सीताफल को मिला जीआई टैग: अब विदेश में भी पहचान बनाएगा सिवनी का जम्बो, जिले के हजारों सीताफल उत्पादक किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

अब विदेश में भी पहचान बनाएगा सिवनी का जम्बो, जिले के हजारों सीताफल उत्पादक किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
अपने बड़े आकार, उत्कृष्ट स्वाद तथा उच्च गुणवत्ता के लिए देश में प्रसिद्ध सिवनी का जम्बो सीताफल अब विदेश में भी अपनी पहचान बनाएगा। लगातार तीन साल के प्रयासों के बाद सिवनी के सीताफल को जियोग्राफिकल इंडीकेशन (जीआई टैग) मिल गया है।

Seoni News: अपने बड़े आकार, उत्कृष्ट स्वाद तथा उच्च गुणवत्ता के लिए देश में प्रसिद्ध सिवनी का जम्बो सीताफल अब विदेश में भी अपनी पहचान बनाएगा। लगातार तीन साल के प्रयासों के बाद सिवनी के सीताफल को जियोग्राफिकल इंडीकेशन (जीआई टैग) मिल गया है। इसका सीधा लाभ जिले के हजारों सीताफल उत्पादक किसानों को मिलेगा। जीआई टैग वाले उत्पादों की बाजार में मांग अधिक होने के कारण जिले के सीताफल उत्पादकों को बेहतर दाम भी मिलेंगे साथ ही सीताफल के क्षेत्र विस्तार एवं प्रसंस्करण को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे आने वाले वर्षों में किसानों की आय में वृद्धि, सीताफल आधारित रोजगार के अवसरों का विस्तार तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति भी मिलेगी। यह उपलब्धि जिले की पहचान एवं विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताई जा रही है।

औसतन वजन 650 ग्राम तक

सिवनी जम्बो सीताफल का औसतन आकार 200 से 650 ग्राम प्रति फल होता है। छपारा के भूतबंधानी क्षेत्र में उगाए जा रहे सैकड़ों सीताफल 800 ग्राम से एक किलो ग्राम वजन तक के भी हो जाते हैं। सहायक संचालक उद्यानिकी डॉ. आशा उपवंशी वासेवार के अनुसार वर्तमान में सिवनी जिले में 695 हेक्टेयर रकबे में 6090 मिट्रिक टन सीताफल का उत्पादन किसानों के द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले के सीताफल फसल उत्पादक एफपीओ भूतबंधानी सीताफल क्रॉप प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के माध्यम से जीआई टैग प्राप्त करने 2023 में आवेदन किया गया था। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के द्वारा सिवनी जिले के सीताफल उत्पादक किसानों को संगठित कर सीताफल के 02 एफपीओ का भी गठन किया गया है एवं 03 सीताफल पल्प प्रसंस्करण इकाईयां भी जिले में स्थापित की गई हैं।

कई शहरों में है मांग

सिवनी के सीताफल की दिल्ली,आगरा, झांसी, बनारस, इलाहाबाद, गोरखपुर, नागपुर, रायपुर, मुम्बई सहित देश के अन्य शहरों में बड़ी मांग है। सीताफल का प्रसंस्करण कर सीताफल पल्प बनाया जाता है, जिससे सीताफल आईस्क्रीम, सीताफल रबड़ी, सीताफल बासुंदी, सीताफल लस्सी, सीताफल शेक एवं तरह-तरह की मिठाईयां तैयार की जाती हैं। वहीं, सीताफल के पत्तों एवं छिलकों का उपयोग जैविक खाद एवं दवाईयां बनाने के लिए भी किया जाता है।

क्या होता है जीआई टैग

जीआई टैग का मतलब जियोग्राफिकल इंडीकेशन(भौगोलिक संकेत) है। यह एक विशेष बौद्धिक संपदा अधिकार व प्रमाण पत्र है, जो किसी उत्पाद को उसकी भौगोलिक उत्पत्ति और उस स्थान से जुड़ी विशिष्ट गुणवत्ता, पहचान या परंपरा के आधार पर दिया जाता है। जीआई टैग वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री द्वारा प्रदान किया जाता है, जो कि उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के अंतर्गत कार्य करती है। जीआई टैग यह प्रमाणित करता है कि वह वस्तु उसी विशिष्ट स्थान पर बनी है और इसमें वही पारंपरिक गुण या स्वाद है, जिसके लिए वह प्रसिद्ध है। जीआई टैग उत्पाद को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। यह टैग किसी भी उत्पाद के मूल स्थान को सुरक्षित करता है। इसके बाद कोई अन्य व्यक्ति या कंपनी उस विशेष नाम का गलत इस्तेमाल करके नकली उत्पाद नहीं बेच सकती। असली उत्पाद की पहचान बनने से अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में उसकी मांग बढ़ती है।

Created On :   23 Jun 2026 5:39 PM IST

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