Pune City News: 14.39 करोड़ की ठगी मामले में भोंदूबाबा दीपक खड़के का अंतरिम जमानत रद्द

14.39 करोड़ की ठगी मामले में भोंदूबाबा दीपक खड़के का अंतरिम जमानत रद्द
कोर्ट का आदेश- 6 अगस्त तक येरवडा जेल अधीक्षक के सामने करना होगा सरेंडर

भास्कर न्यूज, पुणे। संतान प्राप्ति का झांसा देकर और खुद को दैवी शक्ति वाला बताकर एक परिवार से 14 करोड़ 39 लाख 20 हजार 72 रुपये की ठगी करने के मामले में आरोपी भोंदूबाबा दीपक जनार्दन खड़के को बड़ा झटका लगा है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने उसका अंतरिम जमानत आवेदन खारिज कर दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि खड़के को 6 अगस्त से पहले येरवडा मध्यवर्ती कारागृह के अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण करना होगा।

वहीं, इस मामले में आरोपी वेदिका पंढरपूरकर और कुणाल पंढरपूरकर को राहत मिली है। कोर्ट ने दोनों के अंतरिम जमानत की अवधि एक महीने के लिए बढ़ा दी है।

2018 से 2025 तक चलती रही ठगी

कोथरूड पुलिस थाने में दर्ज मामले के अनुसार, आरोपियों ने वर्ष 2018 से 4 नवंबर 2025 के बीच शिकायतकर्ता और उनके परिवार का विश्वास हासिल किया। आरोप है कि वेदिका पंढरपूरकर के शरीर में शंकर महाराज आने और उसे दैवी शक्ति प्राप्त होने का दावा किया गया। शिकायतकर्ता को संतान नहीं थी। आरोपियों ने उन्हें बेटी होने का भरोसा दिलाया और इसी बहाने परिवार का विश्वास जीत लिया। इसके बाद अलग-अलग कारण बताकर उनसे बड़ी रकम ली गई।

बैंक खाते, जमीन और सोने से जुटाए पैसे

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता से बैंक खाते की रकम, जमीन और प्लॉट बिक्री से मिले पैसे, बीमा पॉलिसी, पीपीएफ की राशि, सोने पर लिया गया कर्ज और होम लोन की रकम सहित कुल 14 करोड़ 39 लाख 20 हजार 72 रुपये विभिन्न खातों में जमा करवाए गए। आरोप है कि यह रकम वेदिका पंढरपूरकर, कुणाल पंढरपूरकर और अन्य लोगों व कंपनियों के खातों में भेजी गई। बाद में आरोपियों ने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया।

इसके अलावा शिकायतकर्ता की दिव्यांग बेटी को जान से मारने की धमकी देने और पुलिस कार्रवाई से बचने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया गया है।

इस मामले में पुलिस ने 7 नवंबर 2025 को वेदिका पंढरपूरकर, कुणाल पंढरपूरकर और दीपक खड़के को गिरफ्तार किया था।

शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता विजय सिंह ठोंबरे और अधिवक्ता अक्षय खडसरे ने पक्ष रखा। उनके तर्कों को ध्यान में रखते हुए न्यायाधीश एम. एस. आर. पवार ने वेदिका और कुणाल की अंतरिम जमानत बढ़ाने का आदेश दिया, लेकिन दीपक खड़के की मांग को खारिज कर दिया।

कोर्ट के 6 जुलाई के आदेश के अनुसार आरोपियों को 5 अगस्त तक अंतरिम जमानत मिली थी। इस दौरान कुणाल पंढरपूरकर ने 50 लाख रुपये की व्यवस्था की। शिकायतकर्ता ने यह राशि निकालने की अनुमति के लिए कोर्ट में आवेदन किया था। इस पर शिकायतकर्ता ने कोई आपत्ति नहीं जताई। इसी वजह से वेदिका और कुणाल की जमानत अवधि बढ़ाने में कोर्ट को कोई परेशानी नहीं हुई।

दीपक खड़के ने नहीं की कोई आर्थिक व्यवस्था

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों को पहले भी गुण-दोष के आधार पर जमानत नहीं दी गई थी। वेदिका और कुणाल को उनके लिखित निवेदन के आधार पर अंतरिम राहत मिली थी। लेकिन दीपक खड़के ने शुरुआत से अब तक किसी भी राशि की व्यवस्था नहीं की। इस कारण कोर्ट ने उसकी अंतरिम जमानत बढ़ाने से इनकार कर दिया।

Created On :   5 Aug 2026 7:25 PM IST

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