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गर्भवती पत्नी और मासूम बेटी को हाथ गाड़ी पर हैदराबाद से लाया था बालाघाट - अभी भी रोटी को मोहताज

गर्भवती पत्नी और मासूम बेटी को हाथ गाड़ी पर हैदराबाद से लाया था बालाघाट - अभी भी रोटी को मोहताज

 डिजिटल डेस्क बालाघाट । माह की शुरूआत में देश भर में एक तस्वीर चर्चा में आयी थी। तस्वीर थी एक ऐसे मजदूर की जिसने हैदराबाद में लॉकडाउन के चलते अपनी रोजी रोटी छिन जाने के बाद, वहां से पैदल अपने घर के लिये चलना तय किया था। साधन बनाया था एक हाथ से खींचने वाली गाड़ी को, जिसमें बैठा कर वह अपनी गर्भवती पत्नि और 2 साल की मासूम बेटी को लेकर चल पड़ा था। इस उम्मीद के साथ की यहां भूखे मरने से अच्छा है कि वह घर पहुंच जाये, जहां अपने गांव अपनो के बीच उसकी तकलीफ कम हो जाएगी। लेकिन घर लौट कर भी यह श्रमिक रोजी रोटी को मोहताज है। कमोबेश हर मजदूर की स्थिति ऐसी ही है जिन्हे आते ही क्वारेंटाईन होने के कारण पहले 14 दिन कोई काम नही दिया जा सकता और उसके बाद नये काम की तलाश भी वर्तमान परिस्थितयों मे आसान नही।
काम नही था हैदराबाद गया, पहूंचते ही दो दिन में लॉकडाउन हो गया& यह कहानी नही सच्चाई है एक ऐसे हिम्मती युवा श्रमिक रामू घोरमारे और उसकी गर्भवती पत्नि धनवंता बाई की जो की होली के ठीक बाद कमाने के लिये अपने गांव कुंडे मोहगांव से हैदराबाद पहुंचा था। जहां एक कंस्ट्रक्शन साईट पर मिस्त्री का काम करता था। 19 मार्च को वहां उसे काम भी मिला। लेकिन दो तीन दिन में ही लॉकडाउन हो गया। 15 दिन तो जैसे तैसे वहां के मददगारों के भरोसे रोजी रोटी का जुगाड़ हो गया। फिर उसने हिम्मत जुटाई और दो सौ रूपये में 4 सायकल के बेरिंग लेकर लकड़ी और लोहे की गाड़ी बनाकर हाथ गाड़ी खींचता हुआ लगभग डेढ़ सौ कि.मी. पहले पांच दिन में पैदल और फिर कोई 200 कि.मी. एक ट्रक पर बैठ कर नागपुर के हाईवे तक पहुंचा। वहां से फिर गाड़ी पर जिंदगी खींचता हुआ वह रजेगांव के रास्ते अपने गांव पहुंचा था।गांव लौटते ही 3 दिन क्वारेंटाईन सेंटर में मिला खाना, फिर पंचायत ने दी थी 15 किलो राशन की मदद
रामू घोरमारे से हमारी टीम ने आज जब उसके गांव जाकर चर्चा की तो उसने बताया कि जब गांव लौटा तो पहले दिन नातेदारों ने खाना खिलाया, दूसरे दिन आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने संपर्क कर उसे एक क्वारेंटाईन सेंटर भेज दिया। जहां उसे तीन दिनो तक खाना मिला। स्वास्थ्य की जांच हुई और फिर उसके बाद उसे घर पर ही 14 दिन तक रहने का बोल कर गांव भेज दिया गया। जहां पंचायत के सचिव ने उसे अपने पास से 100 रूपये और 15 किलो राशन दिया। लेकिन आज जब हम इस परिवार के पास पहुंचे तो उसके घर में चूल्हा जलाने के लिये राशन तक नही था। सरकारी मदद पेट की आग बुझाते समाप्त हो गई थी और हाथ में कोई काम भी नही था। 
इनका कहना है...
प्रवासी श्रमिको को पंचायतो के माध्यम से राशन और मनरेगा से काम दिया जा रहा है। पहले इस श्रमिक को एक बार राशन दिया है अगर समाप्त हो गया है तो दोबारा दे दिया जायेगा।
निकिता मंडलोई, एस.डी.एम. किरनापुर
 

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ये हैं हॉकी की रियल 'चक दे' गर्ल्स, जानिए किन संघर्षों के बीच किया मैदान तक का सफर, जीत के क्या हैं इरादे?

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डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला टीम ने क्वार्टर फाइनल में विश्व की नंबर 2 टीम ऑस्ट्रेलिया को हरा कर सेमीफाइनल में अपनी जगह बनाकर एक नया इतिहास रच दिया है। 41 सालों के बाद भारतीय टीम सेमीफाइनल तक पहुची है। अब जानते है उन महिला खिलाड़ियो के बारे में जिन्होंने टीम को जिताने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।  

रानी रामपाल ( कैप्टन)

रानी रामपाल भारतीय हॉकी टीम की कैप्टन हैं। जिन्हें भारतीय हॉकी टीम की रानी भी कहा जाता है। रानी रामपाल हरियाणा के शाहबाद मारकंडा की रहनी वाली हैं। रानी एक मिडिल क्लास फैमिली से हैं और उनकी जिन्दगी संघर्ष भरी रही है। रानी के घर में उनके पिता और दो बड़े भाई हैं।सबसे बड़े भाई बढ़ई हैं और दूसरे भाई किसी दुकान पर काम करता हैं। इसके साथ ही रानी के पिता एक तांगा चलाते हैं। बता दें कि रानी ने 14 साल की उम्र में ही अपना पहला इंटरनेशनल मैच खेल लिया था। और हाल ही में रानी की कप्तानी में भारतीय हॉकी टीम ने फिर कमाल कर दिखाया है।  

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सविता पूनीया
हरियाणा की सविता पूनीया भारतीय हॉकी टीम की गोलकीपर हैं। सोमवार को टोक्यो ओलंपिक में अपना शानदार प्रदर्शन दिखाते हुए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खड़ी रहीं और भारत को जीत दिलाई। दुनिया की दूसरे नंबर पर आने वाली महिला हॉकी टीम ऑस्ट्रेलिया के सामने भारत ने अपना उच्च प्रदर्शन दिखाते हुए पहले क्वार्टर में ऑस्ट्रेलिया को आगे नही बढ़ने दिया और दूसरे क्वार्टर में अच्छा प्रदर्शन करते हुए गोल भी मारा। सविता पूनीया मैच की हीरो रहीं क्योंकि उन्होंने सात पेनल्टी कॉर्नर के बावजूद ऑस्ट्रेलिया का गोल नहीं करने दिया। 

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वंदना कटारिया 
टोक्यो ऑलंपिक में दक्षिण अफ्रीका के साथ हुए मुकाबले में फॉर्वर्ड खिलाड़ी वंदना कटारिया ने जोरदार परफॉर्मेस दिया और 3 गोल दागकर भारत की जीत को तय किया। वंदना कटारिया पहली ऐसी महिला बन गई हैं जिन्होंने ओलंपिक मैच में हैट्रिक जमाई और शानदार खेल का प्रदर्शन कर भारतीय महिला हॉकी टीम के क्वालीफाई की उम्मीद को जिंदा रखा। वंदना के साथ नेहा ने भी भारत की जीत के लिए नींव रखी। 

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मोनिका मलिक 
मोनिका मलिक ने 2013 में जूनियर विश्व कप में कांस्य पदक जीता और 2013 में ही आयोजित तीसरी एशियन चैम्पियनशिप ट्रॉफी में रजत पदक जीता। 2014 में भोपाल में हुए चौथे सीनियर नेशनल गेम्स में रजत पदक जीता। इस प्रतियोगिता में उन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब भी मिला। 2014 में दक्षिण कोरिया में आयोजित 17वें एशियन गेम्स में उन्होंने कास्य पदक जीता। मोनिका ने कहा था कि यह पहली बार है जब भारतीय टीम को ओलंपिक में खेलने का मौका मिला। और अब टीम ने ओलंपिक का अनुभव भी हासिल कर लिया है, जिसका फायदा उन्हें टोक्यो ओलंपिक में मिल सकता है। मोनिका इस ओलंपिक में उसी तजुर्बे का फायदा उठाती नजर आ रही हैं। मोनिका मलिक अर्जेंटीना की प्रसिद्ध खिलाड़ी आइमर को अपनी आदर्श मानती हैं। 

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82 हजार के लहंगे में तारा सुतारिया लगी बेहद बोल्ड, जीता फैंस का दिल

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डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉलीवुड की खूबसूरत और टैलेंटेड एक्ट्रेस तारा सुतारिया को उनकी एक्टिंग के साथ साथ उनके फैशन सेंस के बारे भी जाना जाता है। तारा हर तरह की ड्रेस में खूब जंचती हैं फिर चाहें वो वेस्टर्न हो या इंडियन। और वह अक्सर अपने लुक को शेयर करती रहती हैं। तारा ने हाल ही में अपने एक नए लुक को शेयर किया है, जिसमें उन्होंने एक ऑरेंज कलर का बहुत ही सुन्दर लहंगा पहना है। लहंगे के साथ तारा ने ब्रोकेड ब्लाउज पहना है और साथ में एलिगेंट दुपट्टा गले में डाला हुआ है। इस लहंगे में तारा बेहद खुबसूरत दिख रही है।

tara

तारा का यह लहंगा डिजाइनर ऋतू कुमार के लेबल का है। इस लहंगे के ब्लाउज में डीप नैकलाइन और मैट गोल्ड कढ़ाई का भी काम हुआ है। इसकी स्लीव्स छोटी और डिजाइनर हैं। इसके दुपट्टे में भी कढ़ाई का खूबसूरत काम किया गया है। 

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तारा ने इस लहंगे के साथ गोल्ड के इयररिंग्स और चूड़ियां कैरी की हैं जो उनके लुक को और भी एलिगेंट लुक दे रही हैं। उन्होंने बालों का बन बनाया हुआ है जिसमें फूल लगे हुए हैं। इसके साथ तारा ने न्यूड मेकअप किया है और होठों पर न्यूड लिप्स्टिक लगाई हुई है और माथे पर एक छोटी सी बिंदी भी तारा ने लगाई है।

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इस ऑरेंज कलर के रॉयल लुक वाले लहंगे की कीमत 81,900 रुपये है और इसे डिजाइनर ऋतु कुमार की वेबसाइट से खरीदा जा सकता है।
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तारा सुतारिया के अगर करियर की बार करें तो इन्होंने बॉलीवुड में अभी तक दो फिल्में की हैं। तारा की पहली फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर थी और दूसरी फिल्म थी मरजावां जिसमें तारा अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ नजर आई थीं।

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 खबर है कि तारा जल्द ही अपनी नई फिल्म एक विलेन रिटर्न्स और तड़प में नजर आने वाली हैं। बता दें कि फिल्म एक विलेन रिटर्न्स में तारा के साथ जॉन अब्राहम और अर्जुन कपूर दिख सकते हैं। जबकि फिल्म तड़प में तारा के साथ सुनील शेट्टी के बेटे अहान शेट्टी दिख सकते हैं।