लखनऊ: शिवरात्रि के अवसर पर आस्था के समंदर में डूबा उत्तर प्रदेश

March 1st, 2022

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। आदि देव शिव और शक्ति की देवी गौरी के विवाह के प्रतीक पर्व महाशिवरात्रि के मौके पर उत्तर प्रदेश में चहुंओर आस्था का समंदर हिलोंरे मारता दिखा। शिव की नगरी काशी और संगम नगरी प्रयागराज समेत राज्य के अधिसंख्य इलाकों में कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच तड़के से ही शिवालयों में जलाभिषेक और दर्शन पूजन करने के लिये श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
देश के 12 ज्योर्तिलिंगों में एक बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में देर रात से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। 'हर हर बम बमÓ के गगनभेदी उद्घोष के साथ श्रद्धालु गंगा नदी में स्नान कर अपने आराध्य के दर्शन के लिये कतारबद्ध होने लगे थे। दूर दराज के क्षेत्रों से पवित्र नदियों और सरोवरों का जल लेकर आये कांवडिय़ों के समूह उत्साह और बेसब्री से जलाभिषेक के लिये अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। काशी विश्वनाथ धाम में भगवान विश्वेषर के दर्शन पूजन के लिये हजारों शिवभक्तों ने हर हर महादेव के उदघोष के साथ विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक किया। पिछले वर्ष दिसम्बर में काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के बाद पहली शिवरात्रि के मौके पर नगर और आसपास के सैकड़ों भक्तों ने कल रात से ही मणिकर्णिका घाट स्थित धर्म स्थलों पर पूजा दर्शन और गंगा स्नान करने के बाद पंचकोसी यात्रा आरंभ कर दी थी तथा यात्रा पूरी करने के बाद वह गंगाजल लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के साथ मंदिर गंगा तट से सीधा जुड़ गया है। पूरे मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया है।
प्रयागराज में माघ मेला के अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि के मौके पर हजारों की संख्या में शिवभक्तों ने पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगायी और शिवालयों में जलाभिषेक कर भगवान शिव को प्रिय बेलपत्र,धतूरा,पुष्प,गंध और चंदन अर्पित किया। लखनऊ में बुद्धेश्वर,मनकामेश्वर,हनुमान सेतु स्थित शिवालयों में भोर से शिवभक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। कतार में लगे श्रद्धालु अपनी बारी के इंतजार के साथ हर हर महादेव का उद्घोष कर रहे थे। मंदिरों में सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम किये गये हैं। कानपुर में परमट स्थित आनंदेश्वर मंदिर के कपाट भोर तीन बजे से ही दर्शन के लिये खोल दिये गये थे। रात 12 बजे से ही यहां शिवभक्तों की लंबी कतारें लग गयी थी। इसके अलावा वनखंडेश्वर,सिद्धेश्वर, नागेश्वर समेत छोटे बड़ें शिवालयों में तिल रखने की जगह नहीं थी।
जौनपुर में प्रमुख शिव मंदिरों त्रिलोचल महादेव जलालपुर, दियावांनाथ, गौरीशंकर धाम सुजानगंज, साईनाथ, करशूल नाथ, पाताल नाथ, गोमतेश्वर नाथ केराकत, पांचों शिवाला, सर्वेश्वरनाथ, सहित अन्य शिवालयों पर सवेरे से ही श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते देखे गये। देवरिया में महाशिवरात्रि के अवसर पर विभिन्न शिवालयों में भक्त ब्रह्म बेला से ही हर हर महादेव का जप करते हुए भगवान शिव की आराधना करते हुए पूजन अर्चन एवं जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक कर रहे हैं। छोटी काशी के रूप में प्रसिद्ध श्री दुग्धेश्वरनाथ मंदिर रुद्रपुर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। इस दौरान मंदिर में हर हर बम बम के जयघोष से दुग्धेश्वरनाथ धाम दिनभर गूंजता रहा। रुद्रपुर महाकाल शिव की नगरी कही जाती है। पुराण की व्याख्यानुसार इस क्षेत्र को हंस तीर्थ स्थल कहा जाता है। स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन के लिए देश के हर कोने भक्त आते हैं।