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Seoni News: नौरादेही व सतपुड़ा में हो रही चीतलों की शिफ्टिंग, अब तक 57 सौ से अधिक चीतल भेजे

डिजिटल डेस्क,सिवनी। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बनाई जाने वाली चीता सफारी के लिए पेंच टाइगर रिजर्व से चीतलों की शिफ्टिंग हो रही है। अब तक यहां से 315 चीतल शिफ्ट किए जा चुके हैं। पेंच से करीब 700 और चीतल भेजे जाने हैं। माना जा रहा है कि चीतल शिफ्टिंग से चीता और टाइगर को प्राकृतिक शिकार उपलब्ध हो सकेगा। ज्ञात हो कि पेंच टाइगर रिजर्व में चीतलों की संख्या करीब 55 हजार है। ऐसे में हरे घास के मैदान की कमी को देखते हुए और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने दूसरे टाइगर रिजर्व में चीतलों को भेजने का काम हो रहा है।
लगातार जारी है शिफ्टिंग
पेंच से 2017 से 2026 तक 5729 चीतल अलग-अलग टाइगर रिजर्व और वनक्षेत्रों में छोड़े गए हैं। ये चीतल वहां छोड़े गए हैं जहां शिकार-आधार की कमी वाले क्षेत्र हैं। चीतल टाइगर का पसंदीदा भोजन माना जाता है।
कहां कितने छोड़ गए
क्षेत्र संख्या
सतपुड़ा 2538
कूनो 1575
वीरांगना दुर्गावती 1266
रूखड़ 231
अरी 98
खंडवा 21
कुल 5729
सतपुड़ा भी भेजे गए चीतल
जानकारी के अनुसार पेंच से सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 234 चीतल इस साल भेजे गए हैं। पेंच के अलीकट्टा के अलावा अन्य क्षेत्रों में बोमा बनाया गया है। मौसम बिगडऩे पर चीतलों को पकड़ने का काम कई बार प्रभावित भी हुआ है। एक बार में जितने चीतल वाहन में आ जाते हैं उन्हें शिफ्ट कर दिया जाता है।
ज्ञात हो कि बोमा तीर आकार जैसा होता है। उसके मुहाने यानी बड़े हिस्से मे चीतल आने पर उसे कम चौड़ाई वाले हिस्से की ओर खदेड़ा जाता है। अंतिम में ट्रक खड़ा किया जाता है जिसमें चीतल आते ही गेट बंद कर दिया जाता है।
चीतलों की बढ़ती संख्या से चिंता
पेंच टाइगर रिजर्व में चीतलों की बढ़ती संख्या भी चिंता का विषय बन रही है। जबकि इनके हिसाब से यहां पर ग्रासलैंड की कमी है। गर्मी आते ही हरी घास की कमी होने लगती है। हालांकि दूसरे पेड़ों की पत्तियों और झाडिय़ों को चीतल खाते भी हैं। चीतलों के लिए पार्क प्रबंधन गर्मी आने से पहले ग्रासलैंड तैयार करता है।
इनका कहना है
पेंच से चीतलों की शिफ्टिंग की जा रही है। अभी वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व चीतल भेजे गए हैं।
देवा प्रसाद जे, फील्ड डायरेक्टर, पेंच टाइगर रिजर्व
Created On :   30 July 2026 9:14 PM IST












