वर्धा: हिंदी विश्व में भारतीय जीवन मूल्यों को प्रसारित करती है- प्रो. शुक्ल

January 12th, 2022

डिजिटल डेस्क, वर्धा। हिंदी विश्व में भारतीय जीवन मूल्यों को प्रसारित करती है। यह विचार महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने व्यक्त किए। वे विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर 'हिंदी का वैश्विक परिप्रेक्ष्यश' विषय पर ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में वक्ता के रूप में सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीरजा अरूण गुप्ता, अंगरेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, हैदराबाद के सेवानिवृत्त प्रोफेसर एम. वेंकटेश्वर, विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. हनुमानप्रसाद शुक्ल उपस्थित थे।  

इस अवसर पर सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीरजा अरूण गुप्ता ने कहा कि हिंदी विश्व स्तर पर सुदृढ़ और स्थापित हुई है। नेपाल, फीजी, सूरीनाम, स्पेन आदि देशों में हिंदी बोलने और समझने वालों की संख्या बढ़ी है। इस दृष्टि से हिंदी विश्व भाषा बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने हिंदी को विश्व में विस्तार करने में हिंदी फिल्मों, समाचार चैनलों और भारतीय विद्या भवन की भूमिका को स्पष्ट किया। साथ ही प्रोफेसर एम. वेंकटेश्वर,प्रतिकुलपति प्रो. हनुमानप्रसाद शुक्ल, प्रो. शुक्ल आदि ने हिंदी को वैश्विक स्तर पर और अधिक पहचान दिलवाने पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन क्षेत्रीय केंद्र प्रयागराज के अकादमिक निदेशक प्रो. अखिलेश कुमार दुबे ने किया। आभार साहित्य विद्यापीठ  के अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने माना। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी जुड़े थे।

विश्वविद्यालय में महामना की मूर्ति का अनावरण

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के महामना पंडित मदन मोहन मालवीय भवन में महामना की मूर्ति का अनावरण विवि के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल की उपस्थिति में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष तथा राज्यसभा सदस्य डॉ. विनय सहस्रबुद्धे के हाथों किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो.कमलेशदत्त त्रिपाठी, कवि कुलगुरू कालिदास,  संस्कृत विश्वविद्यालय रामटेक के कुलपति प्रो.श्रीनिवास वरखेडी, कार्यपरिषद के सदस्य प्रो. योगेंद्र नाथ शर्मा, अरूण , प्रतिकुलपति प्रो. हनुमानप्रसाद शुक्ल, प्रतिकुलपति प्रो. चंद्रकांत रागीट, अधिष्ठातागण, दूर शिक्षा निदेशालय के निदेशक डॉ. के.बालराजू, विद्या परिषद् के सदस्य, विश्वविद्यालय के शिक्षक-अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष तथा राज्यसभा सदस्य डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने विश्वविद्यालय की इस पहल को प्रासंगिक और महत्वपूर्ण बताया। आभार दूर शिक्षा निदेशालय के निदेशक डॉ. के. बालराजू ने आभार व्यक्त किए।