Puri Rath Yatra Explainer: 16 पहियों के रथ पर सवार होकर निकले भगवान जगन्नाथ, 30 लाख भक्तों के शामिल होने का अनुमान, 12 हजार पुलिसकर्मी तैनात, जानिए पूरी डिटेल
डिजिटल डेस्क, भुवनेश्वर। जगन्नाथ पुरी की सड़कों पर एक बार फिर भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकल चुकी है। 16 जुलाई से शुरू हुई यह यात्रा 24 जुलाई तक चलेगी। हर साल की तरह इस बार भी यात्रा में लाखों श्रद्धालु पहुंचे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचने के लिए लोग इतने उत्सुक क्यों रहते हैं? कोई तो बात जरूर होगी जो लाखों श्रद्धालु पूरे साल पुरी जाने का इंतजार करते हैं। अगर आप भी इसका रहस्य जानना चाहते हैं तो ये आर्टिकल आपके लिए है। साथ ही, रथयात्रा से जुड़े उन सवालों के जवाब भी मिलेंगे जो ज्यादातर लोगों के मन में रहते हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा का इतिहास
जगन्नाथ रथ यात्रा भारत के सबसे पुराने और बड़े धार्मिक आयोजनों में गिनी जाती है। मान्यता है कि इसकी शुरुआत कई सौ साल पहले ओडिशा के पुरी से हुई थी। यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ हर साल अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। लोग इस जगह को भगवान की मौसी का घर भी कहते हैं। कुछ दिन वहां रहने के बाद तीनों देवता वापस श्री जगन्नाथ मंदिर लौट आते हैं।
बिना किसी भेदभाव के सभी को दर्शन
माना जाता है कि रथ यात्रा के समय भगवान जगन्नाथ खुद मंदिर से बाहर आते हैं ताकि हर भक्त उनके दर्शन कर सके। इस दौरान कोई छोटा-बड़ा, अमीर-गरीब या किसी भी जाति का फर्क नहीं माना जाता। जो भी सच्चे मन से आता है उसे भगवान के दर्शन का मौका मिलता है। यही वजह है कि इस यात्रा को लोगों को जोड़ने और समानता का संदेश देने वाला बड़ा पर्व माना जाता है।
रथ यात्रा का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के बीच आते हैं। इसलिए इस दिन के दर्शन बहुत शुभ माने जाते हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से भगवान का नाम लेने और रथ यात्रा में शामिल होने से जीवन में सुख, शांति और अच्छे कामों की प्रेरणा मिलती है। यह पर्व हमें एक-दूसरे के साथ मिलकर रहने की सीख भी देता है। रथ की रस्सी खींचने में हर उम्र और हर वर्ग के लोग साथ आते हैं। यही वजह है कि रथ यात्रा को आस्था, सेवा, प्रेम और समानता का प्रतीक माना जाता है।
रथ की रस्सी खींचने का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचना बहुत शुभ माना जाता है। लोग इसे भगवान की सेवा का एक तरीका मानते हैं। कहा जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से रथ खींचते हैं, उन पर भगवान की कृपा बनी रहती है। इसी वजह से हर साल लाखों लोग रथ की रस्सी पकड़ने की कोशिश करते हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि अपनी आस्था दिखाने और भगवान के करीब महसूस करने का खास अवसर होता है।
जगन्नाथ रथ यात्रा कितने दिन चलती है?
जगन्नाथ रथ यात्रा करीब 9 दिन तक चलती है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अलग-अलग रस्मों में शामिल होते हैं। हर दिन का अपना अलग महत्व होता है।
पहला दिन – रथ यात्रा
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने-अपने रथ पर बैठकर श्री जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर के लिए निकलते हैं। लाखों श्रद्धालु रथ की रस्सी खींचते हैं।
दूसरा से आठवां दिन – गुंडिचा मंदिर में प्रवास
तीनों देवता गुंडिचा मंदिर में रहते हैं। इस दौरान रोज पूजा, आरती और दर्शन होते हैं। श्रद्धालु बड़ी संख्या में भगवान के दर्शन करने पहुंचते हैं।
नौवां दिन – बहुदा यात्रा
इस दिन तीनों देवता रथ पर सवार होकर वापस श्री जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं। इसे बहुदा यात्रा कहा जाता है। वापसी के बाद आगे की धार्मिक रस्में पूरी की जाती हैं और यात्रा संपन्न होती है।
भगवान बीमार क्यों पड़ते हैं?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को 108 कलशों के जल से स्नान कराया जाता है। कहा जाता है कि इतने बड़े स्नान के बाद तीनों देवता अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके बाद उन्हें करीब 15 दिन तक विश्राम कराया जाता है। इस समय को अनासार कहा जाता है। इन दिनों मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं और भगवान का विशेष उपचार किया जाता है। जब वे पूरी तरह स्वस्थ माने जाते हैं, तब फिर से भक्तों को उनके दर्शन होते हैं। इसके बाद रथ यात्रा की शुरुआत होती है।
तीनों रथों की खासियत
जगन्नाथ रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के लिए तीन अलग-अलग रथ बनाए जाते हैं। हर रथ का नाम, रंग और पहियों की संख्या अलग होती है। सबसे खास बात यह है कि ये रथ हर साल नई लकड़ी से बनाए जाते हैं।
भगवान जगन्नाथ का रथ – नंदीघोष
यह तीनों में सबसे बड़ा रथ होता है। इसमें 16 पहिए होते हैं। इसे लाल और पीले रंग के कपड़ों से सजाया जाता है। इसकी ऊंचाई भी सबसे ज्यादा होती है।
भगवान बलभद्र का रथ – तालध्वज
यह दूसरा सबसे बड़ा रथ होता है। इसमें 14 पहिए लगे होते हैं। इसे लाल और हरे रंग के कपड़ों से सजाया जाता है।
देवी सुभद्रा का रथ – दर्पदलन (देवदलन)
यह तीनों में सबसे छोटा रथ होता है। इसमें 12 पहिए होते हैं। इस रथ पर लाल और काले रंग के कपड़े लगाए जाते हैं।
तीनों रथों को लकड़ी की सुंदर नक्काशी, रंग-बिरंगे कपड़ों और पारंपरिक सजावट से तैयार किया जाता है। यात्रा के दिन लाखों श्रद्धालु मिलकर इन रथों की रस्सी खींचते हैं।
ओडिशा तक सीमित नहीं रथयात्रा
समय के साथ यह यात्रा सिर्फ ओडिशा तक सीमित नहीं रही। आज देश और दुनिया के कई हिस्सों में भी रथ यात्रा निकाली जाती है। हर साल लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं और भगवान के रथ को खींचकर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। यही वजह है कि यह यात्रा सदियों से लोगों की श्रद्धा और परंपरा का खास हिस्सा बनी हुई है।
इस बार जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए क्या तैयारी है?
16 जुलाई 2026 से शुरू हो रही जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए ओडिशा सरकार ने बड़े स्तर पर तैयारी की है। इस साल पुरी में देश और विदेश से करीब 30 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। इसी वजह से सुरक्षा, स्वास्थ्य, सफाई और ट्रैफिक जैसी सभी जरूरी चीजों पर खास ध्यान दिया गया है।
1. सुरक्षा के पक्के इंतजाम
यात्रा के दौरान सुरक्षा बनाए रखने के लिए करीब 12 हजार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके साथ ही कई बड़े पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी भी तैनात रहेंगे। समुद्र किनारे नजर रखने के लिए नौसेना और तटरक्षक बल भी मदद करेंगे। पूरे इलाके पर नजर रखने के लिए करीब 500 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
2. स्वास्थ्य और आपातकालीन सुविधा
अगर किसी श्रद्धालु की तबीयत खराब होती है या कोई दूसरी परेशानी आती है तो तुरंत मदद मिल सके इसके लिए कई निकासी रास्ते बनाए गए हैं। इलाज के लिए आठ अस्थायी अस्पताल भी तैयार किए गए हैं जहां डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ मौजूद रहेगा।
3. साफ-सफाई और लोगों की सुविधा
महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों के लिए अलग से सुविधाएं रखी गई हैं। साफ-सफाई का ध्यान रखने के लिए 1,700 बायो-टॉयलेट लगाए गए हैं। इनकी देखभाल के लिए भी कर्मचारियों और स्वयंसेवकों की ड्यूटी लगाई गई है।
4. ट्रैफिक और सफर की व्यवस्था
शहर में लोगों को सही रास्ता बताने के लिए कई नए साइन बोर्ड लगाए गए हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने 300 स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है ताकि लोगों को आने-जाने में आसानी हो।
5. जानकारी देने की व्यवस्था
यात्रा से जुड़ी जरूरी सूचना लोगों तक जल्दी पहुंचे इसके लिए 65 बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं। मोबाइल पर जरूरी संदेश भेजने की भी व्यवस्था की गई है। नेटवर्क बेहतर रहे इसके लिए नए मोबाइल टावर भी लगाए गए हैं।
Created On :   16 July 2026 7:35 PM IST








