मची खुली लूट; रोजाना ₹25 लाख की वसूली से हिला सिस्टम

नयागांव RTO चेकपोस्ट पर फिर मची खुली लूट; रोजाना ₹25 लाख की वसूली से हिला सिस्टम
अधिकारियों पर गाज गिरने के बावजूद नयागांव बैरियर पर बेखौफ जारी है 'हफ्ता वसूली'; पुलिस और प्रशासन मौन, CM के 'जीरो टॉलरेंस' के दावों की निकली हवा!

नीमच/भोपाल। मध्यप्रदेश-राजस्थान सीमा पर स्थित नीमच जिले का नयागांव परिवहन चेकिंग प्वाइंट एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में है। कुछ समय पहले ट्रक चालक के स्टिंग वीडियो में कथित अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद परिवहन विभाग ने चेकपॉइंट प्रभारी परिवहन निरीक्षक जयदीप पुंगलिया को निलंबित किया था और अन्य अधिकारियों को भी अटैच किया गया था। विभाग ने मामले की जांच शुरू करने की बात कही थी।

लेकिन अब शिकायतों के आधार पर सवाल उठ रहा है कि क्या कार्रवाई के बावजूद नयागांव चेकिंग प्वाइंट की व्यवस्था में कथित वसूली पूरी तरह बंद हुई है? ट्रक ऑपरेटरों की ओर से चेकिंग के नाम पर पैसे मांगने, निजी लोगों की मौजूदगी और वाहन चालकों पर दबाव बनाने जैसे आरोप सामने आए हैं।

वायरल स्टिंग के बाद हुआ था बड़ा एक्शन

जुलाई-अगस्त 2026 में नयागांव चेकिंग प्वाइंट से जुड़ा एक स्टिंग वीडियो सामने आया था। रिपोर्टों के मुताबिक वीडियो में ट्रक चालक से ऑनलाइन एंट्री के नाम पर कथित रूप से पैसे लेने का मामला सामने आया। वीडियो वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बाद परिवहन विभाग ने कार्रवाई की।

रिपोर्ट के अनुसार परिवहन निरीक्षक जयदीप पुंगलिया को निलंबित कर ग्वालियर स्थित परिवहन आयुक्त कार्यालय से अटैच किया गया। इसके अलावा तीन अन्य परिवहन निरीक्षकों को भी ग्वालियर अटैच किया गया, जबकि एक होमगार्ड कर्मचारी को उसके मूल विभाग में वापस भेजा गया।

परिवहन आयुक्त की ओर से उस समय कहा गया था कि विभाग अवैध गतिविधियों और वसूली के मामलों को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है।

कार्रवाई के बाद भी शिकायतें क्यों?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर वायरल वीडियो के बाद कार्रवाई हो चुकी थी, तो फिर उसी चेकिंग प्वाइंट को लेकर नई शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं?

ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों का आरोप है कि कई बार वाहन के दस्तावेज पूरे होने के बावजूद ट्रकों को रोककर चेकिंग के नाम पर दबाव बनाया जाता है। आरोप यह भी है कि राशि देने से इनकार करने पर वाहन चालकों से अभद्र व्यवहार किया जाता है।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है, लेकिन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी दिखाई देती है।

निजी लोगों की भूमिका पर भी सवाल

मामले का एक अहम पहलू चेकिंग प्वाइंट पर कथित रूप से मौजूद निजी लोगों को लेकर है। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कुछ ऐसे लोग भी वाहनों को रोकने और चालकों से बातचीत करने में सक्रिय रहते हैं, जिनकी सरकारी या वैधानिक भूमिका स्पष्ट नहीं है।

AIMTC ने भी अपनी शिकायत में चेकिंग प्वाइंट पर ऐसे लोगों की मौजूदगी और उनकी भूमिका की जांच की मांग की थी। संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि वहां लगाए गए तंबू, गुमटी और बैरिकेड किस अनुमति या आदेश के तहत लगाए गए हैं।

अगर कोई व्यक्ति सरकारी अधिकारी या कर्मचारी नहीं है, तो उसे वाहन रोकने, दस्तावेज मांगने या चालान के नाम पर किसी वाहन चालक से राशि लेने का अधिकार किसने दिया? यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है।

नकद और निजी UPI से वसूली का भी आरोप

AIMTC की शिकायत के मुताबिक, स्टिंग वीडियो में कथित तौर पर वाहन चालकों से नकद और निजी UPI के माध्यम से राशि लिए जाने की बात सामने आई थी। संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच और स्टिंग वीडियो की फॉरेंसिक जांच की मांग की थी।

ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि यदि किसी प्रकार की राशि ली गई थी तो वह किसके खाते में गई, किस माध्यम से गई और किस उद्देश्य से ली गई?

इसके लिए UPI लेन-देन, CCTV फुटेज, ई-चालान रिकॉर्ड, चेकिंग रजिस्टर और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की जानकारी का मिलान किया जा सकता है।

रोजाना ₹20-25 लाख वसूली का दावा कितना सच?

मामले को और गंभीर बनाने वाला दावा रोजाना होने वाली कथित वसूली को लेकर है। कुछ शिकायतकर्ताओं की ओर से दावा किया जा रहा है कि नयागांव से गुजरने वाले हजारों ट्रकों से प्रतिदिन करीब ₹20 से ₹25 लाख तक की कथित वसूली की जा रही है।

इस रकम की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

यही वजह है कि इस दावे की सच्चाई केवल बयान से नहीं, बल्कि रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकती है। प्रतिदिन चेकिंग से गुजरने वाले वाहनों की संख्या, ई-चालान, सरकारी राजस्व, CCTV रिकॉर्ड और किसी भी प्रकार के डिजिटल भुगतान की जांच की जाए तो तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।

AIMTC ने DGP से लेकर SP तक उठाया मामला

नयागांव मामले में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) ने 28 जुलाई 2026 को मध्यप्रदेश के DGP, उज्जैन रेंज IG और नीमच SP को पत्र भेजकर स्टिंग वीडियो की जांच और आरोप सही पाए जाने पर FIR दर्ज करने की मांग की थी। संगठन ने इससे पहले प्रधानमंत्री, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग किए जाने की जानकारी दी थी।

यानी मामला अब केवल स्थानीय स्तर की शिकायत नहीं है। ट्रांसपोर्ट संगठन ने इसे उच्च अधिकारियों के सामने भी उठाया है।

चेकपोस्ट की वैधानिक स्थिति भी जांच के दायरे में

नयागांव मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मध्यप्रदेश में सीमा परिवहन चेकपोस्ट को लेकर न्यायालय में मामला चल चुका है। मई 2026 में रिपोर्ट किया गया था कि हाईकोर्ट की एकल पीठ के 22 अप्रैल के आदेश पर 11 मई को अंतरिम रोक लगा दी गई थी।

इसके बाद नयागांव जैसे स्थानों पर चेकिंग व्यवस्था किस आदेश, SOP या वैधानिक प्रावधान के तहत संचालित हो रही है—यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

AIMTC ने भी अपनी शिकायत में इसी तरह चेकिंग प्वाइंट की वैधानिक स्थिति, स्थायी तंबू-बैरिकेड और निजी व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग की थी।

पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

अगर किसी ट्रक चालक से जबरन पैसा लेने, धमकाने या मारपीट की शिकायत सामने आती है, तो यह केवल विभागीय अनुशासन का विषय नहीं रह जाता। ऐसी शिकायतों में पुलिस जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

नीमच जिले की आधिकारिक पुलिस वेबसाइट पर नयागांव पुलिस चौकी और जावद थाना दोनों के संपर्क विवरण उपलब्ध हैं।

ऐसे में अब यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि चेकिंग प्वाइंट से जुड़ी शिकायतें पुलिस तक पहुंचीं तो उन पर क्या कार्रवाई हुई? क्या शिकायतकर्ताओं के बयान लिए गए? क्या CCTV फुटेज मांगा गया? क्या वीडियो की तकनीकी जांच कराई गई? और क्या किसी व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज हुई?

विभाग के सामने अब 7 बड़े सवाल

पहला सवाल: निलंबन और तबादले के बाद भी नयागांव चेकिंग प्वाइंट को लेकर शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं?

दूसरा सवाल: चेकिंग प्वाइंट पर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति की अधिकृत भूमिका क्या है?

तीसरा सवाल: क्या किसी निजी व्यक्ति को वाहन रोकने या दस्तावेज जांचने का अधिकार दिया गया है?

चौथा सवाल: क्या चेकिंग की पूरी प्रक्रिया CCTV और डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज हो रही है?

पांचवां सवाल: नकद अथवा निजी UPI से भुगतान लिए जाने के आरोपों की जांच हुई या नहीं?

छठा सवाल: रोजाना ₹20-25 लाख की कथित वसूली के दावे की जांच के लिए विभाग ने क्या कदम उठाए?

सातवां सवाल: अगर आरोप गलत हैं तो परिवहन विभाग आंकड़ों और रिकॉर्ड के साथ स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं करता?

अब सिर्फ निलंबन नहीं, सिस्टम की जांच जरूरी

नयागांव का मामला सिर्फ एक अधिकारी के निलंबन तक सीमित नहीं होना चाहिए। अगर आरोप गलत हैं तो निष्पक्ष जांच से यह साफ होना चाहिए कि आखिर शिकायतें कहां से और क्यों आ रही हैं। और अगर शिकायतों में तथ्य मिलते हैं तो जिम्मेदारी केवल एक कर्मचारी पर तय करने के बजाय पूरी चेकिंग व्यवस्था, निगरानी तंत्र और निजी व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच जरूरी होगी।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रक चालक और ट्रांसपोर्ट कारोबारी जब किसी सरकारी चेकिंग प्वाइंट से गुजरें तो उन्हें नियमों के मुताबिक कार्रवाई का भरोसा होना चाहिए, न कि कथित दबाव या अनौपचारिक भुगतान की शिकायतें।

अब नजर परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन पर है—क्या नयागांव मामले की जांच सिर्फ निलंबन और तबादले तक सीमित रहेगी, या CCTV, ई-चालान, UPI, ड्यूटी रिकॉर्ड और शिकायतकर्ताओं के बयानों के आधार पर पूरे सिस्टम की वास्तविक जांच होगी?

नोट: ₹20–25 लाख प्रतिदिन की कथित वसूली, मारपीट तथा निजी लोगों की भूमिका जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। उपलब्ध रिपोर्टों में वायरल स्टिंग, विभागीय कार्रवाई और AIMTC की जांच/FIR की मांग की पुष्टि होती है।

Created On :   29 Sept 2026 5:25 PM IST

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