Lalita Saptami 2026: ललिता सप्तमी व्रत का क्या है महत्व? जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

डिजिटल डेस्क, भोपाल। हिंदू धर्म में हर तिथि का अपना विशेष महत्व माना गया है। वहीं हर वर्ष भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ललिता सप्तमी व्रत रखा जाता है। यह दिन राधा रानी की प्रिय सखी और सखी-परंपरा में प्रमुख स्थान रखने वाली ललिता देवी को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और विधि-विधान से पूजा करने से सुख-समृद्धि, पारिवारिक शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है। इस वर्ष यह व्रत 18 सितंबर 2026, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा।
पुराणों के अनुसार, यह व्रत पहली बार श्री कृष्ण द्वारा बताए जाने पर रखा गया था। इस दिन ललिता देवी प्रकट हुई थीं। इस दिन मुख्य रूप से वैष्णव समुदाय के लोग बहुत श्रद्धा से ललिता देवी की पूजा अर्चना और अनुष्ठान करते हैं तथा इसे एक त्यौहार के रूप में मनाते हैं। आइए जानते हैं इस दिन का महत्व, पूजा की विधि और मुहूर्त...
ललिता सप्तमी व्रत का महत्व
मान्यता है कि, इस दिन व्रत करने से नवविवाहित जोड़ों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। वहीं जिनके बच्चे हो चुके हैं वे मां अपने बच्चों को स्वास्थ्य, बुद्धि और लंबे जीवन की प्राप्ति की कामना लिए यह व्रत करती हैं। इसके अलावा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ललिता सप्तमी के दिन व्रत रखने और पूजा करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहने की कामना की जाती है। दांपत्य जीवन में प्रेम और आपसी समझ बढ़ने की मान्यता भी है। ब्रज परंपरा में इस दिन ललिता देवी के प्रति श्रद्धा और भक्ति प्रकट की जाती है।
ललिता सप्तमी कब से कब तक
सप्तमी तिथि आरंभ: 17 सितंबर 2026, गुरुवार की सुबह 10 बजकर 48 मिनट से
सप्तमी तिथि समापन: 18 सितंबर 2026, शुक्रवार की दोपहर 1 बजकर 02 मिनट तक
पूजा विधि
- सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करें। एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर ललिता देवी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। साथ में राधा-कृष्ण की तस्वीर भी रख सकते हैं।
- पूजा स्थल पर जल से भरा कलश रखें। कलश पर आम के पत्ते और नारियल रखकर भगवान गणेश का स्मरण करें। इसके बाद पूजा का संकल्प लें।
- ललिता देवी को जल या पंचामृत से स्नान कराने की परंपरा हो तो उसके अनुसार पूजा करें।
- इसके बाद उन्हें वस्त्र, रोली, अक्षत, फूल और माला अर्पित करें।
- देवी को फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार सात्विक भोग अर्पित करें।
- ललिता देवी के साथ राधा-कृष्ण का स्मरण और पूजन करें।
- भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के नाम का जाप करें तथा भजन-कीर्तन कर सकते हैं।
- पूरे दिन अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत रखें। ललिता सप्तमी की कथा सुनें या पढ़ें। शाम के समय दोबारा पूजा कर आरती करें।
- पूजा के बाद जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, फल या अपनी क्षमता के अनुसार अन्य वस्तुओं का दान करें।
डिसक्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारी अलग अलग किताब और अध्ययन के आधार पर दी गई है। bhaskarhindi.com यह दावा नहीं करता कि ये जानकारी पूरी तरह सही है। पूरी और सही जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ (ज्योतिष/वास्तुशास्त्री/ अन्य एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें।
Created On :   17 Sept 2026 2:00 PM IST








