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जांजगीर-चांपा : छत्तीसगढ़ सार्वभौम पीडीएस : जिले के 4 लाख 40 हजार 692 परिवारों का बना राशनकार्ड

January 12th, 2021 16:56 IST
जांजगीर-चांपा : छत्तीसगढ़ सार्वभौम पीडीएस : जिले के 4 लाख 40 हजार 692 परिवारों का बना राशनकार्ड

डिजिटल डेस्क, जांजगीर-चांपा। राज्य में सार्वभौम पीडीएस के लागू होने के उपरांत राज्य की 97 प्रतिशत जनसंख्या को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। महात्मा गांधीजी की 150 वीं जयंती के अवसर पर 02 अक्टूबर 2019 से छत्तीसगढ़ में सार्वभौम पीडीएस का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना से जनवरी 2020 की स्थिति में जांजगीर-चांपा जिले के 4 लाख 40 हजार 692 परिवारों का राशन कार्ड बनाया गया है। राज्य सरकार के इस कदम के बाद अब कोई भी व्यक्ति राशनकार्ड या राशन से वंचित नहीं रहेगा। प्रदेश के सभी परिवार अब राशनकार्ड हेतु पात्र हो गए हैं। सार्वभौम पीडीएस के अंतर्गत प्राथमिकता राशनकार्डो के खाद्यान्न पात्रता में वृद्धि की गई है, उन्हें अगस्त 2019 से बढ़ी हुई पात्रता के साथ राशन मिल रहा है। योजनान्तर्गत अन्त्योदय, प्राथमिकता, एकल, निराश्रित, अन्नपूर्णा, निःशक्तजन एवं सामान्य राशनकार्डधारी परिवार शामिल है। इस योजना के प्रारंभ होने से अब प्रदेश के सभी परिवार राशनकार्ड के लिए पात्र हो गये है। राज्य सरकार ने सभी गरीब परिवारों को 35 किलों चावल देने वादा इस योजना के माध्यम से पूरा किया है। प्राथमिकता वाले राशनकार्ड धारी परिवारों में एक सदस्य होने पर 10 किलो चावल, 2 सदस्य होने पर 20 किलो चावल, 3 से 05 सदस्य होने पर 35 किलो और 05 से अधिक सदस्य होने पर प्रति सदस्य 7 किलो चावल 01 रूपये प्रति किलो की दर से प्रतिमाह देने का प्रावधान है। इसी प्रकार एपीएल परिवारों को भी मात्र 10 रूपयें प्रति किलो की दर पर 35 किलो चावल प्रतिमाह उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा निराश्रित और दिव्यांगांे को 10-10 किलों चावल निःशुल्क देने का प्रावधान है। उल्लेखनीय है कि राज्य में कुल 67 लाख 10 हजार राशनकार्डों में पंजीकृत 2 करोड़ 48 लाख लोगों को खाद्यान्न वितरण किया जा रहा है। विगत 2 वर्ष के दौरान राज्य में लगभग 11 लाख 15 हजार नवीन राशनकार्ड जारी किए गए तथा 5 लाख 52 हजार नवीन सदस्यों के नाम राशनकार्डों में जोड़े गए हैं। सार्वभौम पीडीएस के अंतर्गत प्राथमिकता राशनकार्डो के खाद्यान्न पात्रता में वृद्धि की गई है, उन्हें अगस्त 2019 से बढ़ी हुई पात्रता के साथ राशन मिल रहा है।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।