दैनिक भास्कर हिंदी: नरसिंह जयंती 2020: श्रीहर‍ि के चौथे अवतार माने जाते हैं नृसिंह, इस पूजा से करें प्रसन्न

May 6th, 2020

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को नरसिंह जयंती (Narasimha Jayanti) मनाई जाती है। इस वर्ष यह 6 मई 2020 यानी कि आज बुधवार को है। हालांकि लॉकडाउन के चलते मंदिरों के द्वार नहीं खुले हैं, ऐसे में भक्तों को यह जयंती घर पर रहकर ही मनाना होगी। नरसिंह जयंती का हिन्दू धर्म में अत्यधिक महत्व है। पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु आधा नर और आधा शेर यानी नरसिंह अवतार में प्रकट हुए थे। भगवान नृसिंह श्रीहर‍ि के चौथे अवतार माने जाते हैं।

भगवान नरसिंह शक्ति तथा पराक्रम के प्रमुख देवता हैं। भगवान नरसिंह, श्रीहरि विष्णु के उग्र और शक्तिशाली अवतार माने जाते हैं। इनकी आराधना करने से हर प्रकार के संकटोंं से रक्षा होती है। भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर राजा हिरण्यकश्यप का अंहकार और वरदान दोनों चूर-चूर कर दिया था। नरसिंह जयंती की यह कथा पौराणिक कथाओं में काफी प्रचलित है। आइए जानते हैं नरसिंह जयंती से जुड़ी खास बातें...

महत्व
मान्यता है कि भगवान नरसिंह के दिन उनकी पूजा और व्रत रखने से सभी दुख और दर्द दूर हो जाते हैं। क्योंकि जिस प्रकार उन्होंने भक्त प्रहलाद की हमेशा रक्षा की, ठीक उसी प्रकार भगवान नरसिंह किसी पर भी कष्ट नहीं आने देते। वहीं, नरसिंह जी के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में आई किसी भी प्रकार की आर्थिक समस्या समाप्त हो जाती है।

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शुभ मुहूर्त-
तिथि प्रारंभ: 5 मई 2020 को रात 11 बजकर 20 मिनट से  
तिथि समापन: 6 मई को शाम 7 बजकर 45 मिनट पर

व्रत विधि
- इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करा चाहिए।- इसके बाद व्रत-उपवास और पूजा-अर्चना का संकल्प लें। 
- इस दिन भगवान नरसिंह की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करनी चाहिए। 
- भगवान नरसिंह और लक्ष्मीजी की मूर्ति स्थापित करना चाहिए।
- इसके बाद वेद मंत्रों से इनकी प्राण-प्रतिष्ठा कर षोडशोपचार से पूजन करना चाहिए। 
- भगवान नरसिंह की पूजा के लिए फल, पुष्प, पंचमेवा, कुमकुम, केसर, नारियल, अक्षत व पीताम्बर रखना चाहिए। 

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- गंगाजल, काले तिल, पंच गव्य व हवन सामग्री का पूजन में उपयोग करें।
- भगवान नरसिंह को प्रसन्न करने के लिए उनके नरसिंह गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। 
- पूजा के बाद एकांत में कुश के आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला से नरसिंह भगवान के मंत्र का जप करना चाहिए। 
- इस दिन व्रती को सामर्थ्य अनुसार तिल, स्वर्ण के साथ ही वस्त्रादि का दान करना चाहिए। 
- इस व्रत को करने वाला व्यक्ति लौकिक दुःखों से मुक्त हो जाता है। भगवान नरसिंह अपने भक्त की रक्षा करते हैं व उसकी समस्त मनोकामनाएं पूरी करते हैं।