दैनिक भास्कर हिंदी: बिना कानूनी आधार के दी पदोन्नति को चुनौती, बीएसएनएल को अनावेदकों को कॉस्ट देने का आदेश

July 3rd, 2019

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। हाईकोर्ट ने बिना कानूनी आधार के पदोन्नति के आदेश को चुनौती देने वाली बीएसएनएल की याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अंजुली पालो की युगल पीठ ने केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को बरकरार रखते हुए बीएसएनएल को आदेशित किया है कि अनावेदकों को कुल 25 हजार रुपए कॉस्ट देने का आदेश दिया है। 

बीएसएनएल की याचिका खारिज

बीएसएनएल में कार्यरत प्रतिभा कर्णे और तीन अन्य कर्मचारियों की ओर से याचिका कर कहा गया कि वे स्टेनोग्राफर-3 के पद पर बीएसएनएल के महाराष्ट्र सर्किल में कार्यरत थे। इसके बाद वह मध्यप्रदेश सर्किल में आ गए। वरिष्ठ होने के बाद भी विभाग ने उन्हें स्टेनोग्राफर-2 के पद पर पदोन्नति नहीं दी। इसके खिलाफ केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण में याचिका दायर की गई। केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने याचिका स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को पदोन्नति और अन्य लाभ देने का आदेश दिया। इस आदेश को बीएसएनएल ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। अनावेदकों की ओर से अधिवक्ता विजय त्रिपाठी ने तर्क दिया कि अनावेदक वरिष्ठता के अनुसार पदोन्नति और अन्य लाभ पाने के हकदार है। सुनवाई के बाद युगल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि बीएसएनएल ने बिना कानूनी आधार के पदोन्नति के आदेश को चुनौती दी है। इसके आधार पर बीएसएनएल की याचिका खारिज कर दी गई है।

वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी से वसूली पर रोक

हाईकोर्ट ने कटनी में पदस्थ वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी से 3 लाख 55 हजार 731 रुपए की वसूली पर रोक लगा दी है। जस्टिस विशाल धगट की एकल पीठ ने संयुक्त संचालक किसान कल्याण, उप संचालक कटनी, और संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। कटनी में पदस्थ वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी आरके त्रिपाठी की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उसे कृषि विभाग की ओर से नियमानुसार समयमान वेतनमान का लाभ दिया गया था। कृषि विभाग ने उसे दी गई वेतन वृद्द्धि को गलत बताते हुए उसके खिलाफ 3 लाख 55 हजार 731 रुपए वसूली शुरू कर दी गई। अधिवक्ता अनिरूद्द्ध पांडे के सुनने के बाद एकल पीठ ने वसूली पर रोक लगा दी। एकल पीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।