रीवा न्यूज: नाटक के माध्यम से पहुंचाया गया दर्शकों की आत्मा तक हास्य और करुण रस

नाटक के माध्यम से पहुंचाया गया दर्शकों की आत्मा तक हास्य और करुण रस
कथा के नाटकीय रूप को दर्शकों तक भारतीय लोक की आत्मा गीत और संगीत के साथ पहुंचाने का कार्य किया गया

डिजिटल डेस्क रीवा.

मण्डप सांस्कृतिक शिक्षा कला केंद्र द्वारा नाटक गुरु की स्याही का मंचन महाराष्ट्र मंडल सभागार नागर भवन उपरहटी में किया गया। नाटक की रचना विपुल सिंह एवं निर्देशन विनोद कुमार मिश्रा ने किया। नाटक की कथावस्तु जातक कथा पर आधारित है. कथा के नाटकीय रूप को दर्शकों तक भारतीय लोक की आत्मा गीत और संगीत के साथ पहुंचाने का कार्य किया गया. गुरु की स्याही को देखने के लिए काफी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे और प्रस्तुति की उत्साहित मन से सराहना की। नाटक के माध्यम से दर्शकों की आत्मा तक हास्य और करुण रस को ईमानदारी से कलाकारों द्वारा पहुंचाया ।

दान का बताया महत्व

लल्लू सेठ के पास सात पीढ़ियों का धन है, पर एक कौड़ी दान नहीं करता। उसकी पत्नी रोज ताना देती है - "सेठ जी, इस धन को साथ नहीं ले जाओगे, कुछ तीर्थ कर आओ, कुछ दान-धर्म करो।" सेठानी के रोज के तानों से तंग आकर सेठ तीर्थ यात्रा पर जाने को तैयार होता है। सेठानी कहती है - "तीरथ में सबसे बड़ा दान ही होता है, मेरे नाम से भी जरूर दान करना।"सेठ मन में सोचता है दान कर दूंगा तो कई हजार का नुकसान होगा, कुछ उपाय करना पड़ेगा।" वो हाँ कहकर निकल जाता है।

सेठ प्रयाग पहुँचता है। वहाँ दान की बही लिखी जा रही है। बड़े-बड़े सेठ दान लिखवा रहे हैं। तभी पंडित जी सेठ से पूछते हैं - "सेठ जी, आप क्या दान करेंगे. "कंजूस सेठ सोच में पड़ जाता है पर कुछ सोच कर कहता है - "पंडित जी एक पैसे का दान मेरी तरफ से लिख लीजिए। मैं यहाँ संकल्प ले रहा हूँ, बही में लिख लीजिए, घर जाकर ब्राह्मण को दे दूंगा।"वहाँ बही लिखने वाला एक बूढ़ा साधु बैठा है, जो कोई और नहीं स्वयं भगवान भोलेनाथ हैं। वे मुस्कुराकर उसके झूठे दान को बही में लिख लेते हैं ,सेठ बहुत खुश होता है - बिना गाय दिए नाम हो गया। वो तीर्थ से लौट आता है। घर आकर सेठ अपनी पत्नी से डींग मारता है - "मैंने तेरे नाम से दान कर दिया है तभी दरवाजे पर आवाज आती है - "दान का संकल्प पूरा करो सेठ!"देखता है तो वही बही लिखने वाला बूढ़ा बाबा दरवाजे पर खड़ा हैं - "सेठ जी, तीर्थ में आपने जो दान लिखवाया था, उसे लेने आया हूँ। बही में आपका नाम लिखा है, अब तो धर्म का कर्ज चुकाना पड़ेगा।"

सेठ घबरा जाता है, मैंने तो झूठा नाम लिखवाया था।"बाबा कहते हैं - "तीर्थ में बोला गया झूठ सबसे बड़ा पाप है। सेठानी बाबा के पैरों में गिर जाती है। सेठ को अपनी गलती समझ आती है।तभी बाबा अपने असली रूप - भगवान शिव के रूप में दर्शन देते हैं। भगवान शिव कहते हैं " लल्लू दान दिखावे के लिए नहीं, श्रद्धा से होता है। झूठा दान लिखवाने से यश नहीं, पाप मिलता है।"सेठ रोकर माफी मांगता है और सच्चे मन से दान करता है। तब से उसकी कंजूसी खत्म हो जाती है।

यह शामिल हुए कलाकार

नाटक में राजमणि तिवारी, आशीष दाहिया, दीक्षा गोस्वामी, नदीम खान, प्रशांत निगम, सागर मिश्रा, भानु प्रताप सिंह, सुधीर मिश्रा, सूर्यांश सिंह, आराध्या सिंह ने अपने चरित्र को मंच पर जीवन्त कर दिया। साथ ही राहुल तिवारी, मृत्युंजय, शीतांशु,प्रीति, चंद्रकांता मिश्रा, नितिन, सुधीर सिंह आदि कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी।


Created On :   21 Sept 2026 6:12 PM IST

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