Nithari Case Explained: क्या था निठारी कांड? जिसकी सजा काट चुके सुरेंद्र कोली की हुई मौत, नाली में बच्चों के कंकाल मिलने के बाद खुला था दिल दहलाने वाला केस

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। साल 2005 से लेकर 2006 तक लगातार नोएडा में दिल दहला देने वाली घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा था। बच्चों का मांस खाना, महिलाओं और बच्चियों के साथ दुष्कर्म, अपहरण जैसे कई जुर्म शामिल थे। इस मामले में आरोपी सुरेंद्र कोली की शुक्रवार को हरिद्वार में मौत हो गई है। उसका शव एक चाय की दुकान में रस्सी के सहारे लटका मिला है। शुरुआती जांच में इस मामले को आत्महत्या बताया जा रहा है। बता दें, कोली कुछ समय पहले ही जेल से बाहर आया था और हरिद्वार में अपनी चाय की दुकान चला रहा था। निठारी मामले में उस पर कई बच्चों की हत्या का आरोप लगा था। साथ ही उसने कई महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म भी किया है। लंबे समय तक चल रहे इस केस में पुलिस और सीबीआई की जांच पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अदालतों में कई मामलों में पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण कोली को राहत मिली थी।
निठारी कांड की शुरुआत कैसे हुई?
दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब दो स्थानीय लोगों ने दावा किया कि उन्हें पिछले दो साल से लापता बच्चों के अवशेषों के बारे में जानकारी है। दोनों की बेटियां भी लापता थीं और उन्हें डी-5 कोठी में रहने वाले घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली पर शक था। दो स्थानीय लोग आरडब्ल्यूए के पूर्व अध्यक्ष एससी मिश्रा के साथ डी-5 के पीछे बने नाले के पास पहुंचे। तलाशी के दौरान वहां एक सड़ा हुआ हाथ मिलने का दावा किया गया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और जल्द ही आसपास की जमीन की खुदाई शुरू हुई और मानव अवशेष मिलने लगे। लापता बच्चों के परिजन उनकी तस्वीरें लेकर निठारी पहुंचने लगे।
निठारी मामले की जांच कब शुरू हुई?
निठारी मामले की सबसे पहली जांच 29 दिसंबर 2006 को शुरू हुई थी, जिसमें निठारी में नाले से बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले थे। इसके बाद कोली और पंढेर को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 11 जनवरी 2007 को मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। इसके बाद 22 मई 2007 को सीबीआई ने अदालत में पहला आरोप पत्र दाखिल किया। 13 फरवरी 2009 में एक लड़की की हत्या और दुष्कर्म के मामले में पंढेर और कोली को मौत की सजा सुनाई गई। लेकिन 11 सितंबर 2009 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंढेर की मौत की सजा हटा दी। फिर 20 जुलाई 2014 को कोली की दया याचिका राष्ट्रपति ने खारिज कर दी।
8 सितंबर 2014: उसकी फांसी पर आखिरी समय में रोक लगा दी गई।
जनवरी 2015: देरी को देखते हुए कोली की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया।
24 जुलाई 2017: एक दूसरे मामले में कोली और पंढेर को दोषी ठहराया गया।
17 अक्टूबर 2023: हाईकोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में दोनों को बरी कर दिया।
नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट से भी कोली को बचे हुए मामले में दोषमुक्ति मिल गई।
कोली कैसे पहुंचा पंढेर की कोठी तक?
बता दें, सुरेंद्र कोली उत्तराखंड के अल्मोड़ा का रहने वाला था। वह 2000 में काम की तलाश में दिल्ली आया था। खाना बनाने में अच्छा होने के कारण एक परिचित के जरिए उसकी मुलाकात मोनिंदर सिंह पंढेर से हुई। कोली का खाना पसंद आने पर पंढेर ने उसे नौकरी दे दी। कुछ समय बाद पंढेर का परिवार पंजाब चला गया और डी-5 कोठी में पंढेर और कोली ही रहने लगे और फिर कई तरह के जुर्मों को अंजाम देना शुरू हुआ।
दिसंबर 2025 में जेल से बाहर आया था
सुरेंद्र कोली दिसंबर 2025 में जेल से बाहर आया था। वह नोएडा के निठारी कांड में आरोपी था। यह मामला साल 2006 में सामने आया था और पूरे देश में इसकी चर्चा हुई थी। बता दें, 29 दिसंबर 2006 को नोएडा के निठारी इलाके में मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे बने नाले से बच्चों के कंकाल मिले थे। इसके बाद आसपास के नालों और दूसरी जगहों की जांच की गई। इस दौरान कई और कंकाल मिलने की बात सामने आई थी। इस मामले में मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली के खिलाफ कुल 19 मामले दर्ज किए गए थे। निचली अदालत ने सुरेंद्र कोली को 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई थी। वहीं, पंढेर को दो मामलों में सजा मिली थी।
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हाईकोर्ट ने कई मामलों में किया था बरी
16 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में बड़ा फैसला सुनाया और अदालत ने कोली को 12 मामलों में बरी कर दिया था। इसी फैसले में मोनिंदर सिंह पंढेर को भी उसके खिलाफ चल रहे दोनों मामलों में बरी किया गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के इस फैसले को बरकरार रखा था। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से भी उसे दोषमुक्त कर दिया गया।
जांच को लेकर उठे सवाल
मामले की जांच के दौरान पुलिस और सीबीआई पर कई सवाल उठे थे। आरोप लगाया गया था कि जांच एजेंसियां अदालत में ऐसे मजबूत सबूत नहीं रख सकीं, जिनसे अपराध साबित हो सके। फोरेंसिक यानी वैज्ञानिक जांच से जुड़े सबूत भी अदालत में मजबूत तरीके से पेश नहीं किए जा सके हैं। कुछ दस्तावेज और दूसरे सबूत भी सवालों के घेरे में रहे हैं। जांच में यह भी साफ तौर पर साबित नहीं हो सका है कि बच्चों की हत्या पंढेर के घर के अंदर ही हुई थी या नहीं।
आखिर बच्चों का कातिल कौन?
कोली और पंढेर के बरी होने के बाद पीड़ित परिवारों में नाराजगी थी। कई परिवारों का सवाल था कि अगर दोनों दोषी नहीं हैं तो फिर उनके बच्चों के साथ क्या हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। निठारी मामले के पीड़ित परिवार लंबे समय तक न्याय की उम्मीद करते रहे लेकिन अदालत में आरोप साबित नहीं होने के कारण यह सवाल अब भी बना हुआ है।
कोली जेल से बाहर आने के बाद क्या कर रहा था?
दोषमुक्त होने के बाद सुरेंद्र कोली जेल से बाहर आ गया था। इसके बाद वह हरिद्वार में रहने लगा। वहां वह चाय की दुकान चला रहा था। शुक्रवार को इसी दुकान में उसका शव मिला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके बाद 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार में सुरेंद्र कोली ने आत्महत्या कर ली, जिसका शव चाय की दुकान में मिला।
Created On :   18 Sept 2026 6:12 PM IST












