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दुष्कर्म के बाद मासूम बच्ची की हत्या के आरोपी की फांसी पर अंतिम सुनवाई शुरू

दुष्कर्म के बाद मासूम बच्ची की हत्या के आरोपी की फांसी पर अंतिम सुनवाई शुरू

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। हाईकोर्ट में दुष्कर्म के बाद मासूम बच्ची की हत्या के आरोपी बुरहानपुर निवासी विजय उर्फ पिंटया की फांसी पर अंतिम सुनवाई शुरू हो गई है। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अंजुली पालो की युगल पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को नियत की है। 

दुष्कर्म के बाद बच्ची की हत्या कर लाश फेंक दी

अभियोजन के अनुसार 15 अगस्त 2018 को बुरहानपुर के मोहद क्षेत्र में विजय उर्फ पिंटया तीन साल की बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर अपने साथ ले गया। आरोपी ने दुष्कर्म के बाद बच्ची की हत्या कर लाश फेंक दी। 18 अगस्त को बच्ची की लाश चिंदया नाले के पास सफेद कपड़ों पर लिपटी हुई मिली। पुलिस ने आरोपी पर धारा 363, 366, 376 और पॉक्सो एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया। बुरहानपुर के पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश राजेश नंदेश्वर ने 8 मार्च 2019 को फांसी की सुनाई। जिला न्यायालय की ओर से फांसी की सजा की पुष्टि के लिए प्रकरण हाईकोर्ट भेजा गया, वहीं आरोपी की ओर से भी अपील दायर की गई।

दहेज हत्या के आरोपियों की सजा यथावत

दहेज हत्या के आरोपियो को हाईकोर्ट ने उम्र कैद की सजा बरकरार रखी है। शहडोल की अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 7 जुलाई 1994 को रेवती बाई और शंकरदयाल को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। निचली अदालत द्वारा दी गई सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी। सुनवाई के बाद युगल पीठ ने उम्र कैद की सजा को बरकरार रखते हुए अपील निरस्त कर दी है। अभियोजन के अनुसार उमा बाई का विवाह शहडोल निवासी शंकरदयाल  से हुआ था।  उमा बाई को दहेज के लिए विवाह के बाद से ही परेशान किया जाने लगा। उमा बाई ने  अपने मायके वालों से इसकी शिकायत  की। इसके बाद वे उसे अपने साथ ले गए। 20 जुलाई 1993 को उमा बाई की लाश पंखे से लटकती हुई पाई गई वह ससुर की मौत होने के कारण ससुराल आ गई थी।  पुलिस ने इस मामले में शंकरदयाल और उसकी मां रेवती बाई के खिलाफ दहेज हत्या का प्रकरण दर्ज किया था।
 

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