दैनिक भास्कर हिंदी: देव उठनी एकादशी : उठो देव सांवरा... जानें श्रीहरि को जगाने की विधि

August 29th, 2018

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तुलसी-शालिग्राम विवाह की धूम हर ओर देखने मिल रही है। मंदिरों में श्रीहरि को जगाने के लिए विशेष तैयारियां हैं। देवउठनी एकादशी जिसे भगवान विष्णु के चार माह बाद जागने की वजह से देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन तुलसी विवाह वैदिक विधि से किया जाता है। वृंदा की भक्ति व पतिव्रत धर्म से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने तुलसी के रूप में सदैव ही अपने साथ पूजे जाने का आशीर्वाद दिया था। जिसके बाद से प्रतिवर्ष तुलसी और भगवान विष्णु के पाषाण स्वरूप (शालिग्राम) की पूजा की जाती है। इस विवाह-पूजन को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं, लेकिन यदि आप एकादशी का यह पूजन करते हैं तो आपके लिए ये बातें जानना बेहद जरूरी हैं... 

पूजन विधि की खास बातें

-तुलसी का मंडप गन्ने से ही सजाएं। 
-तुलसी को मंडप में ले जाने से पूर्व चुनरी ओढ़ाएं। 
-तुलसी शालिग्राम को एक पटे पर बिठाएं। 
-विवाह विधि शुरू करने से मंडप में भी तिलक करें।
-भगवान शालिग्राम को गमले या तुलसी के पौधे के पास रखें, उन्हें अक्षत की बजाए तिल चढ़ाएं। 
-तुलसी और भगवान शालिग्राम पर दूध चढ़ाएं, लेकिन स्मरण रहे कि ये दूध हल्दी में मिला हुआ हो। 
-विवाह के वक्त बोला जाने वाला मंगलाष्टक अवश्य बोलें।
-विवाह विधि और पूजा के बाद 11 बार तुलसी शालिग्राम की परिक्रमा करें। 
-तुलसी-शालिग्राम को सभी तरह की भाजियां अर्पित करें, इसमें मूली, चना भाजी सहित नयी सब्जियां भी शामिल हों।
-पूजा पूर्ण होने के बाद चारों ओर से श्रीहरि का पटा या पटिए को उठाकर भगवान विष्णु से जागने और पुनः सृष्टि का कार्यभार संभालने की प्रार्थना करें। 
-उन्हें जगाने के दौरान करें, 'उठाे देव सांवरा खाओ भाजी बोर और आंवला, गन्ना की झोपड़ी में शंकर जी की यात्रा'। इसके बाद विष्णुदेव को पुनः घंटे, नगाड़े, शंख बजाकर उठने की प्रार्थना करें, ताकि भगवान शिव कैलाश की ओर यात्रा प्रारंभ कर सकें। 
-पूजा संपन्न होने के बाद भोग को भोजन के साथ ग्रहण करें। इससे पूर्व इसे प्रसाद के रूप में बांट दें।