Ashadha Skanda Shashthi: 19 जुलाई को रखें भगवान कार्तिकेय का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

19 जुलाई को रखें भगवान कार्तिकेय का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व
मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से सुख-समृद्धि, साहस, सफलता और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। हिंदू धर्म में हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी का व्रत रखा जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान कार्तिकेय का अवतार हुआ था। भगवान कार्तिकेय को स्कंद, मुरुगन, सुब्रमण्य और कार्तिकेयन के नाम से भी जाना जाता है।

मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से सुख-समृद्धि, साहस, सफलता और संतान सुख की प्राप्ति होती है। आषाढ़ माह की स्कंद षष्ठी इस वर्ष 19 जुलाई 2026, रविवार को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं इस व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र।

स्कंद षष्ठी 2026 का शुभ मुहूर्त

षष्ठी तिथि प्रारंभ: 18 जुलाई 2026, शनिवार रात 8:40 बजे से

षष्ठी तिथि समाप्त: 19 जुलाई 2026, रविवार रात 10:15 बजे तक

उदयातिथि के अनुसार 19 जुलाई को स्कंद षष्ठी का व्रत और पूजा करना शुभ रहेगा।

स्कंद षष्ठी का धार्मिक महत्व

स्कंद षष्ठी का व्रत भगवान कार्तिकेय की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कार्तिकेय देवताओं के सेनापति हैं और वे साहस, पराक्रम, बुद्धि तथा विजय के प्रतीक हैं। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और मनोकामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है।

स्कंद षष्ठी पूजा विधि

- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ एवं पवित्र वस्त्र धारण करें।

- पूजा स्थल को साफ करके एक चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।

- चौकी पर भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

- पूजा करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है।

- भगवान को रोली, अक्षत, चंदन और चंपा के पुष्प अर्पित करें।

- घी का दीपक जलाएं तथा धूप या अगरबत्ती अर्पित करें।

- भगवान कार्तिकेय को अपनी श्रद्धा अनुसार मिष्ठान या फल का भोग लगाएं।

- पूजा के बाद स्कंद षष्ठी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।

- अंत में भगवान की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा मंगल की प्रार्थना करें।

डिसक्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारी अलग अलग किताब और अध्ययन के आधार पर दी गई है। bhaskarhindi.com यह दावा नहीं करता कि ये जानकारी पूरी तरह सही है। पूरी और सही जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ (ज्योतिष/वास्तुशास्त्री/ अन्य एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें।

Created On :   18 July 2026 3:46 PM IST

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