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दैनिक भास्कर हिंदी: मुख्यमंत्री श्री चौहान ने शिवाली एवं आलोक को सौंपा "खुशियों की दास्तां" मुख्यमंत्री कोविड- 19 बाल सेवा योजना का स्वीकृति पत्र!

July 2nd, 2021

डिजिटल डेस्क | उमरिया बचपन में ही बच्चों के सिर से माता पिता का साया उठ जाय तो उन बच्चों के सपने कैसे पूरे हो सकते हैं, जिले के नौरोजाबाद निवासी शिवाली और आलोक के साथ एक वर्ष के भीतर पहले माँ की बीमारी से तथा पिता की कोरोना संक्रमण से मृत्यु का दुख झेलना पड रहा है। बच्चों के सपने केवल सपने बनकर न रह जांय, उनकी प्रतिभा को निखरने का पूरा अवसर मिले, इसकी चिंता प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं प्रदेश भर के बच्चों के मामा शिवराज सिंह ने की। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उमरिया अल्प प्रवास के दौरान आलोक एवं शिवाली राय पिता संजीव राय को मुख्यमंत्री कोविड 19 बाल सेवा का स्वीकृति पत्र सौंपा।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शिवाली एवं आलोक से कहा कि वे मन लगाकर पढ़ाई करे और अच्छे अंको से उर्त्तीण होकर समाज, जिला एवं प्रदेश का नाम रोशन करे। उन्होंने कोरोना संक्रमण के कारण अनाथ होने वाले बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी सरकार पर लेते हुए मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना प्रारम्भ की है। योजना के माध्यम से यदि कोई व्यक्ति संरक्षण की जिम्मेदारी लेता है, संबंधित बच्चों तथा अभिभावक के खाते में 21 वर्ष या शिक्षा जारी रही तो 24 वर्ष आयु तक 5 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से छात्र वृत्ति, पढाई का व्यय निजी या शासकीय विद्यालय में, खाद्यान्न सुरक्षा योजना के तहत अनाज की व्यवस्था, तकनीकी महाविद्यालय में प्रवेश पर शिक्षा का सम्पूर्ण व्यय, परीक्षा शुल्क आदि सरकार वहन करेगी, सरकार की इस योजना से बच्चे अपनी प्रतिभा के अनुसार उडान भर सकेंगे।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि अनाथ बच्चों के माता पिता की कमीं को तो पूरा नही किया जा सकता पर उनके जीवन में उन्नति के अवसर बाधित नहीं होंगे। कोरोना की दूसरी लहर आई और चली भी गई पर प्रदेश भर में कई ऐसे बच्चे है जिनके सिर से कोरोना ने माता पिता का साया छीन लिया है। एक ऐसा ही हँसता खेलता परिवार इस वैश्विक महामारी की भेंट चढ़ गया। उमरिया जिले के नौरोजाबाद नगर में निवासरत एक परिवार में किडनी फेल होने से एक वर्ष पूर्व शिवाली और आलोक के सर से माँ का साया छीन लिया था और एक साल भी पूरा नही हो पाया कि वैश्विक महामारी कोरोना ने पिता का साया भी सिर से हटा लिया। पिता संजीव रॉय के निधन के बाद घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा। संजीव छोटा मोटा काम कर अपना परिवार चलाते थे। बच्चो के मामा सुरेश मजूमदार ने बताया कि शिवाली कक्षा 06 में और आलोक कक्षा पाँच में पढ़ता है।

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