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गोरेवाड़ा के बाघ को हुआ डेंगू , 15 दिन पहले ही लाया गया था चंद्रपुर से

गोरेवाड़ा के बाघ को हुआ डेंगू , 15 दिन पहले ही लाया गया था चंद्रपुर से

डिजिटल डेस्क, नागपुर । हाल ही में सुल्तान बाघ की रवानगी के बाद गोरेवाड़ा रेस्कयू सेंटर में चंद्रपुर से एक 11 माह का बाघ यहां लाया गया है। लेकिन मात्र 15 दिनों में ही वह यहां आकर बुरी तरह से बीमार हो गया है। उसे हिप्याटोजुअन नामक बीमारी हुई है। जिसे आसान भाषा में इंसानों में होेनेवाली डेंगू, मलेरिया कहा जाता है। यह बीमारी बहुत कम बाघ को होती है, ऑन रिकॉर्ड पहली बार यह बीमारी किसी बाघ को होने की बात वन विभाग के सामने आई है। बीमारी का कारण प्रशासन साफ नहीं कर रहा है। हालांकि मात्र कुछ ही दिनों में बाघ का बुरी तरह से बीमार होना कई सवालों को पैदा कर रहा है। बीमारी होने से बाघ को अलग रखते हुए ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में किसी भी तरह की खुलकर जानकारी देने से विभागीय व्यवस्थापक टालमटोल रवैया अपनाते जरूर दिखे।

नागपुर शहर के पास बने गोरेवाड़ा रेस्कयू सेंटर में राज्यभर से व बाहर से घायल वन्यजीवों को रेस्कयू कर लाया जाता है। यहां कुल 10 बाघ को रखने की क्षमता भी है। कुछ दिन पहले तक यहां सुल्तान नामक शानदार बाघ रहता था लेकिन प्रजनन के लिए इसे मुंबई के जू में रवाना किया गया है। इसके जाने के ठीक एक-दो दिन बाद ही यहां चंद्रपुर से 11 माह का एक शावक लाया गया था। इसकी एक्टीविटी पूरी तरह से स्वस्थ दिखाई दे रही थी।

बताया गया कि, यह बाघ चंद्रपुर ताडोबा क्षेत्र में मां से बिछड़ी अवस्था में मिला था। मरने की स्थिति में 3 माह की हालत में इस शावक को चंद्रपुर ट्रान्सिक ट्रीटमेंट सेंटर में लाया था। जहां इलाज के बाद इसे पूरी तरह से स्वस्थ बनाया था। लेकिन नागपुर के गोरेवाड़ा में 15 दिन पहले इसे लाया था। इसके बाद इसकी तबीयत खराब हो गई। वह अस्वस्थ होने लगा था, वहीं पेट के अंदर सूजन आ गई थी। ऐसे में खून की जांच करने पर उसे   बीमारी का पता चला है। यह बीमार इंसानों को होनेवाली डेंगू, मलेरिया की तरह ही होती है। जिसमें बाघ पूरी तरह से अस्वस्थ होकर खान-पान छोड़ देता है। इलाज से ठीक होने की संभवना होती है। बाघ को दवाईयां शुरू कर दी है, कितने दिनों में वह रिकवर कर सकेगा। इस पर हर किसी का ध्यान लगा हुआ है।

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