Parvati Jayanti 2026: अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है पार्वती जयंती का व्रत, इस विधि से करें देवी की पूजा, जानिए पूजा मुहूर्त

डिजिटल डेस्क, भोपाल। सनातन धर्म में मां पार्वती को शक्ति, सौभाग्य, प्रेम और अटूट वैवाहिक जीवन की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। वहीं हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि को पार्वती जयंती के रूप में मनाए जाने की परंपरा है। इसे कुंआरी कन्याओं और सुहागिन महिलाओं दोनों के लिए बेहद खास माना गया है और वे इस दिन व्रत रखने के साथ ही पूरी विधि विधान से देवी की पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से मां पार्वती तथा भगवान शिव की पूजा करने से अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और मनचाहे जीवनसाथी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी अटूट भक्ति और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इस वर्ष 21 जुलाई को पार्वती जयंती मनाई जा जा रही है। आइए जानते हैं इस पर्व की पूजा विधि, धार्मिक महत्व और मुहूर्त...
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पार्वती जयंती का शुभ मुहूर्त
अष्टमी तिथि आरंभ: 21 जुलाई 2026, मंगलवार की सुबह 04 बजकर 02 मिनट से
अष्टमी तिथि समापन: 22 जुलाई 2026, बुधवार की सुबह 5 बजकर 17 मिनट तक
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पूजा विधि
- घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करके चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
- भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- गंगाजल से शुद्धिकरण कर दीपक और धूप जलाएं।
- मां पार्वती को लाल फूल, सिंदूर, चुनरी, श्रृंगार सामग्री, फल और मिठाई अर्पित करें।
- भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भस्म, अक्षत और जल अर्पित करें।
- 'ॐ पार्वत्यै नमः' तथा 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- शिव-पार्वती की आरती करें और सुख-समृद्धि व परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।
- पूजा के बाद प्रसाद का वितरण करें।
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Created On :   21 July 2026 3:10 PM IST







