फैसला: एनजीटी पुणे पीठ ने ध्वनि प्रदूषण संबंधी मामले का किया निस्तारित, स्थानीय निकाय से संपर्क करने की छूट

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), पश्चिमी क्षेत्रीय पीठ, पुणे ने डॉ. नितिन वसंत नंदुरकर द्वारा दायर मूल आवेदन संख्या 164/2026 (डब्ल्यू जेड) का निस्तारण कर दिया। यह मामला महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के नंदुरा शहर में ध्वनि प्रदूषण और एक क्षेत्र को साइलेंस जोन (शांत क्षेत्र) घोषित किए जाने की मांग से संबंधित था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह, तथा डॉ. सुजीत कुमार बाजपेयी की पीठ ने की। यह आदेश अधिकरण द्वारा 23 सितंबर 2026, 26 सितंबर 2026 और 5 अक्टूबर 2026 को पारित पूर्ववर्ती आदेशों के क्रम में दिया गया।
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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्वयं उपस्थित होकर डॉ. नंदुरकर ने बताया कि उन्होंने नंदुरा शहर में बुलढाणा रोड स्थित शिवाजी महाराज चौक के आसपास के क्षेत्र को साइलेंस ज़ोन घोषित करने के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया था। इस बाबत उन्होंने विस्तार से अपनी दलील रखी। अधिकरण ने पाया कि तहसीलदार को दिए गए प्रतिवेदन में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपायों की मांग की गई थी, लेकिन संबंधित क्षेत्र को साइलेंस ज़ोन घोषित करने का स्पष्ट अनुरोध नहीं किया गया था। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस अधीक्षक, बुलढाणा संबंधित क्षेत्र को साइलेंस ज़ोन घोषित करने के लिए अधिकृत प्राधिकारी नहीं हैं।
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अभिलेख पर प्रस्तुत महाराष्ट्र सरकार की अधिसूचना का उल्लेख करते हुए अधिकरण ने कहा कि इस संबंध में संबंधित स्थानीय स्वशासन निकाय सक्षम प्राधिकारी है। अधिकरण ने आवेदक की दलीलों में पर्याप्त आधार नहीं पाया और मूल आवेदन का निस्तारण कर दिया। हालांकि, आवेदक को संबंधित स्थानीय स्वशासन निकाय के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत करके संबंधित क्षेत्र को साइलेंस ज़ोन घोषित करने की मांग करने की स्वतंत्रता प्रदान की गई।
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