सुविधाओं का टोटा: 5वीं तक मिली मान्यता, फिर भी स्कूल की अपनी इमारत नहीं - जर्जर टीन की छत के नीचे पढ़ते नजर आए विद्यार्थी

5वीं तक मिली मान्यता, फिर भी स्कूल की अपनी इमारत नहीं - जर्जर टीन की छत के नीचे पढ़ते नजर आए विद्यार्थी
  • यावल जिला परिषद स्कूल नंबर-2 किराए की जगह पर संचालित
  • पालकों ने स्थायी भवन या सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की
  • जर्जर टीन की छत और लकड़ी के ढांचे के नीचे पढ़ते बच्चे

Yaval News. काबिज शेख. शहर की जिला परिषद स्कूल नंबर-2 में 5वीं कक्षा तक पढ़ाई की मान्यता मिलने के बावजूद स्कूल के पास अब तक अपनी स्थायी इमारत नहीं है। स्कूल किराए की जगह पर संचालित होने की जानकारी सामने आई है। स्कूल की मौजूदा स्थिति से संबंधित तस्वीरों में टीन की छत, लकड़ी के ढांचे और उसी ढांचे पर लगा पंखा दिखाई दे रहा है। दूसरी तस्वीर में विद्यार्थी इसी कमरे में पढ़ाई करते नजर आ रहे हैं। स्कूल की मौजूदा व्यवस्था को लेकर पालकों और स्थानीय नागरिकों ने स्थायी भवन की जरूरत उठाई है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

टीन की छत के नीचे चल रही कक्षाएं

स्कूल की तस्वीरों में छत के लिए टीन की चादरों के साथ लकड़ी के पुराने ढांचे का इस्तेमाल दिखाई देता है। छत के नीचे पंखा भी लकड़ी के ढांचे से लगा हुआ है। कमरे की दीवारों पर भी पुरानापन नजर आ रहा है।

दूसरी तस्वीर में बड़ी संख्या में विद्यार्थी डेस्क पर बैठकर पढ़ाई करते दिखाई दे रहे हैं। इससे स्कूल में उपलब्ध स्थान और विद्यार्थियों के लिए बेहतर भौतिक सुविधाओं की आवश्यकता साफ नजर आती है।

5वीं की मान्यता के बाद भवन की जरूरत

स्कूल को 5वीं कक्षा तक पढ़ाई की मान्यता मिलने के बाद विद्यार्थियों के लिए आवश्यक कक्षाओं और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में स्कूल के पास अपनी स्थायी इमारत नहीं होने का मुद्दा पालकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

पालकों का कहना है कि किराए की जगह पर लंबे समय तक स्कूल चलाने के बजाय स्थायी भवन के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। जब तक भवन उपलब्ध नहीं होता, तब तक विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग भी की जा रही है।

शिक्षा विभाग से निरीक्षण की अपेक्षा

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि संबंधित शिक्षा अधिकारियों को स्कूल का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर मौजूदा भवन की स्थिति का आकलन करना चाहिए। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि स्कूल के स्थायी भवन के लिए अब तक क्या प्रक्रिया की गई है और आगे की योजना क्या है।

यावल शहर जैसे तालुका मुख्यालय में जिला परिषद स्कूल की अपनी इमारत नहीं होने का विषय विद्यार्थियों की बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़ा है। अब पालकों की नजर शिक्षा विभाग की ओर है कि स्कूल भवन की समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

Created On :   7 Sept 2026 6:11 PM IST

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