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Pune City News: मोंट वर्ट बिल्डर को 26 घर खरीदारों को ब्याज देने का आदेश

भास्कर न्यूज, पुणे। महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (महारेरा) ने पुणे के मुलशी तहसील स्थित भुगांव के मोंट वर्ट बेलक्रीक प्रोजेक्ट में फ्लैट का कब्जा देने में देरी के मामले में बिल्डर को 26 घर खरीदारों को ब्याज देने का आदेश दिया है।
घर खरीदारों ने महारेरा में शिकायत दर्ज कर फ्लैट का कब्जा ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) के साथ देने और देरी के लिए ब्याज व मुआवजे की मांग की थी। खरीदारों के साथ हुए करार में फ्लैट का कब्जा देने की अंतिम तारीख 31 मई 2025 तय थी, लेकिन बिल्डर समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं कर सका।
महारेरा ने शिकायतों पर सुनवाई करते हुए बिल्डर को 1 जून 2025 से लेकर ओसी के साथ कब्जा देने तक हर महीने की देरी पर ब्याज देने का निर्देश दिया है। ब्याज की गणना खरीदारों द्वारा फ्लैट की कीमत के रूप में जमा की गई वास्तविक राशि पर की जाएगी।
ब्याज की दर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) से दो प्रतिशत अधिक होगी। स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन शुल्क और सरकारी करों को ब्याज की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।
बिल्डर ने देरी के लिए आर्थिक परेशानी, पैसों की कमी, ठेकेदारों से जुड़े मुद्दे, अन्य खरीदारों द्वारा भुगतान में देरी और ऋणदाता की कानूनी कार्रवाई को कारण बताया था। बिल्डर ने प्रोजेक्ट का महारेरा पंजीकरण समाप्त होने और विस्तार के लिए खरीदारों की सहमति नहीं मिलने का भी हवाला दिया।
महारेरा ने कहा कि ये कारण प्रोजेक्ट में देरी की वजह हो सकते हैं, लेकिन इससे बिल्डर अपनी कानूनी और अनुबंध संबंधी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो सकता। प्रोजेक्ट समय पर पूरा करना और तय समय में कब्जा देना बिल्डर की जिम्मेदारी थी।
प्राधिकरण ने कहा कि अनुभवी बिल्डर को प्रोजेक्ट से जुड़े वित्तीय और कानूनी जोखिमों की जानकारी होनी चाहिए। यदि देरी की संभावना थी, तो खरीदारों के साथ नया कब्जा समय तय करने के लिए अतिरिक्त समझौता किया जा सकता था।
हालांकि, प्रोजेक्ट पूरा होने में कोई बाधा न आए, इसे देखते हुए महारेरा ने निर्देश दिया है कि जमा हुआ ब्याज ओसी मिलने के बाद ही खरीदारों को दिया जाए। कब्जा देते समय खरीदारों की बाकी देनदारी को ब्याज राशि में समायोजित किया जा सकता है।
महारेरा ने खरीदारों की अतिरिक्त मुआवजे की मांग को खारिज कर दिया। प्राधिकरण ने कहा कि जो खरीदार प्रोजेक्ट में बने रहकर कब्जा लेना चाहते हैं, उन्हें रियल एस्टेट कानून की धारा 18 के तहत देरी अवधि का ब्याज मिलना उचित है।
Created On :   22 July 2026 6:37 PM IST











