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लंदन से भारत में व्यापार करने का झांसा देकर ढाई लाख की चपत  

लंदन से भारत में व्यापार करने का झांसा देकर ढाई लाख की चपत  

डिजिटल डेस्क,नागपुर। लंदन से भारत में व्यापार करने का झांसा देकर व्यापारी को ढाई लाख रुपए से चपत लगा दी गई । सोशल मीडिया के जरिए व्यापारी को झांसे में लिया गया था। दिल्ली में कस्टम अधिकारियों द्वारा पकड़े जाने की झूठी जानकारी देकर रकम वसूली गई है। घटित प्रकरण के उजागर होने से मंगलवार को बजाज नगर थाने में महिला समेत तीन आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।

जानकारी के अनुसार अभ्यंकर नगर निवासी मकरंद प्रकाश चांदुकर (45) की शेयर ट्रेडिंग कंपनी है । मकरंद संपति खरीदी-बिक्री का भी व्यापार करते हैं। 15 नंवबर 2018 को उनके फेसबुक अकाउंट पर लंदन से जेनिफर गॉरेढ़ नाम की महिला ने फ्रेंडरिक्वेस्ट भेजा था । मकरंद ने जेनिफर की प्रोफाइल पढ़ी। जिससे उसे यह पता चता कि लंदन में जेनिफर भी उनकी तरह की संपति खरीदी-बिक्री का व्यापार करती है। दोनों के एक ही पेशे से जुडे होने के कारण मकरंद ने उसकी फ्रेंडरिक्वेस्ट स्वीकार ली।

15 से 22 नंवबर 2018 तक सोशल मीडिया के जरिए दोनों एक दूसरे के संपर्क में रहे। बातचीत के दौरान जेनिफर ने मकरंद को बताया कि वह भारत में संपति खरीदी-बिक्री का व्यापार करना चाहती है। मकरंद के भारत का निवासी होने से व्यापार में मदद करने के लिए कहा गया था। मकरंद ने भी मदद करने की हामी भरी थी। जेनिफर को काम के सिलसिले में भारत बुलाया गया था। घटित प्रकरण के दौरान एक दिन जेनिफर ने मकरंद को फोन कर बताया कि वह भारत में आई और दिल्ली हवाई अड्डे पर उसे कस्टम विभाग के अधिकारियों ने इस लिए पकड़ा है क्योंकि वह 5 लाख पाउंड की डी.डी.बगैर रजिस्ट्रेशन भारत में ले आई है।

जेनिफर ने कस्टम अधिकारी के तौर पर दो लोगों की फोन पर बात भी करवाई थी। जेनिफर का भारत में बैंक खाता नही होने से उन लोगों ने अपना खाता नंबर मकरंद को दिया था। झांसे में मकरंद ने पाउंड को भारतीय मुद्रा में बदले के लिए 1 लाख 70 हजार रुपए और अन्य खर्च के लिए बताए गए खाते में 2 लाख 46 हजार 700 रुपए जमा किए। घटित प्रकरण से मकरंद को चपत लगाई गई है।

संदेह होने से खुला राज 

घटित प्रकरण से मकरंद को अनहोनी का संदेह हुआ। उसने दिल्ली हवाई अड्डे पर इसकी जांच पड़ताल की। जिससे जेनिफर द्वारा बताया गया ऐसा कोई वाकया नही होने की मकरंद को जानकारी मिली। इसके तत्काल बाद मामले की संबंधित थाना और साइबर सेल को शिकायत की गई। लंबे समय तक चली जांच के बाद भी साइबर सेल आरोपियों को ढूंढने में नाकाम रहा है।

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